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तहसील बंदीगृह में बंद चार किसानों को ताला तोड़ भाकियू ने कराया मुक्त
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Thu, 25 May 2017 09:39 PM IST
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भाकियू
- फोटो : अमर उजाला
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तहसील परिसर स्थित राजस्व बंदीगृह में कैद चार किसानों को बृहस्पतिवार को भाकियू कार्यकर्ताओं ने ताला तोड़कर मुक्त करा दिया। इनमें से दो किसान लेदर सिटी परियोजना में अधिगृहित जमीन का मिला मुआवजा वापस न देने वाले थे,
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जबकि दो ने बैंक से लिया हुआ ऋण वापस नहीं किया था। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने तहसील परिसर में तालाबंदी करी दी और करीब चार घंटे तक जमकर हंगामा किया। तालाबंदी के कारण कोई कर्मचारी कार्य नहीं कर सका।
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इस बाबत पुलिस कर्मियों और कार्यकर्ताओं के बीच कड़ी झड़प हुई। एसडीएम के आश्वासन पर किसानों ने धरना स्थगित कर दिया। करीब 10 वर्ष पहले लेदर सिटी परियोजना के तहत रामपुर, सबली, शिवगढ़ी, इमटौरी, हापुड़ के किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी।
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इसका मुआवजा करीब 32 करोड़ रुपये किसानों को मिल गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा लेदर सिटी योजना को रद्द किए जाने के बाद से किसानों से मुआवजे का पैसा वापस मांगा जा रहा है। कुछ किसानों ने पैसा जमा भी कर दिया, क्योंकि उनकी जमीन मेरठ-बुलंदशहर मार्ग पर पड़ रही थी।
मुआवजे का पैसा वापस न देने पर बीते दिनों दो किसानों को तहसील परिसर स्थिति राजस्व बंदी गृह में बंद कर दिया गया था। दो अन्य किसानों को ऋण की रकम न लौटाने पर बंद किया गया था।
बृहस्पतिवार को भाकियू की मासिक पंचायत में इन किसानों के उत्पीड़न का मुद्दा उठा तो पदाधिकारियों ने किसानों को मुक्त कराने की योजना बना डाली। दोपहर करीब 12 बजे सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता तहसील पहुंचे और बंदीगृह पर हंगामा शुरू कर दिया।
देखते ही देखते कार्यकर्ताओं ने ईंट से बंदीगृह का ताला तोड़ दिया और बंदी किसानों को मुक्त करा लिया। प्रशासनिक अधिकारियों पर शोषण का आरोप लगाते हुए कार्यकर्ताओं ने तहसील को घेर लिया।
कार्यालयों में बैठे कर्मचारियों को भगाकर कार्यकर्ताओं ने तालाबंदी कर दी। कुछ ही देर में एसडीएम डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे, लेकिन किसानों ने उनकी एक न सुनी। उनके जाते ही कार्यकर्ताओं ने फिर हंगामा शुरू कर दिया।
हालात गंभीर होने पर कोतवाली निरीक्षक आरके सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और कार्यकर्ताओं को शांत करने का प्रयास किया। इस दौरान आक्रोशित कार्यकर्ताओं और पुलिस कर्मियों के बीच झड़प भी हुई। हंगामा बढ़ता देख पुलिस कर्मी भी बैक फुट पर आ गए।
फिर एसडीएम और सीओ शैलेंद्र सिंह राठौर कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचे। एसडीएम ने कार्यकर्ताओं की समस्याओं के जल्द निस्तारण का आश्वासन दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने धरने को स्थगित किया।
भाकियू के राष्ट्रीय सचिव सतवीर सिंह ने कहा कि यदि किसानों से मुआवजा का पैसा वापस मांगा जा रहा है तो किसानों की अधिग्रहित जमीन को किसानों के नाम किया जाए।
जिलाध्यक्ष धनवीर शास्त्री, जिला उपाध्यक्ष धनवीर शास्त्री, दिनेश खेड़ा, भवेंद्र सिसौदिया ने जल्द किसानों को राहत न मिलने पर फिर से तालाबंदी की चेतावनी दी है। प्रदर्शन के दौरान यशवीर सिंह, नितिन बाना, कुशलपाल आर्य,
रामपाल सिंह, कमल सिंह, टेनपाल, मुनेशपाल, जतिन चौधरी, रमेश पाल, सुरेंद्र सिंह, रोहताश कुमार आदि मौजूद रहे। तहसीलदार केके सिंह ने बताया कि छह नामजद व 25 अन्य के खिलाफ थाने में तहरीर दी जा चुकी है। बंदीगृह से बंदियों को मुक्त कराना दंडनीय अपराध है।
मेरी जमीन भी लेदर सिटी परियोजना के तहत अधिग्रहित की गई थी। मुझे 9.66 लाख रुपये मिला था, अब मुआवजे का पैसा वापस मांगा जा रहा है। जबकि जमीन अब तक मेरे नाम नहीं की गई है। - ओमवीर, बंदी किसान, शिवगढ़ी
मेरी जमीन को भी अधिग्रहित किया गया था। मुझे 11.30 लाख रुपये मिले थे। अब मुआवजे का पैसा वापस मांगा जा रहा है, जो खर्च हो चुका है। ऐसे में भला मैं अब इतना पैसा कहां से जमा कर सकता हूं। - महेश, बंदी किसान, रामपुर
फसल का उचित दाम न मिलने के कारण न तो घर खर्च चला पा रहा है और न ही फसल में पैसा लगा पा रहा है। बैंक से 1.30 लाख का लोन लिया था, जिसे समय पर नहीं चुका सका। इसलिए मुझे भी बंदीगृृह में बंद कर दिया गया था। - पवन कुमार, बंदी किसान, बड़ौदा हिंदवान, गांव
बैंक से 2.20 लाख रुपये लोन लिया था। फसल खराब होने के कारण पैसा नहीं चुका सका पाया। इसलिए बंदीगृह में बंद कर दिया गया था। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति और बिगड़ जाएगी। - शहजाद, बंदी किसान यादनगर