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प्रदूषण से बिगड़ रही सेहत, फेफड़ों को हो रहा नुकसान
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प्रदूषण से बिगड़ रही सेहत, फेफड़ों को हो रहा नुकसान
हापुड़। जिले में बढ़ता प्रदूषण सांस रोगियों के अलावा बच्चों पर भारी पड़ने लगा है। पिछले 24 घंटों के अंदर 181 से बढ़कर एक्यूआई 240 तक पहुंच गया है। मानों फेफड़ों में पांच सिगरेट जितना धुआं चला गया हो। ओपीडी में मरीजों की संख्या दस प्रतिशत बढ़ गई है। चिकित्सक मास्क लगाकर घर से निकलने की सलाह दे रहे हैं।
दिवाली के बाद से जिले में वायु प्रदूषण ने लोगों को परेशान किया हुआ है। हालांकि, पिछले तीन दिनों में तेज हवाएं चलने से प्रदूषण कुछ कम हुआ था लेकिन, स्मॉग की चादर छाए रहने से लोगों को फिर भी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। अब वायु प्रदूषण फिर से तेजी से बढ़ने लगा है। चिकित्सकों की मानें तो जहरीली हवा फेफड़ों पर असर डालती है। इससे टीबी जैसी बीमारी होने का खतरा अधिक रहता है।
एक्यूआई का सूचकांक मंगलवार को 181 दर्ज किया गया था, लेकिन, 24 घंटे के अंदर यह बढ़कर बुधवार को 240 पर पहुंच गया। इसी प्रकार वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता गया तो आने वाले दिनों में जिला गैस चेंबर बन सकता है। जिसके बाद सांस के मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
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सांस के मरीजों की बढ़ रही संख्या
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक व फिजीशियन डॉ. प्रदीप मित्तल ने बताया कि वायु प्रदूषण के कारण सांस संबंधित समस्या बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों में बढ़ रही है। मरीजों को दवा देकर घर भेजा जा रहा है। कुछ बुजुर्ग गंभीर बीमार होते हैं तो उन्हें भर्ती किया जा रहा है। प्रतिदिन 20 से 25 मरीजों की संख्या ओपीडी में बढ़ रही है। मधुमेह व हाइपरटेंशन के मरीजों को अपनी दवाएं नियमित रूप से लेनी चाहिए। परेशानी होने पर चिकित्सक से तत्काल संपर्क करना चाहिए।
नवजात शिशुओं को सबसे अधिक खतरा
शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पालकी नारंग का कहना है कि प्रतिदिन ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है जिन्हें वायु प्रदूषण के कारण गले तथा सांस संबंधित परेशानी है। वायु प्रदूषण से सबसे अधिक परेशानी नवजात शिशुओं को होती है। नवजात शिशुओं को दो पहिया वाहन पर लेकर जाए, तो कपड़े से ढक कर रखें।
आंखों को नुकसान पहुंचा रहा प्रदूषण
वायु प्रदूषण के कारण आंखों में जलन बढ़ रही है। ऐसे मरीज अस्पताल में पहुंच रहे हैं जिन्हें आंखों में जलन की शिकायत है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल आनंद का कहना है कि जिन्हें परेशानी है व आंखों का पानी से साफ करने के साथ चिकित्सक से सलाह जरूर लें।
एक्यूआई बढ़ने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाला प्रभाव
एक्यूआई स्वास्थ्य पर प्रभाव
अच्छा (0-50) कुछ नहीं।
संतोषजनक (51-100) संवेदनशील लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
थोड़ा प्रदूषित (101-200) फेफड़े की बीमारी जैसे अस्थमा, और हृदय रोग, बच्चों और बड़े वयस्कों के साथ लोगों को असुविधा के कारण सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
खराब (201-300) लंबे समय तक ऐसा रहने पर लोगों को सांस लेने में तकलीफ और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को बहुत असुविधा हो सकती है।
बहुत खराब (301-400) लंबे समय तक ऐसा रहने पर लोगों को सांस की बीमारी हो सकती है. फेफड़े और दिल की बीमारियों वाले लोगों पर प्रभाव अधिक खतरनाक हो सकता है।
गंभीर(401-500) स्वस्थ लोगों का भी श्वसन खराब हो सकता है। फेफड़े, हृदय रोग वाले लोगों का प्रभाव गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।
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हापुड़। जिले में बढ़ता प्रदूषण सांस रोगियों के अलावा बच्चों पर भारी पड़ने लगा है। पिछले 24 घंटों के अंदर 181 से बढ़कर एक्यूआई 240 तक पहुंच गया है। मानों फेफड़ों में पांच सिगरेट जितना धुआं चला गया हो। ओपीडी में मरीजों की संख्या दस प्रतिशत बढ़ गई है। चिकित्सक मास्क लगाकर घर से निकलने की सलाह दे रहे हैं।
दिवाली के बाद से जिले में वायु प्रदूषण ने लोगों को परेशान किया हुआ है। हालांकि, पिछले तीन दिनों में तेज हवाएं चलने से प्रदूषण कुछ कम हुआ था लेकिन, स्मॉग की चादर छाए रहने से लोगों को फिर भी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। अब वायु प्रदूषण फिर से तेजी से बढ़ने लगा है। चिकित्सकों की मानें तो जहरीली हवा फेफड़ों पर असर डालती है। इससे टीबी जैसी बीमारी होने का खतरा अधिक रहता है।
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एक्यूआई का सूचकांक मंगलवार को 181 दर्ज किया गया था, लेकिन, 24 घंटे के अंदर यह बढ़कर बुधवार को 240 पर पहुंच गया। इसी प्रकार वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता गया तो आने वाले दिनों में जिला गैस चेंबर बन सकता है। जिसके बाद सांस के मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
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सांस के मरीजों की बढ़ रही संख्या
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक व फिजीशियन डॉ. प्रदीप मित्तल ने बताया कि वायु प्रदूषण के कारण सांस संबंधित समस्या बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों में बढ़ रही है। मरीजों को दवा देकर घर भेजा जा रहा है। कुछ बुजुर्ग गंभीर बीमार होते हैं तो उन्हें भर्ती किया जा रहा है। प्रतिदिन 20 से 25 मरीजों की संख्या ओपीडी में बढ़ रही है। मधुमेह व हाइपरटेंशन के मरीजों को अपनी दवाएं नियमित रूप से लेनी चाहिए। परेशानी होने पर चिकित्सक से तत्काल संपर्क करना चाहिए।
नवजात शिशुओं को सबसे अधिक खतरा
शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पालकी नारंग का कहना है कि प्रतिदिन ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है जिन्हें वायु प्रदूषण के कारण गले तथा सांस संबंधित परेशानी है। वायु प्रदूषण से सबसे अधिक परेशानी नवजात शिशुओं को होती है। नवजात शिशुओं को दो पहिया वाहन पर लेकर जाए, तो कपड़े से ढक कर रखें।
आंखों को नुकसान पहुंचा रहा प्रदूषण
वायु प्रदूषण के कारण आंखों में जलन बढ़ रही है। ऐसे मरीज अस्पताल में पहुंच रहे हैं जिन्हें आंखों में जलन की शिकायत है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल आनंद का कहना है कि जिन्हें परेशानी है व आंखों का पानी से साफ करने के साथ चिकित्सक से सलाह जरूर लें।
एक्यूआई बढ़ने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाला प्रभाव
एक्यूआई स्वास्थ्य पर प्रभाव
अच्छा (0-50) कुछ नहीं।
संतोषजनक (51-100) संवेदनशील लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
थोड़ा प्रदूषित (101-200) फेफड़े की बीमारी जैसे अस्थमा, और हृदय रोग, बच्चों और बड़े वयस्कों के साथ लोगों को असुविधा के कारण सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
खराब (201-300) लंबे समय तक ऐसा रहने पर लोगों को सांस लेने में तकलीफ और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को बहुत असुविधा हो सकती है।
बहुत खराब (301-400) लंबे समय तक ऐसा रहने पर लोगों को सांस की बीमारी हो सकती है. फेफड़े और दिल की बीमारियों वाले लोगों पर प्रभाव अधिक खतरनाक हो सकता है।
गंभीर(401-500) स्वस्थ लोगों का भी श्वसन खराब हो सकता है। फेफड़े, हृदय रोग वाले लोगों का प्रभाव गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।