फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hapur News ›   Two more people died from cancer.

कैंसर से दो और लोगों ने तोड़ा दम

Wed, 21 Jun 2017 09:44 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़ Updated Wed, 21 Jun 2017 09:44 PM IST
विज्ञापन
Two more people died from cancer.
कैंसर - फोटो : अमर उजाला

क्षेत्र में कैंसर का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को कैंसर से अल्लाबख्शपुर गांव के एक वृद्ध और मुरादपुर निजामसर की एक वृद्धा की मौत हो गई। अल्लाबख्शपुर गांव में कैंसर से बीते करीब 40 दिन में 15 लोगों की मौत हो चुकी है।

विज्ञापन


ब्रजघाट गंगानगरी से जुड़े हाईवे किनारे वाले गांव अल्लाबख्शपुर में कैंसर के कहर ने 9 हजार की आबादी को बुरी तरह खौफजदा किया हुआ है। बुधवार की शाम गांव निवासी मगरूब अहमद (62) की कैंसर से मौत हो गई।
विज्ञापन


बेटे उस्मान ने बताया कि मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा के बाद इन दिनों दिल्ली के एम्स का उनका इलाज चल रहा था। गांव में 6 मई से लेकर अब तक महिलाओं समेत 15 मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें से अधिकांश लीवर और आंतों के कैंसर से पीड़ित थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


मृतकों में आस मुहम्मद, शरीफ, बुंदू, इलियास, कनीज, महफूदा, अफसरी, शफातुल्ला, इदरीस, खालिद, संतबीर, फरजाना, खलील, अफसाना और मगरूब शामिल हैं। वहीं गांव में करीब दो दर्जन लोग अब भी कैंसर की गिरफ्त में हैं। दिन ब दिन इन मरीजों की हालत बिगड़ती जा रही है।

हापुड़ में मुरादपुर निजामसर निवासी 55 वर्षीय केलावती बीते काफी समय से कैंसर से पीड़ित चल रही थीं। उनका इलाज कई अस्पतालों में कराया गया, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। मंगलवार को केलावती ने दम तोड़ दिया। इससे परिजनों में कोहराम मच गया है।

मृतक के पुत्र करणपाल ने बताया कि गांव में एक वर्ष के अंदर सतवीर, ओमपाल, शिवराज सहित छह लोगों की मौत कैंसर के कारण मौत हो चुकी है। पप्पू सहित आधा दर्जन लोग अब भी इस बीमारी की चपेट में हैं। उन्होंने बताया कि गांव का पानी दूषित हो चुका है, इसके सेवन से अनेक बीमारियां फैल रही हैं।

कई बार पानी के सैंपल लिए जा चुके हैं, लेकिन राहत का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों से भी स्वच्छ जलापूर्ति की मांग उठाकर थक चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस है।


टीम को मौके पर भेजकर ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच कराई जाएगी। उन्हें परेशान नहीं होने दिया जाएगा।  डॉ. एके सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी

फैक्ट्रियों के दुष्प्रभाव और कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल होने से करीब तीन सौ फुट गहराई वाला पानी अब पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह गया है। इसलिए हेपेटाइटिस और कैंसर से प्रभावित गांवों में टंकी से पेयजल सप्लाई दिलाना बेहद जरूरी है। प्रो. अब्बास अली, पर्यावरणविद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed