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फर्जी मार्कशीट लगा नौकरी हथियाने वाले 4 शिक्षक होंगे बर्खास्त
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फोटो-21-जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव। संवाद
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी आगरा की फर्जी बीएड मार्कशीट लगाकर नौकरी पाने वाले चार बेसिक शिक्षकों को बर्खास्त किया जाएगा। इसमें से तीन शिक्षक पिछले वर्ष बर्खास्तगी के बाद कोर्ट के आदेश पर बहाल हुए थे, लेकिन अब पुन: कोर्ट के आदेश पर बर्खास्त किए जाएंगे। सचिव के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी आगरा की बीएड की फर्जी मार्कशीट लगाए जाने के मामले में एसआईटी ने 16 बेसिक शिक्षकों को चिह्नित किया था। जांच में पुष्टि होने के बाद सभी को बर्खास्त कर दिया गया था, लेकिन इनमें से तीन शिक्षक कोर्ट से स्टे ले आए थे।
इस पर इनको दोबारा फरवरी 2020 में ज्वाइन करा दिया गया था। इसमें जूनियर स्कूल मिरगावां हरपालपुर में सहायक पद पर तैनात कांशीराम नगर निवासी राधेश्याम, प्राथमिक विद्यालय तेरा भरखनी में तैनात सत्येंद्र कुमार निवासी एटा एवं सांडी के लाहोरी प्राइमरी स्कूल की सहायक अध्यापिका ममता त्रिपाठी शामिल हैं।
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26 फरवरी 2021 को हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद एक बार फिर इन शिक्षकों के विरोध में फैसला दिया है। इसके बाद सचिव ने शिक्षा विभाग को निर्देश भेजकर बहाल शिक्षकों को बर्खास्त करने के निर्देश दिए हैं। इन तीन शिक्षकों के साथ ही मंसूरनगर पिहानी प्राथमिक विद्यालय में तैनात बुलंदशहर निवासी अखिलेश को भी बीएड की फर्जी मार्कशीट लगाने का दोषी पाया गया है। तीनों के साथ इनको भी बर्खास्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
बीएसए हेमंत राव ने बताया कि सचिव के निर्देश मिल गए हैं। कार्रवाई इस ओर शुरू कर दी गई है। लीगल कार्रवाई पूरी करते हुए रविवार या सोमवार को उन्हें जिला स्तर से भी पत्र जारी कर दिया जाएगा। इनके खिलाफ एफआईआर और रिकवरी भी करवाई जाएगी।
तीनों शिक्षकों से वसूले जाएंगे 1.28 करोड़
जनवरी 2020 में बर्खास्त तीनों शिक्षकों से एक करोड़ 28 लाख 40 हजार की राशि वसूली जाएगी। राधेश्याम से 4307211, सत्येंद्र कुमार से 4271741 एवं ममता से 4261997 रुपये की वसूली की जाएगी। बीएसए ने बताया कि इनकी पहले ही रिकवरी बन चुकी थी। चौथे शिक्षक अखिलेश की रिकवरी के लिए खंड शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया जाएगा।
2010 से कर रहे थे नौकरी
ज्वाइनिंग के बाद शिक्षकों को पहला वेतन जारी करने से पहले संबंधित अभिलेखों का बोर्ड और यूनिवर्सिटी से सत्यापन कराया जाता है, लेकिन जिले में किस तरह से सत्यापन कराया गया। यह समझ से पा रहा। राधेश्याम अगस्त 2010, सत्येंद्र 21 जुलाई 2010 एवं ममता 11 अगस्त 2010 को जिले में सहायक शिक्षक पद पर ज्वाइन हुए थे और तब से लगातार वेतन ले रहे थे।
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डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी आगरा की बीएड की फर्जी मार्कशीट लगाए जाने के मामले में एसआईटी ने 16 बेसिक शिक्षकों को चिह्नित किया था। जांच में पुष्टि होने के बाद सभी को बर्खास्त कर दिया गया था, लेकिन इनमें से तीन शिक्षक कोर्ट से स्टे ले आए थे।
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इस पर इनको दोबारा फरवरी 2020 में ज्वाइन करा दिया गया था। इसमें जूनियर स्कूल मिरगावां हरपालपुर में सहायक पद पर तैनात कांशीराम नगर निवासी राधेश्याम, प्राथमिक विद्यालय तेरा भरखनी में तैनात सत्येंद्र कुमार निवासी एटा एवं सांडी के लाहोरी प्राइमरी स्कूल की सहायक अध्यापिका ममता त्रिपाठी शामिल हैं।
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26 फरवरी 2021 को हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद एक बार फिर इन शिक्षकों के विरोध में फैसला दिया है। इसके बाद सचिव ने शिक्षा विभाग को निर्देश भेजकर बहाल शिक्षकों को बर्खास्त करने के निर्देश दिए हैं। इन तीन शिक्षकों के साथ ही मंसूरनगर पिहानी प्राथमिक विद्यालय में तैनात बुलंदशहर निवासी अखिलेश को भी बीएड की फर्जी मार्कशीट लगाने का दोषी पाया गया है। तीनों के साथ इनको भी बर्खास्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
बीएसए हेमंत राव ने बताया कि सचिव के निर्देश मिल गए हैं। कार्रवाई इस ओर शुरू कर दी गई है। लीगल कार्रवाई पूरी करते हुए रविवार या सोमवार को उन्हें जिला स्तर से भी पत्र जारी कर दिया जाएगा। इनके खिलाफ एफआईआर और रिकवरी भी करवाई जाएगी।
तीनों शिक्षकों से वसूले जाएंगे 1.28 करोड़
जनवरी 2020 में बर्खास्त तीनों शिक्षकों से एक करोड़ 28 लाख 40 हजार की राशि वसूली जाएगी। राधेश्याम से 4307211, सत्येंद्र कुमार से 4271741 एवं ममता से 4261997 रुपये की वसूली की जाएगी। बीएसए ने बताया कि इनकी पहले ही रिकवरी बन चुकी थी। चौथे शिक्षक अखिलेश की रिकवरी के लिए खंड शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया जाएगा।
2010 से कर रहे थे नौकरी
ज्वाइनिंग के बाद शिक्षकों को पहला वेतन जारी करने से पहले संबंधित अभिलेखों का बोर्ड और यूनिवर्सिटी से सत्यापन कराया जाता है, लेकिन जिले में किस तरह से सत्यापन कराया गया। यह समझ से पा रहा। राधेश्याम अगस्त 2010, सत्येंद्र 21 जुलाई 2010 एवं ममता 11 अगस्त 2010 को जिले में सहायक शिक्षक पद पर ज्वाइन हुए थे और तब से लगातार वेतन ले रहे थे।