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कोरोना के दो साल में चार गुना बढ़ गई जांच
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कोरोना के दो साल में चार गुना बढ़ गई जांच
हापुड़। जिले के तीन लाख परिवारों के 12 लाख लोगों में 17520 मरीज किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त हैं, स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में यह खुलासा हुआ है। कोरोना महामारी के दो सालों में जांच कराने वालों की संख्या भी चार गुना तक बढ़ी है, तनाव के रोगी तीन गुना हो गए हैं। टीबी, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के सर्वाधिक मरीज हैं।
सीएमओ डॉ. रेखा शर्मा ने बताया कि विभाग की टीमों ने 12 लाख लोगों की जांच की, इसमें सबसे ज्यादा मधुमेह के 9862 मरीज और 5860 लोगों को उच्च रक्तचाप की परेशानी मिली। बाकी मरीज हृदय रोग, गुर्दा रोग से जूझ रहे थे। लिवर की बीमारी 530 को मिली, 1288 मरीज विभिन्न बीमारियों का इलाज कराते पाए गए।
इन जांचों की बढ़ी डिमांड-
कोरोना महामारी के बाद से टीएलसी, डीएलसी, ईएसआर, एसजीपीटी, शुगर, एलएफटी, लिपिड, डेंगू, केएफटी की जांच कराने वालों की संख्या काफी तेजी से बढ़ी। पैथॉलोजिस्ट डॉ. विक्रांत बंसल ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद से लोग जांच पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। सर्वे के मुताबिक पहले एक साल में सात हजार लोग जांच कराते थे, कोरोना काल में एक साल के अंदर करीब 28 हजार से अधिक लोगों ने जांच कराई है।
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2700 को टीबी और 320 सांस रोगी
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि जिले में टीबी के 2700 मरीज हैं, इनका इलाज चल रहा है। इसमें 40 से अधिक उम्र के सबसे ज्यादा मरीज हैं। स्वास्थ्य सर्वे में 320 लोगों को सांस रोग की बीमारी मिली।
हर तीसरे व्यक्ति को तनाव
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अशरफ ने बताया कि औसतन हर तीसरा व्यक्ति तनाव से जूझ रहा है। व्यापार, नौकरी, आर्थिक-सामाजिक परेशानी समेत अन्य वजह हो सकती हैं, लेकिन यह अस्थायी रहती है। हर तीसरे व्यक्ति का वजन बढ़ा है और इसमें से लगभग 50 फीसदी मोटापे के शिकार हैं।
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं की बढ़ी डिमांड
कोरोना के बाद से लोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें आयुर्वेदिक दवाओं की संख्या अधिक है। आयुर्वेदाचार्य डॉ धंवंतरि त्यागी ने बताया कि इम्यूनिटी बूस्टर की मांग बढ़ी है, लोग स्वस्थ होते हुए भी इस तरह के बूस्टर इस्तेमाल कर रहे हैं।
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हापुड़। जिले के तीन लाख परिवारों के 12 लाख लोगों में 17520 मरीज किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त हैं, स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में यह खुलासा हुआ है। कोरोना महामारी के दो सालों में जांच कराने वालों की संख्या भी चार गुना तक बढ़ी है, तनाव के रोगी तीन गुना हो गए हैं। टीबी, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के सर्वाधिक मरीज हैं।
सीएमओ डॉ. रेखा शर्मा ने बताया कि विभाग की टीमों ने 12 लाख लोगों की जांच की, इसमें सबसे ज्यादा मधुमेह के 9862 मरीज और 5860 लोगों को उच्च रक्तचाप की परेशानी मिली। बाकी मरीज हृदय रोग, गुर्दा रोग से जूझ रहे थे। लिवर की बीमारी 530 को मिली, 1288 मरीज विभिन्न बीमारियों का इलाज कराते पाए गए।
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इन जांचों की बढ़ी डिमांड-
कोरोना महामारी के बाद से टीएलसी, डीएलसी, ईएसआर, एसजीपीटी, शुगर, एलएफटी, लिपिड, डेंगू, केएफटी की जांच कराने वालों की संख्या काफी तेजी से बढ़ी। पैथॉलोजिस्ट डॉ. विक्रांत बंसल ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद से लोग जांच पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। सर्वे के मुताबिक पहले एक साल में सात हजार लोग जांच कराते थे, कोरोना काल में एक साल के अंदर करीब 28 हजार से अधिक लोगों ने जांच कराई है।
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2700 को टीबी और 320 सांस रोगी
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि जिले में टीबी के 2700 मरीज हैं, इनका इलाज चल रहा है। इसमें 40 से अधिक उम्र के सबसे ज्यादा मरीज हैं। स्वास्थ्य सर्वे में 320 लोगों को सांस रोग की बीमारी मिली।
हर तीसरे व्यक्ति को तनाव
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अशरफ ने बताया कि औसतन हर तीसरा व्यक्ति तनाव से जूझ रहा है। व्यापार, नौकरी, आर्थिक-सामाजिक परेशानी समेत अन्य वजह हो सकती हैं, लेकिन यह अस्थायी रहती है। हर तीसरे व्यक्ति का वजन बढ़ा है और इसमें से लगभग 50 फीसदी मोटापे के शिकार हैं।
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं की बढ़ी डिमांड
कोरोना के बाद से लोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें आयुर्वेदिक दवाओं की संख्या अधिक है। आयुर्वेदाचार्य डॉ धंवंतरि त्यागी ने बताया कि इम्यूनिटी बूस्टर की मांग बढ़ी है, लोग स्वस्थ होते हुए भी इस तरह के बूस्टर इस्तेमाल कर रहे हैं।