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Hapur News: बच्ची से अश्लील हरकत करने के दोषी को सात वर्ष के कारावास की सजा
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हापुड़। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने तीन वर्षीय बच्ची से अश्लील हरकत करने करने के एक मामले में बुधवार को निर्णय सुनाया। जिसमें न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर छह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो हरेंद्र त्यागी ने बताया कि पिलखुवा क्षेत्र के एक गांव निवासी एक व्यक्ति ने पिलखुवा कोतवाली में तहरीर दी। जिसमें उसने कहा कि उसकी तीन वर्षीय पुत्री दो दिंसबर 2020 को घर के बाहर खेल रही थी। तभी पड़ोसी मोहित उर्फ टिलवा पुत्र गंगाशरण उसकी पुत्री को बहला फुसलाकर टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ एक भूस से भरे कमरे में ले गया। जहां पर उसने उसकी पुत्री के साथ अश्लील हरकत की। तभी भूस लेने के लिए एक महिला उक्त कमरे में पहुंची और उनकी पुत्री को बचाया। जिसके बाद कुछ ग्रामीणों ने आरोपी मोहित को पकड़ लिया।
पुलिस ने मामले की पॉक्सो, अश्लील हरकत सहित विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की और उसके आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश श्वेता दीक्षित ने मामले में निर्णय सुनाया। जिसमें न्यायाधीश श्वेता दीक्षित ने कहा कि प्रस्तुत प्रकरण में पीड़िता की आयु घटना के समय मात्र तीन वर्ष थी। इसलिए पीड़िता की आयु एवं घटना की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्त मोहित को उचित दंड से दंडित किया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। ऐसी स्थिति में अभियुक्त माहित को भारतीय दंड संहिता की धारा 354 व लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षा अधिनियम की धारा 10 में दंडित किए जाने योग्य है। इसलिए दोषसिद्ध अभियुक्त मोहित को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 10 के अन्तर्गत सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई जाती है। साथ ही अभियुक्त पर चार हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया जाता है। जिसको जमा न करने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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साथ ही धारा 354 के अन्तर्गत पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई जाती है। साथ ही अभियुक्त पर दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया जाता है। जिसको अदा न करने की स्थिति में अभियुक्त को एक माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अर्थदंड की अस्सी प्रतिशत धनराशि पीड़िता को देने के भी आदेश किए।
साथ ही न्यायाधीश ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता के पिता को पचास हजार रुपये की प्रतिकार धनराशि देने के भी आदेश किए है। साथ ही आदेश में यह भी कहा है कि प्राधिकरण के पास प्रतिकार की धनराशि देने के लिए फंड न होने पर जिलाधिकारी राज्य सरकार से उक्त धनराशि प्राप्त कर एक माह के अंदर पीड़िता को दे।
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विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो हरेंद्र त्यागी ने बताया कि पिलखुवा क्षेत्र के एक गांव निवासी एक व्यक्ति ने पिलखुवा कोतवाली में तहरीर दी। जिसमें उसने कहा कि उसकी तीन वर्षीय पुत्री दो दिंसबर 2020 को घर के बाहर खेल रही थी। तभी पड़ोसी मोहित उर्फ टिलवा पुत्र गंगाशरण उसकी पुत्री को बहला फुसलाकर टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ एक भूस से भरे कमरे में ले गया। जहां पर उसने उसकी पुत्री के साथ अश्लील हरकत की। तभी भूस लेने के लिए एक महिला उक्त कमरे में पहुंची और उनकी पुत्री को बचाया। जिसके बाद कुछ ग्रामीणों ने आरोपी मोहित को पकड़ लिया।
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पुलिस ने मामले की पॉक्सो, अश्लील हरकत सहित विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की और उसके आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश श्वेता दीक्षित ने मामले में निर्णय सुनाया। जिसमें न्यायाधीश श्वेता दीक्षित ने कहा कि प्रस्तुत प्रकरण में पीड़िता की आयु घटना के समय मात्र तीन वर्ष थी। इसलिए पीड़िता की आयु एवं घटना की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्त मोहित को उचित दंड से दंडित किया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। ऐसी स्थिति में अभियुक्त माहित को भारतीय दंड संहिता की धारा 354 व लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षा अधिनियम की धारा 10 में दंडित किए जाने योग्य है। इसलिए दोषसिद्ध अभियुक्त मोहित को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 10 के अन्तर्गत सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई जाती है। साथ ही अभियुक्त पर चार हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया जाता है। जिसको जमा न करने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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साथ ही धारा 354 के अन्तर्गत पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई जाती है। साथ ही अभियुक्त पर दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया जाता है। जिसको अदा न करने की स्थिति में अभियुक्त को एक माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अर्थदंड की अस्सी प्रतिशत धनराशि पीड़िता को देने के भी आदेश किए।
साथ ही न्यायाधीश ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता के पिता को पचास हजार रुपये की प्रतिकार धनराशि देने के भी आदेश किए है। साथ ही आदेश में यह भी कहा है कि प्राधिकरण के पास प्रतिकार की धनराशि देने के लिए फंड न होने पर जिलाधिकारी राज्य सरकार से उक्त धनराशि प्राप्त कर एक माह के अंदर पीड़िता को दे।