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Hapur News: इलाज के लिए पिता नहीं जुटा सका 20 हजार, मासूम ने बाहों में तोड़ा दम

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 21 Jun 2025 09:54 PM IST
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The father could not raise 20 thousand for the treatment, the innocent child died in his arms
पिलखुवा। मेहनत मजदूरी करने वाले एक परिवार की आर्थिक तंगी और अस्पताल की संवेदनहीनता उसकी मासूम बच्ची की मौत का कारण बन गई। अस्पताल ने बच्ची के इलाज के लिए 20 हजार रुपये की मांग की। बेबस पिता रुपयों के इंतजाम करने की बात कहते हुए गिड़गिड़ता रहा, लेकिन अस्पताल वालों ने एक न सुनी। इसके कारण उसकी पांच वर्षीय बच्ची ने पिता की बाहों में ही दम तोड़ दिया। सुबह खबर फैली तो अस्पताल फजीहत से बचने के लिए बयान देने से भी बचता रहा।
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मामला पिलखुवा कोतवाली थाना क्षेत्र के हाईवे स्थित सरस्वती मेडिकल कालेज से जुड़ा है। मूलरूप से बिहार के जनपद फतेहपुर के जगतपुर कठियार निवासी अनवर पिछले सात माह से सरस्वती मेडिकल कॉलेज में ही राज मिस्त्री का कार्य करते हैं और उनकी पत्नी बेलदारी करती है। उनके तीन बच्चे भी उन्हीं के साथ रहते हैं। अनवर ने बताया कि शुक्रवार की रात उनकी पांच वर्षीय पुत्री अमरीन की अचानक तबीयत बिगड़ गई। लगातार उल्टी होने पर अनवर और उसकी पत्नी मौसमी बच्ची को लेकर सरस्वती मेडिकल कॉलेज के अस्पताल पहुंचे।
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पीड़ित ने बताया कि उन्होंने अस्पताल के स्टाफ से बच्ची का इलाज कराने की गुहार लगाई। लेकिन कर्मचारियाें ने इलाज के लिए 20 हजार रुपये जमा कराने की बात कही। मजदूर दंपती रुपये का इंतजाम नहीं कर पाए। जिसके बाद संवेदनहीन स्टाफ ने बच्ची को सरकारी अस्पताल में भेजने की नसीहत दे डाली।
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अनवर ने बताया कि वह लगातार हाथ जोड़ते हुए बेटी के इलाज की गुहार लगाता रहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इलाज के अभाव में बच्ची तड़पती रही और कुछ ही देर में दम तोड़ दिया। मासूम की मौत के बाद मजदूर परिवार बेसुध हो गया। सुबह जानकारी होने पर कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंची और पीड़ित से पूछताछ कर वापस लौट आई। उधर, अस्पताल प्रबंधन बयान देने से बचता रहा। अस्पताल प्रबंधन किसी जिम्मेदार अधिकारी न होने की बात कहते हुए मामले में सोमवार को लिखित स्पष्टीकरण देने की बात कह रहा है।

अनवर के पास नहीं था आयुष्मान कार्ड
बच्ची की मौत होने से व्यथित परिवार सुबह 10 बजे के आसपास शव को लेकर बिहार लौट गया। लोगों ने बताया कि अनवर के पास न तो रुपये थे और न ही उसके पास आयुष्मान कार्ड था। उसने आयुष्मान कार्ड बनाया होता तो शायद अस्पताल उसकी बेटी हो इलाज दे देता। बच्ची की हालत भी तेजी से बिगड़ी और वह निढाल होती चली गई। हालांकि अस्पताल की संवेदनहीनता से लोगों में रोष व्याप्त है।

अस्पताल के परिसर में कर रहा था मजदूरी, पर नहीं आया तरस
अस्पताल के परिसर में कई महीनों से निर्माण कार्य चल रहा है। अनवर भी एक ठेकेदार के माध्यम से यहां पहुंचा था और पत्नी के साथ मेहनत मजदूरी करने लगा। बड़ी बात है कि अपने ही परिसर में काम करने वाले मजदूर दंपती पर स्टाफ को तरस नहीं आया। जबकि बच्ची को इलाज देकर दंपती से बाद में भी रुपयों की वसूली की जा सकती थी।

सीएमओ डॉ. सुनील कुमार त्यागी ने बताया कि मामले की जानकारी हुई है, हालांकि उनके पास इस संबंध में किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। पीड़ित शिकायत करता है तो जांच कर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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