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पशु कटान पर रोक से खुलेगी दूसरी श्वेत क्रांति की राह
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Tue, 18 Apr 2017 09:09 PM IST
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दूध
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प्रदेश सरकार की सख्ती से पशुओं के कटान पर काफी हद तक लगाम लगने के बाद अब प्रदेश में दूसरी श्वेत क्रांति की राह खुलने की उम्मीदें जगी हैं। हालांकि, दस सालों में हुए अंधाधुंध दुधारू पशुओं और लवारों के कटान की भरपाई करना प्रशासन के सामने चुनौती है।
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हालांकि नई सरकार की मंशा को देख संबंधित अधिकारियों की मुस्तैदी इस ओर इशारा जरूर कर रही है कि आने वाला समय दूध उत्पादन में नए आयाम गढ़ेगा। पिछली सरकारों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हुए अंधाधुंध पशु कटान के बाद यहां दूध का कटौरा लगभग खाली हो गया था।
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नई सरकार की गठन के बाद पूरे प्रदेश का माहौल बदल गया है। प्रशासनिक अमला पशु कटान से सख्ती से निपट रहा है। वहीं, मुस्लिम समाज भी गोरक्षा के प्रति सजग नजर आ रहा है। सरकार की मंशा को देखकर अधिकारी भी स्वेत क्रांति को बढ़ावा देने की जुगत में लग गए हैं।
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वर्ष 2007 की पशु जनगणना के अनुसार जिले में पशुओं की संख्या करीब नौ लाख थी। जिनमें दुधारू पशुओं की संख्या करीब पांच लाख थी। उस समय दूध की उपलब्धता भी रिकॉर्ड रही।
लेकिन इसके बाद हापुड़, मेरठ, बुलंदशहर सहित आसपास के जिलों में दुधारू पशुओं और लवारों के अंधाधुंध कटान से दस वर्षों में स्थिति बिल्कुल बदल गई। अकेले हापुड़ में ही रोज हजारों पशुओं का वध किया गया।
स्लेटर हाउस चलाने के लिए 11 विभागों से एनओसी की आवश्यकता होती है। वहीं, पशु काटने के लिए भी पशु अधिनियम 2001 में सख्त नियम तय किए गए थे। जिनमें बांझ, बिना दूध देने वाला, किसान के लिए बेकार हो चुके पशु को ही काटा जाना तय था।
कटान से पहले कमेले में अनुबंधित चिकित्सक से जांच कराए जाने का भी प्रावधान है। लेकिन इनमें से किसी नियम का पालन नहीं किया गया।
वर्ष 2007 में हुई पशुओं की गणना के वर्ष 2012 में हुई 19वीं पशु गणना में देश में पशुओं की संख्या में 3.34 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी। इसके बाद लगातार यह आंकड़ा गिर रहा है। प्रदेश में यह आंकड़ा दस प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
जबकि वेस्ट यूपी में फिलहाल पशुओं की घटने की दर 13.5 प्रतिशत है। वेस्ट यूपी में सबसे अधिक कटान मेरठ, हापुड़, सहारनपुर, देवबंद, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, खुर्जा, मुरादाबाद व अलीगढ़ में हुआ।
एक व्यक्ति को प्रतिदिन 400 ग्राम शुद्ध दूध की आवश्यकता होती है। लेकिन सर्वेक्षण के अनुसार पश्चिमी यूपी में प्रति व्यक्ति 259 ग्राम दूध ही उपलब्ध हो रहा है। इसमें भी 30 प्रतिशत दूध सिंथैटिक है।
प्रशासन भले ही आंखे मूंदे बैठा हो लेकिन जिले में हाफिजपुर, गढ़ और धौलाना क्षेत्र में बड़ी मात्रा में सिंथेटिक दूध तैयार किया जा रहा है। यहां से सिंथैटिक दूध बनाकर टैंकर के माध्यम से जगह जगह सप्लाई किया जाता है।
सीवीओ वाईपी सिंह कहते हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अवैध कटान से जो क्षति पिछले दस सालों में हुई है, उसकी भरपाई इतनी आसान नहीं है। सरकार नई प्रोत्साहन योजनाएं लाये।
इसके बाद अगले पांच साल में स्थिति में सुधार होता दिखायी देगा। उन्होंने कहा कि हालांकि विभाग पशुओं की संख्या में बढ़ोत्तरी के प्रयास के साथ साथ अच्छी नश्ल के पशुओं के विकसित करने पर जोर दे रहा है।