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Hapur News: किसानों को न्याय दिलाने के लिए मुख्यमंत्री से मिले विधायक
Tue, 23 Dec 2025 10:06 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Tue, 23 Dec 2025 10:06 PM IST
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हापुड़। एचपीडीए की आनंद विहार आवासीय योजना में अधिग्रहीत हुई जमीन से जुड़े किसानों और व्यापारियों को न्याय दिलाने के लिए मंगलवार को सदर विधायक विजयपाल आढ़ती ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस योजना के कारण तीन गांवों के किसान और व्यापारी परेशान हैं। इसके साथ विधायक ने जनपद न्यायालय के जल्द निर्माण और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की भी मांग की।
विधायक ने बताया कि प्राधिकरण ने 25 नवंबर 2005 में प्रकाशित धारा-4 में गांव सबली, चमरी व अच्छेजा की भूमि के अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी की थी। इस योजना के लिए जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में अनियमितता बरती गई और शासनादेश का उल्लंघन किया। इस मामले में आदेश था कि पूर्व निर्मित आवासों व भवनों का अर्जन न किया जाए। बावजूद इसके नियमों को दरकिनार कर सभी भवनों का अधिग्रहण कर लिया गया। एचपीडीए की स्थापना से पूर्व यहां भवन और दुकानें बनीं हुई थी। इसके साक्ष्य के लिए गृह कर, जलकर और बिजली बिल आदि भी हैं। यहां तक कि प्राधिकरण ने 2006 में कराए गए भौतिक सर्वे में भी उक्त भवनों के पूर्व में बने होने की पुष्टि की थी। यह भी बताया कि ये भवन भूमि प्राधिकरण के क्षेत्र में बंधक नहीं है। वर्ष 2008 में भी प्राधिकरण ने खसरा-खतौनियों में अपना कब्जा दिखाया, लेकिन वर्तमान में भी किसान अपनी जमीनों पर आज भी खेती कर रहे हैं। यहां तक कि व्यापारिक प्रतिष्ठान पर भी व्यापारियों का कब्जा है।
उन्होंने कहा कि एडीएम गाजियाबाद ने भी वर्ष 2014 में अधिग्रहित भूमि का 261 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से अवार्ड कर दिया, जबकि इसका कोई प्रचार-प्रसार भी नहीं किया गया और न ही कोई नोटिस निकाला गया। इस मामले में पूर्व में हुई बैठक में प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष ने बताया था कि यदि उक्त भवनों, प्रतिष्ठानों को विनियमित किया जाता है तो आनंद विहार आवासीय योजना पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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वहीं, एचपीडीए की बोर्ड बैठक में किसानों व व्यापारियों की प्रस्तावित मांगों पर विचार होना था, इसमें सड़क से 100 मीटर तक की जमीन को निशुल्क छोड़ा जाना, जमीन का किसानों को नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा दिया जाना और छह प्रतिशत विकसित भूखंड दिए जाने की मांग रखी गई। इसके अलावा जिस किसान की जमीन आवासीय योजना के रास्ते के लिए अधिग्रहित की जाती है, उतनी ही भूमि प्राधिकरण द्वारा किसान को उपलब्ध कराने की मांग रखी गई, लेकिन प्राधिकरण ने प्रस्तावित 19 हजार वर्ग मीटर की दर से शासन द्वारा प्रस्ताव पास करा दिया गया, जो कि बिल्कुल गलत है। इसलिए मामले में किसानों और व्यापारियों की समस्या को देखते हुए उनके हक में निर्णय लिया जाए। वहीं विधायक ने हापुड़ में जिला न्यायालय के लिए बजट आवांटति कराने और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना जल्द से जल्द कराने की मांग की। मुख्यमंत्री ने जल्द ही सभी मांगों को पूर्ण करने का आश्वासन दिया।
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विधायक ने बताया कि प्राधिकरण ने 25 नवंबर 2005 में प्रकाशित धारा-4 में गांव सबली, चमरी व अच्छेजा की भूमि के अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी की थी। इस योजना के लिए जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में अनियमितता बरती गई और शासनादेश का उल्लंघन किया। इस मामले में आदेश था कि पूर्व निर्मित आवासों व भवनों का अर्जन न किया जाए। बावजूद इसके नियमों को दरकिनार कर सभी भवनों का अधिग्रहण कर लिया गया। एचपीडीए की स्थापना से पूर्व यहां भवन और दुकानें बनीं हुई थी। इसके साक्ष्य के लिए गृह कर, जलकर और बिजली बिल आदि भी हैं। यहां तक कि प्राधिकरण ने 2006 में कराए गए भौतिक सर्वे में भी उक्त भवनों के पूर्व में बने होने की पुष्टि की थी। यह भी बताया कि ये भवन भूमि प्राधिकरण के क्षेत्र में बंधक नहीं है। वर्ष 2008 में भी प्राधिकरण ने खसरा-खतौनियों में अपना कब्जा दिखाया, लेकिन वर्तमान में भी किसान अपनी जमीनों पर आज भी खेती कर रहे हैं। यहां तक कि व्यापारिक प्रतिष्ठान पर भी व्यापारियों का कब्जा है।
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उन्होंने कहा कि एडीएम गाजियाबाद ने भी वर्ष 2014 में अधिग्रहित भूमि का 261 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से अवार्ड कर दिया, जबकि इसका कोई प्रचार-प्रसार भी नहीं किया गया और न ही कोई नोटिस निकाला गया। इस मामले में पूर्व में हुई बैठक में प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष ने बताया था कि यदि उक्त भवनों, प्रतिष्ठानों को विनियमित किया जाता है तो आनंद विहार आवासीय योजना पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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वहीं, एचपीडीए की बोर्ड बैठक में किसानों व व्यापारियों की प्रस्तावित मांगों पर विचार होना था, इसमें सड़क से 100 मीटर तक की जमीन को निशुल्क छोड़ा जाना, जमीन का किसानों को नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा दिया जाना और छह प्रतिशत विकसित भूखंड दिए जाने की मांग रखी गई। इसके अलावा जिस किसान की जमीन आवासीय योजना के रास्ते के लिए अधिग्रहित की जाती है, उतनी ही भूमि प्राधिकरण द्वारा किसान को उपलब्ध कराने की मांग रखी गई, लेकिन प्राधिकरण ने प्रस्तावित 19 हजार वर्ग मीटर की दर से शासन द्वारा प्रस्ताव पास करा दिया गया, जो कि बिल्कुल गलत है। इसलिए मामले में किसानों और व्यापारियों की समस्या को देखते हुए उनके हक में निर्णय लिया जाए। वहीं विधायक ने हापुड़ में जिला न्यायालय के लिए बजट आवांटति कराने और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना जल्द से जल्द कराने की मांग की। मुख्यमंत्री ने जल्द ही सभी मांगों को पूर्ण करने का आश्वासन दिया।