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ऑपरेशन के लिए बुजुर्ग को 18 घंटे तक रखा भूखा, फिर 24 घंटे का दिया समय
सार
जिन्हें लेकर जब अस्पताल पहुंचा तो चिकित्सकों ने इन दवाओं को लेने से ही इंकार कर दिया। लेकिन मेडिकल प्रबंधन ने उसकी एक न सुनी और 24 घंटे बाद ऑपरेशन करने की बात कह, पल्ला झाड़ लिया।मुख्य बात यह है कि मरीज से जुड़ा पूरा मामला डीएम कार्यालय और सीएमओ कार्यालय में गूंजता रहा। मरीजों को इस तरह परेशान नहीं होने दिया जाएगा।--डॉ.सुनील कुमार, सीएमओ।
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विस्तार
ऑपरेशन के लिए बुजुर्ग को 18 घंटे तक रखा भूखा, फिर 24 घंटे का दिया समय
हापुड़। पिलखुवा के सरस्वती मेडिकल में 73 साल के बुजुर्ग को जांघ की टूटी हड्डी के ऑपरेशन के लिए 18 घंटे तक भूखा रख, मिनी ओटी में भर्ती रखा। मरीज के तीमारदार द्वारा अस्पताल से दवा नहीं खरीदने से तिलमिलाए प्रबंधन ने पहले दवा यहीं से खरीदने का दबाव बनाया, बाद में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का हस्ताक्षेप हुआ तो इंप्लांट (ऑपरेशन प्लेट) नहीं होने की बात कह, सर्जरी से ही इंकार कर दिया। 24 घंटे बाद का समय देकर पल्ला झाड़ लिया।
न्यू शिवपुरी निवासी ओमप्रकाश टंडन (73 वर्ष) के जांघ की हड्डी में फ्रेक्चर हो गया था। जिन्हें उनके चचेरे भाई विवेक बहल ने पिलखुवा के सरस्वती मेडिकल में भर्ती कराया था। चिकित्सकों ने जांच के बाद मरीज के ऑपरेशन की सलाह दी। सहमति पर ऑपरेशन सोमवार को करने की बात कही गई।
इससे पहले रविवार रात 11 बजे से उनका खाना बंद करा दिया गया। चिकित्सकों ने ऑपरेशन के लिए आवश्यक दवाओं की लिस्ट तीमारदार को थमा दी। तीमारदार विवेक बहल ने बताया कि अस्पताल के अंदर दवाएं महंगी मिल रहीं थी, इसलिए अपने किसी परिचित के यहां से दवाएं खरीद लीं। जिन्हें लेकर जब अस्पताल पहुंचा तो चिकित्सकों ने इन दवाओं को लेने से ही इंकार कर दिया। दवा न लेने का कारण पूछा तो बताया कि मेडिकल प्रबंधन द्वारा बाहर की दवाओं को अस्पताल के अंदर लेने से मना करा हुआ है।
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इसकी शिकायत पीड़ित ने डीएम और सीएमओ कार्यालय में की। काफी मन्नतों के बाद दवाओं का मुद्दा छोड़ दिया गया, लेकिन फिर इंप्लांट न मिलने की बात कह ऑपरेशन से ही इंकार कर दिया। 18 घंटे तक भूखा प्यास मरीज मिनी ओटी में दर्द से करहाता रहा। लेकिन मेडिकल प्रबंधन ने उसकी एक न सुनी और 24 घंटे बाद ऑपरेशन करने की बात कह, पल्ला झाड़ लिया।
मुख्य बात यह है कि मरीज से जुड़ा पूरा मामला डीएम कार्यालय और सीएमओ कार्यालय में गूंजता रहा। लेकिन कोई अधिकारी मेडिकल प्रबंधन से इस पर सवाल जवाब करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। कई अधिकारी तो यह तक कहते रहे कि हमें कार्रवाई करने में सक्षम ही नहीं हैं। रोजाना मरीजों को अस्पतालों के इस रवैया का सामना करना पड़ रहा है। तीमारदार विवेक बहल ने थक हारकर मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव को ट्वीट किया है। वहीं, इस मामले में सरस्वती मेडिकल प्रबंधन से वार्ता का प्रयास किया गया, लेकिन फोन नहीं उठाया जा सका।
मामले की कराएंगे जांच
मामला संज्ञान में आया है, इस प्रकरण की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मरीजों को इस तरह परेशान नहीं होने दिया जाएगा।--डॉ.सुनील कुमार, सीएमओ।
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हापुड़। पिलखुवा के सरस्वती मेडिकल में 73 साल के बुजुर्ग को जांघ की टूटी हड्डी के ऑपरेशन के लिए 18 घंटे तक भूखा रख, मिनी ओटी में भर्ती रखा। मरीज के तीमारदार द्वारा अस्पताल से दवा नहीं खरीदने से तिलमिलाए प्रबंधन ने पहले दवा यहीं से खरीदने का दबाव बनाया, बाद में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का हस्ताक्षेप हुआ तो इंप्लांट (ऑपरेशन प्लेट) नहीं होने की बात कह, सर्जरी से ही इंकार कर दिया। 24 घंटे बाद का समय देकर पल्ला झाड़ लिया।
न्यू शिवपुरी निवासी ओमप्रकाश टंडन (73 वर्ष) के जांघ की हड्डी में फ्रेक्चर हो गया था। जिन्हें उनके चचेरे भाई विवेक बहल ने पिलखुवा के सरस्वती मेडिकल में भर्ती कराया था। चिकित्सकों ने जांच के बाद मरीज के ऑपरेशन की सलाह दी। सहमति पर ऑपरेशन सोमवार को करने की बात कही गई।
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इससे पहले रविवार रात 11 बजे से उनका खाना बंद करा दिया गया। चिकित्सकों ने ऑपरेशन के लिए आवश्यक दवाओं की लिस्ट तीमारदार को थमा दी। तीमारदार विवेक बहल ने बताया कि अस्पताल के अंदर दवाएं महंगी मिल रहीं थी, इसलिए अपने किसी परिचित के यहां से दवाएं खरीद लीं। जिन्हें लेकर जब अस्पताल पहुंचा तो चिकित्सकों ने इन दवाओं को लेने से ही इंकार कर दिया। दवा न लेने का कारण पूछा तो बताया कि मेडिकल प्रबंधन द्वारा बाहर की दवाओं को अस्पताल के अंदर लेने से मना करा हुआ है।
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इसकी शिकायत पीड़ित ने डीएम और सीएमओ कार्यालय में की। काफी मन्नतों के बाद दवाओं का मुद्दा छोड़ दिया गया, लेकिन फिर इंप्लांट न मिलने की बात कह ऑपरेशन से ही इंकार कर दिया। 18 घंटे तक भूखा प्यास मरीज मिनी ओटी में दर्द से करहाता रहा। लेकिन मेडिकल प्रबंधन ने उसकी एक न सुनी और 24 घंटे बाद ऑपरेशन करने की बात कह, पल्ला झाड़ लिया।
मुख्य बात यह है कि मरीज से जुड़ा पूरा मामला डीएम कार्यालय और सीएमओ कार्यालय में गूंजता रहा। लेकिन कोई अधिकारी मेडिकल प्रबंधन से इस पर सवाल जवाब करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। कई अधिकारी तो यह तक कहते रहे कि हमें कार्रवाई करने में सक्षम ही नहीं हैं। रोजाना मरीजों को अस्पतालों के इस रवैया का सामना करना पड़ रहा है। तीमारदार विवेक बहल ने थक हारकर मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव को ट्वीट किया है। वहीं, इस मामले में सरस्वती मेडिकल प्रबंधन से वार्ता का प्रयास किया गया, लेकिन फोन नहीं उठाया जा सका।
मामले की कराएंगे जांच
मामला संज्ञान में आया है, इस प्रकरण की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मरीजों को इस तरह परेशान नहीं होने दिया जाएगा।--डॉ.सुनील कुमार, सीएमओ।