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दो गुना बढ़ा बंदगोभी का रकबा, गन्ना और धान दस फीसदी सिमटा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 27 Sep 2022 10:33 PM IST
सार

दो गुना बढ़ा बंदगोभी का रकबा, गन्ना और धान दस फीसदी सिमटा हापुड़।पांच साल में जहां धान, गन्ना का रकबा पांच से दस फीसदी सिमटा है वहीं, बंदगोभी का रकबा दो गुना तक बढ़ गया है।यही कारण है कि हर साल गन्ने का रकबा तेजी से गिरता जा रहा है।

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बोरी में बंधी बंद गोभी। संवाद फाइल फोटो - फोटो : HAPUR

विस्तार

दो गुना बढ़ा बंदगोभी का रकबा, गन्ना और धान दस फीसदी सिमटा
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हापुड़। जिले के किसानों का रुझान अब गन्ना, धान, आलू की फसल से हट रहा है, विकल्प के तौर पर किसानों ने बंदगोभी और दलहनी फसलों पर भरोसा जताया है। पांच साल में जहां धान, गन्ना का रकबा पांच से दस फीसदी सिमटा है वहीं, बंदगोभी का रकबा दो गुना तक बढ़ गया है। लेकिन बरसात में किसानों की चिंताएं जरूर बढ़ायी हुई हैं, बीते साल बंदगोभी का कट्टा 1500 रुपये तक बिका था, बुलंदशहर रोड पर लगने वाली पड़ाव मंडी अपनी अलग पहचान बना रही है।
एक समय था जब हापुड़ का किसान पूरी तरह गन्ने पर ही निर्भर था, किसानों के इस रुझान को देखते हुए हापुड़ में दो चीनी मिल स्थापित किए गए। मेरठ और बुलंदशहर जिले के मिलों पर भी यहां से सप्लाई होती है। लेकिन भुगतान में देरी और कमर तोड़ मेहनत अब किसानों को रास नहीं आ रही। यही कारण है कि हर साल गन्ने का रकबा तेजी से गिरता जा रहा है। चीनी मिलों के लिए यह सुखद नहीं है, इतना ही नहीं जब तक चीनी मिल चालू होते हैं तब तक बड़े क्षेत्र के गन्ने की सप्लाई क्रेशरों पर कर दी जाती है।
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धान की फसल भी किसानों के पैमाने पर खरी नहीं उतर रही। जिले के तीन ब्लॉक डार्क जोन घोषित होने और लगातार बरसात कम होने से यह फसल बीमारियों की चपेट में है। आलम यह है कि एक साल के अंदर ही धान का रकबा भी पांच फीसदी तक घट गया है। जबकि बंदगोभी की फसल के रकबे में हर साल बढ़ोत्तरी हो रही है। पांच सालों में गौर करें तो बंदगोभी का रकबा दो गुना बढ़ गया है।
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दो वर्षों में बदला फसलों का रकबा
वर्ष गन्ना धान बंदगोभी दलहन
2021 42846.78 21010 2500 2430
2022 41946.44 20010 3000 2755
(नोट : रकबा हेक्टेयर में है, एक साल के अंदर गन्ने का रकबा दो फीसदी और धान का रकबा पांच फीसदी कम हुआ है।)
पड़ाव पर लगने वाली मंडी की बनी पहचान
यूं तो हापुड़ की नवीन कृषि मंडी प्रख्यात है, लेकिन अब बुलंदशहर रोड के पड़ाव पर लगने वाली बंदगोभी की मंडी नई पहचान बना रही है। सीजन में रोजाना यहां से 40 से 50 ट्रक माल का निर्यात विभिन्न राज्यों में होता है।
बरसात ने किसानों की उड़ाई नींद
हाल ही में झमाझम बरसात ने किसानों की नींद उड़ा दी है, इस बारिश में बंदगोभी की फसल को काफी नुकसान हुआ है। तेज धूप से झुलसा लगने और ब्लाइट का खतरा भी मंडरा रहा है, किसान फसलों को बचाने के लिए दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं।
गन्ने की फसल बनी घाटे का सौदा
गन्ने की फसल घाटे का सौदा बन रही है, हर साल भुगतान में देरी होती है। इसलिए बंदगोभी की खेती पर विश्वास जताया है। इस साल बारिश से नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन यह फसल किसानों को लाभ भी पहुंचाती है। - नरेंद्र सहवाग, किसान।--फोटो संख्या--18
दलहन और तिलहन की फसलें फायदेमंद
दलहन और तिलहन की फसलें किसानों के लिए फायदेमंद हैं। गन्ने का भुगतान नहीं मिलता, धान में रोग और आलू का दाम पिटने से हर साल किसानों को नुकसान होता है। अपने खेतों में दलहन का रकबा बढ़ाया है। - सरदार अमरीश माहल, किसान।---फोटो संख्या--19

दलहन के प्रति किसानों को कर रहे जागरूक
दलहन फसलों की डिमांड काफी है, इन फसलों की बुवाई से खेतों में पोषक तत्व बढ़ते हैं। साथ ही किसानों को अच्छा लाभ भी होता है, इस साल धान का रकबा पांच फीसदी घटा है। - मनोज कुमार, जिला कृषि अधिकारी।
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