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Hapur News: 10 अक्टूबर को पितृ विसर्जनी अमावस्या, पितरों के निमित्त तर्पण-दान का विशेष महत्व

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2026 12:22 AM IST
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October 10 marks Pitru Visarjani Amavasya; *Tarpan* and charity performed for ancestors hold special significance on this day
हापुड़। पितृ पक्ष के समापन पर पितृ विसर्जनी अमावस्या 10 अक्तूबर को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि नौ अक्तूबर की रात 9:35 बजे से शुरू होकर 10 अक्तूबर की रात 9:20 बजे तक रहेगी। इस कारण 10 अक्तूबर को पूरे दिन अमावस्या तिथि रहेगी। इस दिन पितरों की विदाई के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान, दान और धार्मिक अनुष्ठान करने का विशेष महत्व बताया गया है।
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पंडित संतोष तिवारी ने बताया कि पितृ विसर्जनी अमावस्या पर पितरों के निमित्त किया गया जप, दान, व्रत, तीर्थ, श्राद्ध, अनुष्ठान और यज्ञ विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान करने से हजारों गोदान के समान फल प्राप्त होने की मान्यता है। पितृ काल मध्याह्न का माना गया है, इसलिए इसी समय पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध कर्म करना शुभ माना जाता है।
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उन्होंने बताया कि पूर्वजों की विदाई के लिए 16 स्थानों पर भोजन सामग्री तोरी के पत्ते पर निकालनी चाहिए। इसमें विशेष रूप से खीर और तोरी बनाना शुभ माना गया है। योग्य ब्राह्मण के माध्यम से तर्पण, पंच वैश्वदेव बलि, श्राद्ध कर्म और ब्रह्मभोज कराया जा सकता है। पंच वैश्वदेव में गाय, कुत्ता, कौवा, चींटी और अतिथि के लिए भोजन निकालने की परंपरा है।
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पितरों की शांति के लिए ब्राह्मण द्वारा गीता के सातवें अध्याय, संपूर्ण गीता, पितृ गायत्री, भागवत के 11वें स्कंध या रामचरितमानस के उत्तरकांड का पाठ कराया जा सकता है। यथाशक्ति सीताराम नाम महामंत्र का जाप भी किया जा सकता है। व्रत रखने वाले सूर्यास्त से पहले एक समय भोजन करें।


उन्होंने बताया कि जल, वस्त्र, पात्र, पादुका, छत्र, अन्न, खीर, तोरी, हरी सब्जियां और सफेद वस्तुओं का दान पितरों के निमित्त किया जा सकता है। गंगा स्नान के बाद तिल और दूध मिश्रित जल से पितरों को जलांजलि देने की भी परंपरा है। मान्यता है कि पितरों के आशीर्वाद से परिवार को अन्न, धन और भौतिक सुख प्राप्त होते हैं।
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