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Hapur News: छह माह पहले आई अल्ट्रासाउंड मशीन पेटी में बंद
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सिंभावली। क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सिखैड़ा खुद बीमारियों से जूझ रहा है। यहां स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और उदासीनता इस कदर हावी है कि अल्ट्रासाउंड मशीन आने के बावजूद आज तक चालू नहीं हो सकी।
नतीजा यह है कि गर्भवती महिलाओं, पेट दर्द, पथरी व अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को मजबूरन निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार अल्ट्रासाउंड मशीन करीब छह महीने पहले सीएचसी में स्थापित की गई थी, लेकिन न तो इसके संचालन के लिए तकनीशियन की तैनाती की गई और न ही इसे नियमित रूप से चालू कराने की कोई ठोस पहल हुई। हालात यह हैं कि जब से शासन स्तर से मशीन आई है, तभी से पेटी में बंद है।
ग्रामीण इलाकों के गरीब मरीजों की जेब पर यह अतिरिक्त बोझ है। सीएचसी सिखैड़ा में रोजाना 500 से अधिक मरीज ओपीडी में पंजीकरण कराते हैं। इसके बावजूद यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों का भारी अभाव बना हुआ है। वर्तमान में सीएचसी को एक सर्जन, एक महिला सर्जन, एक नेत्र रोग विशेषज्ञ और एक बाल रोग विशेषज्ञ की सख्त जरूरत है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार मरीजों को सीएचसी से निराश लौटना पड़ता है और मजबूरी में वह निजी अस्पतालों या अप्रशिक्षित चिकित्सकों से इलाज कराने को मजबूर हो जाते हैं।
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नतीजा यह है कि गर्भवती महिलाओं, पेट दर्द, पथरी व अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को मजबूरन निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार अल्ट्रासाउंड मशीन करीब छह महीने पहले सीएचसी में स्थापित की गई थी, लेकिन न तो इसके संचालन के लिए तकनीशियन की तैनाती की गई और न ही इसे नियमित रूप से चालू कराने की कोई ठोस पहल हुई। हालात यह हैं कि जब से शासन स्तर से मशीन आई है, तभी से पेटी में बंद है।
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ग्रामीण इलाकों के गरीब मरीजों की जेब पर यह अतिरिक्त बोझ है। सीएचसी सिखैड़ा में रोजाना 500 से अधिक मरीज ओपीडी में पंजीकरण कराते हैं। इसके बावजूद यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों का भारी अभाव बना हुआ है। वर्तमान में सीएचसी को एक सर्जन, एक महिला सर्जन, एक नेत्र रोग विशेषज्ञ और एक बाल रोग विशेषज्ञ की सख्त जरूरत है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार मरीजों को सीएचसी से निराश लौटना पड़ता है और मजबूरी में वह निजी अस्पतालों या अप्रशिक्षित चिकित्सकों से इलाज कराने को मजबूर हो जाते हैं।