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Hapur News: 750 रुपये में पकड़ा जाएगा बंदर, 1200 में कुत्ते की होगी नसबंदी

Mon, 18 Nov 2024 09:48 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़ Updated Mon, 18 Nov 2024 09:48 PM IST
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monkey caught with 750
हापुड़। शहर में बंदरों को पकड़वाने और कुत्तों की नसबंदी कराने के लिए नगर पालिका में अभियान शुरू होने जा रहा है। नगर पालिका ने एक हजार बंदरों को पकड़कर दूसरे स्थान पर छोड़ने और 800 कुत्तों की नसबंदी के टेंडर की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। एक बंदरों को पकड़ने पर 750 और एक कुत्ते की नसबंदी पर करीब 1200 रुपये खर्च होंगे।
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आवारा कुत्ते और बंदर शहर में आए दिन लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इससे लोगों को आर्थिक, मानसिक और शारीरिक नुकसान पहुंच रहा है। लगभग तीन साल से बंदरों और कुत्तों पर लगाम लगाने के लिए नगर पालिका ने कोई कदम भी नहीं उठाया है। इस कारण इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्र से आकर लाेग नगर के आसपास बंदरों को छोड़कर चले जाते हैं। इसके कारण बंदरों की संख्या कई गुना बढ़ गई है। बंदरों और कुत्तों की बढ़ी संख्या का असर मोहल्लों की सड़कों पर भी नजर आता है। कई मोहल्लों में तो बच्चे और बुजुर्ग अकेले घरों तक से नहीं निकल पाते हैं। अकेले में देखते ही बंदर और कुत्ते लोगों को अपना शिकार बना लेते हैं। इसे लेकर लोग आए दिन शिकायत कर रहे थे। करीब आठ बार टेंडर निकालने के बाद अब यह प्रक्रिया पूरी हुई है। करीब दो माह तक शहर में यह अभियान चलाया जाएगा। प्रत्येक वार्ड में यह अभियान चलेगा।
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भूख हड़ताल पर बैठने पहुंचे सभासद

नगर पालिका के अधिकारियों से लंबे समय से सभासद बंदरों और कुत्तों को पकड़ने की मांग कर रहे थे। इसको लेकर सोमवार को सभासद विकास दयाल व अन्य सभासद भूख हड़ताल के लिए नगर पालिका पहुंच गए, लेकिन अधिशासी अधिकारी ने बताया कि दो से तीन दिन में बंदर पकड़ने की प्रिक्रिया शुरू हो जाएगी। साथ ही कुत्तों की नसबंदी भी कराई जाएगी। इसलिए सभासदों को भूख हड़ताल की आवश्यकता नहीं है। जिसके बाद भूख हड़ताल को स्थगित कर दिया गया। इस दौरान सभासद मुकेश कोरी, नरेंद्र भारती, पवन भास्कर, मुशीर अहमद, डॉ. अजय कस्तूरी, अफरोज अख्तर, संजय कुमार, रिजवान अहमद, संजीव कुमार, नितिन पाराशर आदि मौजूद रहे।
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कोट -

750 रुपये में एक बंदर को पकड़ने, खाना खिलाने और छोड़ने का कार्य होगा। जबकि, 1200 रुपये में एक कुत्ते को पकड़ने, खाना खिलाने, नसबंदी और इसके बाद छोड़ने पर खर्च किए जाएंगे।

- मनोज कुमार, ईओ
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