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Hapur News: मोनाड विवि में एसटीएफ का छापा, चेयरमैन समेत 12 लोग हिरासत में लिए
Sat, 17 May 2025 10:28 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Sat, 17 May 2025 10:28 PM IST
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हापुड़। क्षेत्र के मोनाड विवि में शनिवार शाम एसटीएफ लखनऊ और मेरठ की टीम ने भारी पुलिसबल के साथ छापा मारा। टीम ने किसी के भी अंदर प्रवेश करने और बाहर निकलने पर रोक लगा दी। बताया जा रहा है फर्जी अंकतालिका जारी करने के मामले में यह कार्रवाई की गई। देर शाम तक चली जांच के बाद टीम ने विश्वविद्यालय के चेयरमैन बिजेंद्र सिंह समेत 12 लोगों को हिरासत में ले लिया। टीम ने यहां से लैपटॉप, हार्डडिस्क, सर्वर सिस्टम आदि जब्त कर लिए। टीम सभी को लेकर पिलखुवा कोतवाली पहुंची जहां आगे की कार्रवाई जारी थी।
जानकारी के अनुसार एसटीएफ को मोनाड विवि में फर्जी मार्कशीट व डिग्री जारी होने की शिकायतें मिली थीं। इसी के आधार पर शनिवार शाम चार बजे एसटीएफ की कई गाड़ियां दोपहर करीब चार बजे यहां पहुंची। टीम ने सभी मौजूद लोगों के फोन भी कब्जे में ले लिए। छापे की खबर फैलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन में अफरातफरी मच गई। टीम ने कई अभिलेख खंगाले और अधिकारियों से पूछताछ की।
करीब पांच घंटे तक चली जांच के बाद टीम ने कंपनी के चेयरमैन बिजेंद्र सिंह समेत 12 कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया। टीम जब्त किए सामान के साथ सभी को पिलखुवा कोतवाली ले गई।
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उल्लेखनीय है कि मोनाड यूनिवर्सिटी पहले भी कई बार विवादों में रह चुकी है। कार्रवाई सीओ एसटीएफ संजीव कुमार के नेतृत्व में की गई। एसएसपी एसटीएफ धुले सुशील चंद्रभान के मुताबिक फर्जी मार्कशीट जारी होने की शिकायत पर छापा मारकर 12 लोगों से पूछताछ की जा रही है। उनकी संलिप्तता का पता लगाया जा रहा है, जिसके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
80 हजार फर्जी मार्कशीट मिलने के बाद हुई कार्रवाई
पुलिस सूत्रों की माने तो एसटीएफ ने हरियाणा के दो युवकों को करीब 80 हजार फर्जी मार्कशीट के साथ पकड़ा था। इन दो युवकों की निशानदेही पर ही एसटीएफ यहां पहुंची थी। आरोपी दोनों युवक भी कार में आसपास ही टीम के साथ मौजूद थे।
मार्कशीट को लेकर पहले भी लगते रहे हैं आरोप
छह सितंबर 2021 को अनवरपुर स्थित मोनाड विवि की फर्जी वेबसाइट बनाकर फर्जी अंक तालिका, प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में कार्रवाई की थी। पिलखुवा पुलिस और साइबर सेल ने दो शातिरों को गिरफ्तार किया था। जिनसे फर्जी मार्कशीट, मोबाइल और अन्य उपकरण बरामद हुए थे। पुलिस ने सीतापुर के थाना रामपुर मथुरा निवासी अमरेश और थाना कोतवाली के शास्त्री नगर निवासी शिवम पांडेय को गिरफ्तार किया था। आरोपियों से दो एलसीडी मॉनिटर, दो सीपीयू, दो की-बोर्ड, माउस, कलर प्रिंटर, तीन मोबाइल फोन, 5 मोनाड विवि की फर्जी मार्कशीट व डिप्लोमा बरामद हुए थे।
इसके अलावा आठ नवंबर 2024 को कोतवाली पुलिस ने तीन लोगों के बैग से मार्कशीट और अन्य शैक्षिक दस्तावेज बरामद किए थे। इन आरोपियों की पहचान फर्जी शैक्षिक दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड गिरीश शर्मा निवासी मोहल्ला राजेंद्रनगर सेक्टर-तीन साहिबाबाद, अमित व मनोज निवासी गांव बछलौता जिला हापुड़ के रूप में हुई थी। गिरीश शर्मा ने बताया था कि वह अमित व मनोज के साथ मिलकर रवि गुप्ता निवासी वैशाली गाजियाबाद जोकि एशियन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी इंफाल वेस्ट मणिपुर व नोएडा निवासी राकेश गोयल एडमिशन कंसलटेंट नार्थ इस्ट क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी दिमापुर नागालैंड के कहने पर फर्जी मार्कशीट तैयार करते थे। आरोपी रवि व राकेश के सहयोग से मार्कशीट व अन्य शैक्षिक दस्तावेज यूनिवर्सिटी से पास कराकर उन्हें देते थे। वहीं, आरोपियों के पास से 140 फर्जी दस्तावेज बरामद हुए थे, इसमें मोनाड विश्वविद्यालय हापुड़ की आठ मार्कशीट शामिल थीं।
छात्रवृत्ति घोटाले में भी सुर्खियों में रहा था विश्वविद्यालय--
मोनाड विवि के खिलाफ 27 सितंबर 2019 को दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी ने हल्द्वानी में एफआईआर दर्ज कराई थी। 28 छात्रों ने 20.63 लाख रुपये के घोटाले का आरोप लगाया था। इस मामले में भी तत्कालीन प्रबंधक समेत तीन कर्मचारियों को जेल भेजा गया था।
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जानकारी के अनुसार एसटीएफ को मोनाड विवि में फर्जी मार्कशीट व डिग्री जारी होने की शिकायतें मिली थीं। इसी के आधार पर शनिवार शाम चार बजे एसटीएफ की कई गाड़ियां दोपहर करीब चार बजे यहां पहुंची। टीम ने सभी मौजूद लोगों के फोन भी कब्जे में ले लिए। छापे की खबर फैलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन में अफरातफरी मच गई। टीम ने कई अभिलेख खंगाले और अधिकारियों से पूछताछ की।
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करीब पांच घंटे तक चली जांच के बाद टीम ने कंपनी के चेयरमैन बिजेंद्र सिंह समेत 12 कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया। टीम जब्त किए सामान के साथ सभी को पिलखुवा कोतवाली ले गई।
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उल्लेखनीय है कि मोनाड यूनिवर्सिटी पहले भी कई बार विवादों में रह चुकी है। कार्रवाई सीओ एसटीएफ संजीव कुमार के नेतृत्व में की गई। एसएसपी एसटीएफ धुले सुशील चंद्रभान के मुताबिक फर्जी मार्कशीट जारी होने की शिकायत पर छापा मारकर 12 लोगों से पूछताछ की जा रही है। उनकी संलिप्तता का पता लगाया जा रहा है, जिसके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
80 हजार फर्जी मार्कशीट मिलने के बाद हुई कार्रवाई
पुलिस सूत्रों की माने तो एसटीएफ ने हरियाणा के दो युवकों को करीब 80 हजार फर्जी मार्कशीट के साथ पकड़ा था। इन दो युवकों की निशानदेही पर ही एसटीएफ यहां पहुंची थी। आरोपी दोनों युवक भी कार में आसपास ही टीम के साथ मौजूद थे।
मार्कशीट को लेकर पहले भी लगते रहे हैं आरोप
छह सितंबर 2021 को अनवरपुर स्थित मोनाड विवि की फर्जी वेबसाइट बनाकर फर्जी अंक तालिका, प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में कार्रवाई की थी। पिलखुवा पुलिस और साइबर सेल ने दो शातिरों को गिरफ्तार किया था। जिनसे फर्जी मार्कशीट, मोबाइल और अन्य उपकरण बरामद हुए थे। पुलिस ने सीतापुर के थाना रामपुर मथुरा निवासी अमरेश और थाना कोतवाली के शास्त्री नगर निवासी शिवम पांडेय को गिरफ्तार किया था। आरोपियों से दो एलसीडी मॉनिटर, दो सीपीयू, दो की-बोर्ड, माउस, कलर प्रिंटर, तीन मोबाइल फोन, 5 मोनाड विवि की फर्जी मार्कशीट व डिप्लोमा बरामद हुए थे।
इसके अलावा आठ नवंबर 2024 को कोतवाली पुलिस ने तीन लोगों के बैग से मार्कशीट और अन्य शैक्षिक दस्तावेज बरामद किए थे। इन आरोपियों की पहचान फर्जी शैक्षिक दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड गिरीश शर्मा निवासी मोहल्ला राजेंद्रनगर सेक्टर-तीन साहिबाबाद, अमित व मनोज निवासी गांव बछलौता जिला हापुड़ के रूप में हुई थी। गिरीश शर्मा ने बताया था कि वह अमित व मनोज के साथ मिलकर रवि गुप्ता निवासी वैशाली गाजियाबाद जोकि एशियन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी इंफाल वेस्ट मणिपुर व नोएडा निवासी राकेश गोयल एडमिशन कंसलटेंट नार्थ इस्ट क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी दिमापुर नागालैंड के कहने पर फर्जी मार्कशीट तैयार करते थे। आरोपी रवि व राकेश के सहयोग से मार्कशीट व अन्य शैक्षिक दस्तावेज यूनिवर्सिटी से पास कराकर उन्हें देते थे। वहीं, आरोपियों के पास से 140 फर्जी दस्तावेज बरामद हुए थे, इसमें मोनाड विश्वविद्यालय हापुड़ की आठ मार्कशीट शामिल थीं।
छात्रवृत्ति घोटाले में भी सुर्खियों में रहा था विश्वविद्यालय
मोनाड विवि के खिलाफ 27 सितंबर 2019 को दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी ने हल्द्वानी में एफआईआर दर्ज कराई थी। 28 छात्रों ने 20.63 लाख रुपये के घोटाले का आरोप लगाया था। इस मामले में भी तत्कालीन प्रबंधक समेत तीन कर्मचारियों को जेल भेजा गया था।