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Hardoi News: हरदोई में मदरसों से ‘गुम’ हो गए 10185 विद्यार्थी

Thu, 20 Jul 2023 12:57 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 20 Jul 2023 12:57 AM IST
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10185 students went 'missing' from madrassas in Hardoi
हरदोई। विद्यार्थियों के नामांकन के साथ आधार की अनिवार्यता से जनपद के मदरसों में फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगी हैं। आधार अनिवार्य किए जाते ही गतवर्ष की अपेक्षा जनपद के मदरसों के 10 हजार से अधिक विद्यार्थी अचानक गुम हो गए। कई मदरसों में तो 90 फीसदी से अधिक विद्यार्थियों का कोई ब्योरा ही नहीं मिल रहा है।
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जनपद के विभिन्न इलाकों में कुल 141 मदरसे संचालित हैं। पिछले शिक्षा सत्र में इन मदरसों में 25,944 विद्यार्थी अध्ययनरत थे। मौजूद शिक्षा सत्र में शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सभी विद्यार्थियों का ब्योरा आधार से जोड़ दिया जाए। इसके पीछे कई वजह थीं। एक तो सीधे छात्र के खाते में छात्रवृत्ति से लेकर अन्य चीजों का बजट भेजा जा सके। साथ ही कहीं भी छात्रों के ब्योरे में फर्जीवाड़ा न हो सके।
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सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के चक्कर में कई बार विद्यार्थियों का पंजीकरण मदरसों और परिषदीय विद्यालयों में कर दिया जाता है, लेकिन यह वास्तव में या तो किसी प्राइवेट संस्थान में पढ़ते हैं या फिर इनका कोई अस्तित्व ही नहीं होता। जब आधार अनिवार्य किया गया, तो जनपद में संचालित मदरसों के आंकड़े भी चौंकाने वाले आए। यू-डायस पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक विगत शैक्षणिक सत्र में जनपद में 141 मदरसों में 25,944 विद्यार्थी थे। जब आधार से नामांकन अनिवार्य हुआ तो इनकी संख्या घटकर 15,759 हो गई। मतलब यह कि 10,185 विद्यार्थियों का कोई अता-पता नहीं है। यही वजह है कि इनका ब्योरा आधार कार्ड से नहीं जोड़ा जा सका है।
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केस-1
शाहाबाद में मदरसा ए ऐरा नेकोजई में संचालित है। यू-डायस पोर्टल की रिपोर्ट के मुताबिक यहां गत शैक्षिक सत्र में 311 विद्यार्थी थे, लेकिन जब आधार की अनिवार्यता हुई तो 289 विद्यार्थियों का कोई ब्योरा ही नहीं मिला। महज 22 विद्यार्थियों का ब्योरा आधार से जोड़कर अपलोड किया गया।

केस-2
मदरसा जामियां अनवारुल उलूम बंदरहिया में गत शैक्षिक सत्र में 248 विद्यार्थी थे। आधार की अनिवार्यता हुई, तो 218 विद्यार्थियों का ब्योरा ढूंढे नहीं मिल रहा। यू डायस पोर्टल की बुधवार की रिपोर्ट के मुताबिक यहां महज 30 विद्यार्थियों का ही आधार लिंक हुआ है।


3.60 करोड़ रुपये का एक साल में हुआ फर्जीवाड़ा
जनपद में विद्यार्थियों का ब्योरा जब आधार से जोड़ा गया, तो मदरसों के दस हजार से अधिक विद्यार्थी कम या यूं कहें गुम हो गए। अब बड़ा सवाल यह है कि इनकी छात्रवृत्ति आखिर किसके खातों में जा रही थी और कौन इसका इस्तेमाल कर रहा था। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि शैक्षिक सत्र 2021-22 तक मदरसों में पढऩे वाले 23299 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जा रही थी। प्रतिमाह तीन सौ रुपये के हिसाब से छात्रवृत्ति दी जाती है। मतलब यह कि एक विद्यार्थी को एक वर्ष में 3600 रुपये छात्रवृत्ति मिलती रही है। अगर आंकड़े जुटाएं, तो दस हजार विद्यार्थियों को एक वर्ष में तीन करोड़ 60 लाख रुपये छात्रवृत्ति भेजी गई और अब इन्हीं विद्यार्थियों का कोई ब्योरा नहीं मिल रहा है।


फर्जीवाड़ा रोकने के लिए ही पूरा ब्योरा आधार से जोड़ा जा रहा है। सैंपल के तौर पर कुछ मदरसों की जांच कराएंगे। फर्जीवाड़ा मिला तो जांच होगी। -एमपी सिंह, डीएम
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