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Hapur News: लेखपाल की मौत पर आक्रोशित साथियों ने कलक्ट्रेट पर किया हंगामा
Thu, 10 Jul 2025 10:43 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Thu, 10 Jul 2025 10:43 PM IST
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हापुड़। धौलाना तहसील में तैनात लेखपाल सुभाष मीणा की बुधवार की देर रात गाजियाबाद के अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। बुधवार को उन्होंने तहसील परिसर में जहरीला पदार्थ खा लिया था। इससे नाराज जिले के लेखपालों, अमीनों, तहसील व कलक्ट्रेट के कर्मचारियों, चकबंदी व पंचायत सचिवों ने बृहस्पतिवार को जिला मुख्यालय पर धरना देकर नारेबाजी की। सभी ने डीएम व एसडीएम धौलाना के विरुद्ध कार्रवाई और स्थानांतरण की मांग की। यहां तक कि डीएम से मिलवाने के लिए आए एडीएम संदीप कुमार से भी मना कर दिया। दोपहर को परिजनों ने मेरठ के सरधना तहसील स्थित गांव में अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं, मुख्यमंत्री के निर्देश पर मंडलायुक्त और डीआईजी मेरठ को जांच सौंपी गई है।
मृतक सुभाष मीणा मेरठ जिले के सरधना थाना स्थित जाफरनगर बेगमाबाद के निवासी थे। वह वर्ष 2018 से जिले में तैनात थे। तीन जून को गांव डहाना में जनचौपाल के दौरान हुई शिकायत के बाद डीएम अभिषेक पांडेय ने उनके निलंबन के आदेश दिए थे। इस मामले में जांच अभी चल रही है। तब से ही लेखपाल मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। बुधवार दोपहर को तहसील परिसर में लेखपाल ने कोई जहरीला पदार्थ खा लिया था। इसके बाद उन्हें पहले रामा अस्पताल और फिर गाजियाबाद के अस्पताल में भर्ती किया गया। रात करीब 11 बजे डीएम अभिषेक पांडेय अस्पताल पहुंचे और लेखपाल के परिजनों से वार्ता की।
देर रात ही सूचना दी गई कि लेखपाल की मौत हो गई है। बृहस्पतिवार सुबह लेखपाल, अमीन, चकबंदी, तहसील व कलक्ट्रेट के कर्मचारियों ने जिला मुख्यालय पर धरना शुरू कर दिया। डीएम व एसडीएम धौलाना के खिलाफ नारेबाजी कर उनके स्थानांतरण की मांग की। इसके साथ मृतक के परिवार को मुआवजा दिलाने तथा सरकारी नौकरी दिलाने की भी मांग की गई। इस दौरान उन्होंने डीएम से भी मिलने से इन्कार कर दिया। हालांकि, शाम को सभी ने धरना समाप्त कर दिया।
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पूरी घटना के दौरान कोई बड़ा बवाल न हो, इसके लिए डिप्टी कलक्टर मनोज कुमार, नायब तहसीलदार दिव्यांशी सिंह और दो थानों के थानाध्यक्ष पीड़ित परिवार के साथ रहे। गाजियाबाद से मेरठ तक सभी साथ गए और अंतिम संस्कार भी कराया। वहीं, मुख्यमंत्री के आदेश पर मंडल आयुक्त मेरठ और डीआईजी को जांच सौंपी गई है। दोनों बृहस्पतिवार को जांच के लिए जिले में नहीं आए। हालांकि, जिले के अधिकारियों ने देर रात तक पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी है।
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तीन जून को हुई थी शिकायत--
गांव डहाना में तीन जून को डीएम अभिषेक पांडेय की जनचौपाल के दौरान किसान ने लेखपाल के खिलाफ खसरा-खतौनी की नकल देने के बदले अतिरिक्त रुपये वसूलने की शिकायत की। जिलाधिकारी ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मौके पर ही पीड़ितों के बयान दर्ज कराए और लेखपाल को निलंबित करने के आदेश दिए। लेखपालों के अनुसार निलंबन के बाद से ही वह अवसाद में थे। आरोप है कि शिकायतकर्ता मामले को निपटाने के लिए पांच लाख रुपये की मांग कर रहा था। विभागीय स्तर से भी लेखपाल को कोई मदद तक नहीं मिल रही थी। यहां तक कि लेखपाल के निजी सहायक मिंटू के विरुद्ध धौलाना थाने में मुकदमा भी दर्ज हुआ था।
धरने के कारण कई विभागों में नहीं हुआ काम--
लेखपाल, अमीन, तीनों तहसील के लिपिक सहित अन्य कर्मचारी, चकबंदी के लेखपाल व कर्मचारी, जिला मुख्यालय के बाबू, पंचायत सचिवों सहित कई विभागों के कर्मचारियों ने धरने का समर्थन किया। इस कारण विभागों में काम नहीं हो सका। पूरे दिन लोग कार्यों के लिए तहसीलों में भटकते रहे, लेकिन कार्यालय खाली रहे।
प्रदेश व्यापी धरने पर जोर
बृहस्पतिवार को बुलंदशहर, मेरठ, बागपत, बिजनौर सहित आसपास के कई जिलों से लेखपाल सहित अन्य जिला मुख्यालय पर चल रहे धरना स्थल पर पहुंचे और समर्थन किया। इस दौरान जिले के लेखपाल प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों से संपर्क में रहे। यह धरना प्रदेश व्यापी भी हो सकता है। इसके लिए रणनीति बनाई जा रही है। वहीं, पूरे प्रकरण में एक पत्र मुख्यमंत्री को भी लेखपाल संघ की ओर से भेजा गया है।
शिकायतकर्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी
गांव डहाना में तीन जून को शिकायतकर्ता भूपेंद्र सिंह सहित करीब 20 किसानों ने जनचौपाल के दौरान मृतक लेखपाल पर निजी सहयोगी के जरिए रिश्वत मांगने के आरोप लगाए थे। लेखपालों का आरोप है कि निलंबन के बाद शिकायत वापस लेने के लिए भूपेंद्र पांच लाख रुपये की मांग कर रहा था। इस मामले में अब प्रशासन के अधिकारी मृतक के परिजनों से शिकायतकर्ता के खिलाफ तहरीर लेकर मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी में है। लेखपालों ने बताया कि गांव में आपसी रंजिश का शिकार लेखपाल हो गए। उन्होंने ग्राम प्रधान पर भी कई गंभीर आरोप धरना स्थल पर लगाए।
शिकायत के नाम पर नहीं होगी अवैध वसूली
यह व्यक्तिगत तौर पर मेरे और सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए एक दुखद खबर है। जांच चल रही थी और लेखपाल के विरुद्ध कोई रिपोर्ट भी दर्ज नहीं हुई थी। मृतक लेखपाल के पास अपना पक्ष रखने के लिए समय था। शिकायतकर्ता भूपेंद्र सिंह के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने मृतक से शिकायत समाप्त कराने के लिए रुपयों की मांग की थी। में स्वयं पीड़ित परिवार के संपर्क में हूं। परिजनों ने शिकायतकर्ता के विरुद्ध तहरीर देने की बात कही है। - अभिषेक पांडेय, जिलाधिकारी
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मृतक सुभाष मीणा मेरठ जिले के सरधना थाना स्थित जाफरनगर बेगमाबाद के निवासी थे। वह वर्ष 2018 से जिले में तैनात थे। तीन जून को गांव डहाना में जनचौपाल के दौरान हुई शिकायत के बाद डीएम अभिषेक पांडेय ने उनके निलंबन के आदेश दिए थे। इस मामले में जांच अभी चल रही है। तब से ही लेखपाल मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। बुधवार दोपहर को तहसील परिसर में लेखपाल ने कोई जहरीला पदार्थ खा लिया था। इसके बाद उन्हें पहले रामा अस्पताल और फिर गाजियाबाद के अस्पताल में भर्ती किया गया। रात करीब 11 बजे डीएम अभिषेक पांडेय अस्पताल पहुंचे और लेखपाल के परिजनों से वार्ता की।
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देर रात ही सूचना दी गई कि लेखपाल की मौत हो गई है। बृहस्पतिवार सुबह लेखपाल, अमीन, चकबंदी, तहसील व कलक्ट्रेट के कर्मचारियों ने जिला मुख्यालय पर धरना शुरू कर दिया। डीएम व एसडीएम धौलाना के खिलाफ नारेबाजी कर उनके स्थानांतरण की मांग की। इसके साथ मृतक के परिवार को मुआवजा दिलाने तथा सरकारी नौकरी दिलाने की भी मांग की गई। इस दौरान उन्होंने डीएम से भी मिलने से इन्कार कर दिया। हालांकि, शाम को सभी ने धरना समाप्त कर दिया।
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पूरी घटना के दौरान कोई बड़ा बवाल न हो, इसके लिए डिप्टी कलक्टर मनोज कुमार, नायब तहसीलदार दिव्यांशी सिंह और दो थानों के थानाध्यक्ष पीड़ित परिवार के साथ रहे। गाजियाबाद से मेरठ तक सभी साथ गए और अंतिम संस्कार भी कराया। वहीं, मुख्यमंत्री के आदेश पर मंडल आयुक्त मेरठ और डीआईजी को जांच सौंपी गई है। दोनों बृहस्पतिवार को जांच के लिए जिले में नहीं आए। हालांकि, जिले के अधिकारियों ने देर रात तक पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी है।
तीन जून को हुई थी शिकायत
गांव डहाना में तीन जून को डीएम अभिषेक पांडेय की जनचौपाल के दौरान किसान ने लेखपाल के खिलाफ खसरा-खतौनी की नकल देने के बदले अतिरिक्त रुपये वसूलने की शिकायत की। जिलाधिकारी ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मौके पर ही पीड़ितों के बयान दर्ज कराए और लेखपाल को निलंबित करने के आदेश दिए। लेखपालों के अनुसार निलंबन के बाद से ही वह अवसाद में थे। आरोप है कि शिकायतकर्ता मामले को निपटाने के लिए पांच लाख रुपये की मांग कर रहा था। विभागीय स्तर से भी लेखपाल को कोई मदद तक नहीं मिल रही थी। यहां तक कि लेखपाल के निजी सहायक मिंटू के विरुद्ध धौलाना थाने में मुकदमा भी दर्ज हुआ था।
धरने के कारण कई विभागों में नहीं हुआ काम
लेखपाल, अमीन, तीनों तहसील के लिपिक सहित अन्य कर्मचारी, चकबंदी के लेखपाल व कर्मचारी, जिला मुख्यालय के बाबू, पंचायत सचिवों सहित कई विभागों के कर्मचारियों ने धरने का समर्थन किया। इस कारण विभागों में काम नहीं हो सका। पूरे दिन लोग कार्यों के लिए तहसीलों में भटकते रहे, लेकिन कार्यालय खाली रहे।
प्रदेश व्यापी धरने पर जोर
बृहस्पतिवार को बुलंदशहर, मेरठ, बागपत, बिजनौर सहित आसपास के कई जिलों से लेखपाल सहित अन्य जिला मुख्यालय पर चल रहे धरना स्थल पर पहुंचे और समर्थन किया। इस दौरान जिले के लेखपाल प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों से संपर्क में रहे। यह धरना प्रदेश व्यापी भी हो सकता है। इसके लिए रणनीति बनाई जा रही है। वहीं, पूरे प्रकरण में एक पत्र मुख्यमंत्री को भी लेखपाल संघ की ओर से भेजा गया है।
शिकायतकर्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी
गांव डहाना में तीन जून को शिकायतकर्ता भूपेंद्र सिंह सहित करीब 20 किसानों ने जनचौपाल के दौरान मृतक लेखपाल पर निजी सहयोगी के जरिए रिश्वत मांगने के आरोप लगाए थे। लेखपालों का आरोप है कि निलंबन के बाद शिकायत वापस लेने के लिए भूपेंद्र पांच लाख रुपये की मांग कर रहा था। इस मामले में अब प्रशासन के अधिकारी मृतक के परिजनों से शिकायतकर्ता के खिलाफ तहरीर लेकर मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी में है। लेखपालों ने बताया कि गांव में आपसी रंजिश का शिकार लेखपाल हो गए। उन्होंने ग्राम प्रधान पर भी कई गंभीर आरोप धरना स्थल पर लगाए।
शिकायत के नाम पर नहीं होगी अवैध वसूली
यह व्यक्तिगत तौर पर मेरे और सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए एक दुखद खबर है। जांच चल रही थी और लेखपाल के विरुद्ध कोई रिपोर्ट भी दर्ज नहीं हुई थी। मृतक लेखपाल के पास अपना पक्ष रखने के लिए समय था। शिकायतकर्ता भूपेंद्र सिंह के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने मृतक से शिकायत समाप्त कराने के लिए रुपयों की मांग की थी। में स्वयं पीड़ित परिवार के संपर्क में हूं। परिजनों ने शिकायतकर्ता के विरुद्ध तहरीर देने की बात कही है। - अभिषेक पांडेय, जिलाधिकारी