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जानलेवा हमले के दोषियों को तीन-तीन वर्ष की सजा
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जानलेवा हमले के दोषियों को तीन-तीन वर्ष की सजा
हापुड़। अपर जिला सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय द्वितीय कोर्ट ने जानलेवा हमले के दो आरोपियों को बुधवार को दोषी करार दिया। न्यायाधीश ने दोनों दोषियों को तीन-तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर सात-सात हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सौरभ रुहेला ने बताया कि 21 मार्च 2005 को मोहल्ला नवी करीम निवासी रतन लाल ने नगर कोतवाली में तहरीर दी। जिसमें उसने कहा कि उनका अपने भाई हरपाल सिंह से घर के बटवारे को लेकर विवाद चल रहा था। जिसको लेकर उसके भाई हरपाल व भतीजा अनिल ने 21 मार्च 2005 को उन पर छोटे भाई महेंद्र पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया। जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई है। जिस पर कोतवाली पुलिस ने जानलेवा हमला करने सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया। जिसके बाद मामले की सुनवाई अपर जिला सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय द्वितीय कोर्ट में चल रही थी। उन्होंने बताया कि मुकदमे में उनके द्वारा पांच गवाह पेश किए गए। साथ ही घटना के होने के साक्ष्य भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। जिस पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपर जिला सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय द्वितीय छाया शर्मा ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। न्यायाधीश छाया शर्मा ने दोनों दोषियों को तीन-तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर सात-सात हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया।
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हापुड़। अपर जिला सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय द्वितीय कोर्ट ने जानलेवा हमले के दो आरोपियों को बुधवार को दोषी करार दिया। न्यायाधीश ने दोनों दोषियों को तीन-तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर सात-सात हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सौरभ रुहेला ने बताया कि 21 मार्च 2005 को मोहल्ला नवी करीम निवासी रतन लाल ने नगर कोतवाली में तहरीर दी। जिसमें उसने कहा कि उनका अपने भाई हरपाल सिंह से घर के बटवारे को लेकर विवाद चल रहा था। जिसको लेकर उसके भाई हरपाल व भतीजा अनिल ने 21 मार्च 2005 को उन पर छोटे भाई महेंद्र पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया। जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई है। जिस पर कोतवाली पुलिस ने जानलेवा हमला करने सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया। जिसके बाद मामले की सुनवाई अपर जिला सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय द्वितीय कोर्ट में चल रही थी। उन्होंने बताया कि मुकदमे में उनके द्वारा पांच गवाह पेश किए गए। साथ ही घटना के होने के साक्ष्य भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। जिस पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपर जिला सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय द्वितीय छाया शर्मा ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। न्यायाधीश छाया शर्मा ने दोनों दोषियों को तीन-तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर सात-सात हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया।
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