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फ्रेट कॉरिडोर: खुर्जा से खतौली तक दौड़ी कोयले से भरी मालगाड़ी
Fri, 30 Jun 2023 10:48 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Fri, 30 Jun 2023 10:48 PM IST
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हापुड़। डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर शुक्रवार को कोयले से लदी 56 डिब्बों की मालगाड़ी का ट्रायल किया गया। बारिश के व्यवधान के कारण ट्रायल की शुरूआत एक दिन देरी से हुई। दोपहर 2.15 बजे मालगाड़ी खुर्जा न्यू स्टेशन से खतौली के लिए रवाना हुई। ट्रायल के दौरान अधिकारी पल निरीक्षण करते रहे और इस दौरान किसी प्रकार की खामी सामने नहीं आई।
26 हजार करोड़ की लागत से बन रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का दो भागों में निर्माण हुआ है। पहला भाग वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जो कि दादरी से मुंबई के बंदरगाह तक बन रहा है। वहीं दूसरा भाग है ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जोकि लुधियाना से कोलकाता के डालकुनी तक बन रहा है। एलएंडटी कंपनी द्वारा खुर्जा से सहारनपुर के पिलखनी तक 225 किलोमीटर में कार्य किया जा रहा है। हापुड़ के 21 किलोमीटर लंबाई में कार्य किया गया है। खुर्जा से मेरठ होते हुए सहारनपुर तक का हिस्सा एकल पटरी लाइन का है। खुर्जा से सहारनपुर के बीच लोडिंग व अनलोडिंग स्टेशन भी नहीं है।
शुक्रवार को खुर्जा से करीब सवा दो बजे कोयले से भरी 56 डिब्बों की इलेक्ट्रिक मालगाड़ी का ट्रायल शुरू हुआ। इसमें 2500 टन लोड था। बृहस्पतिवार को बरसात और मालगाड़ी मुहैया न होने के कारण ट्रायल टाल दिया गया था, जिसे शुक्रवार को पूरा किया गया। ट्रायल की निगरानी मुख्य महाप्रबंधक मेरठ अनिल कालरा ने की। इसके अलावा डिप्टी सीपीएम राकेश बब्बू, चीफ ट्रैक इंजीनियर एके वाजपेयी, चीफ सेफ्टी मैनेजर सचिन चौहान भी मौजूद रहे। खुर्जा से खतौली तक 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कोयले की मालगाड़ी दौड़ी। इससे पहले करीब 30 तरह से ट्रायल इस ट्रैक पर हो चुके थे। पहले लोको इलेक्ट्रिक इंजन और फिर मालगाड़ी के खाली डिब्बों को जोडक़र अलग अलग ट्रायल किए जा चुके हैं। खुर्जा से खतौली तक 134 किलोमीटर का सफर मालगाड़ी ने पार किया। हापुड़ तक 13 स्टेशन पार करके यह करीब 5.40 बजे पर गुजरी। इस दौरान कर्मचारी खासे उत्साहित दिखे।
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ट्रायल में नहीं मिली कोई खामी-
ट्रायल के दौरान किसी प्रकार की खामी प्रकाश में नहीं आयी है। देरी से शुरू होने के बावजूद इस दौरान सब कुछ ठीक रहा, जिससे टीम उत्साहित हैं।-गुरविंदर सिंह, प्रबंधक, एलएंडटी।
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26 हजार करोड़ की लागत से बन रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का दो भागों में निर्माण हुआ है। पहला भाग वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जो कि दादरी से मुंबई के बंदरगाह तक बन रहा है। वहीं दूसरा भाग है ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जोकि लुधियाना से कोलकाता के डालकुनी तक बन रहा है। एलएंडटी कंपनी द्वारा खुर्जा से सहारनपुर के पिलखनी तक 225 किलोमीटर में कार्य किया जा रहा है। हापुड़ के 21 किलोमीटर लंबाई में कार्य किया गया है। खुर्जा से मेरठ होते हुए सहारनपुर तक का हिस्सा एकल पटरी लाइन का है। खुर्जा से सहारनपुर के बीच लोडिंग व अनलोडिंग स्टेशन भी नहीं है।
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शुक्रवार को खुर्जा से करीब सवा दो बजे कोयले से भरी 56 डिब्बों की इलेक्ट्रिक मालगाड़ी का ट्रायल शुरू हुआ। इसमें 2500 टन लोड था। बृहस्पतिवार को बरसात और मालगाड़ी मुहैया न होने के कारण ट्रायल टाल दिया गया था, जिसे शुक्रवार को पूरा किया गया। ट्रायल की निगरानी मुख्य महाप्रबंधक मेरठ अनिल कालरा ने की। इसके अलावा डिप्टी सीपीएम राकेश बब्बू, चीफ ट्रैक इंजीनियर एके वाजपेयी, चीफ सेफ्टी मैनेजर सचिन चौहान भी मौजूद रहे। खुर्जा से खतौली तक 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कोयले की मालगाड़ी दौड़ी। इससे पहले करीब 30 तरह से ट्रायल इस ट्रैक पर हो चुके थे। पहले लोको इलेक्ट्रिक इंजन और फिर मालगाड़ी के खाली डिब्बों को जोडक़र अलग अलग ट्रायल किए जा चुके हैं। खुर्जा से खतौली तक 134 किलोमीटर का सफर मालगाड़ी ने पार किया। हापुड़ तक 13 स्टेशन पार करके यह करीब 5.40 बजे पर गुजरी। इस दौरान कर्मचारी खासे उत्साहित दिखे।
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ट्रायल में नहीं मिली कोई खामी-
ट्रायल के दौरान किसी प्रकार की खामी प्रकाश में नहीं आयी है। देरी से शुरू होने के बावजूद इस दौरान सब कुछ ठीक रहा, जिससे टीम उत्साहित हैं।-गुरविंदर सिंह, प्रबंधक, एलएंडटी।