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तापमान में बदलाव से बढ़े मरीज, ओपीडी में रोज पहुंच रहे तीन हजार
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तापमान में बदलाव से बढ़े मरीज, ओपीडी में रोज पहुंच रहे तीन हजार
हापुड़। तापमान में आए बदलाव से मरीजों की संख्या बढ़ गई है, जिलेभर के अस्पतालों में रोजाना तीन हजार से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। जिनमें चर्म रोगियों की संख्या 45 फीसदी से अधिक है। आंख, हड्डी रोगियों की संख्या 22 फीसदी तक है, जबकि वायरल बुखार के भी मरीज बढ़े हैं। मरीजों को पर्चा बनवाने में आधा घंटा तक का समय लग रहा है।
चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अमरजीत सिंह बताते हैं तापमान में उतार चढ़ाव से यह बीमारी गंभीर होती है। गर्मियों में इसका असर बहुत देखने को मिलता है। इस बीमारी की चपेट में आने से शरीर पर चकत्ते बन जाते हैं। जिनके अंदर से निकलने वाला पस मरीज को परेशान कर देता है। इसके अलावा फ्रोस्ट बाइट्स बीमारी भी लोगों को परेशान कर रही है, इसकी चपेट में आने से हाथ पैर सुन्न पड़ जाते हैं और शरीर में घाव बन जाते हैं। इन बीमारियों का सही समय पर उपचार जरूरी है।
स्कैबीज के लक्षण-
* खुजली-यह लक्षण अधिकतर रात में बदतर, गंभीर और तीव्र हो सकता है। खुजली खाज के सबसे आम लक्षणों में से एक है।
* चकत्ते-जब माइट त्वचा में घुस जाते हैं, तो ये त्वचा में रेखाएं बना देते है, जो त्वचा की ऊपरी परतों में सबसे अधिक पाए जाते हैं, और पित्ती, किसी के काटने, गांठें, फुंसी या पपड़ीदार त्वचा के रूप में दिखाई देते हैं। इसके अलावा इसमें छाले भी हो सकते हैं।
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* घाव-माइट्स के त्वचा में घुस जाने के बाद, व्यक्ति की त्वचा में संक्रमित क्षेत्रों में घाव हो जाते हैं। आमतौर पर स्टैफिलोकोकस ऑरियस के साथ किसी अन्य संक्रमण के कारण भी घाव हो सकते हैं।
* मोटी परतें-क्रस्टेड स्कैबीज, जिन्हें नॉर्वेजियन स्कैबीज के रूप में भी जाना जाता है, गंभीर खाज का एक रूप होता है, जिसमें त्वचा की परत के भीतर सैकड़ों से हजारों माइट्स और मैट्स के अंडे होते हैं, यह एक गंभीर लक्षण होता है।
व्यस्कों और बड़े बच्चोंमें संक्रमण की स्थिति
उंगलियों के बीच में, नाखूनों के आसपास, बगल, कमर, कलाई के अंदरूनी हिस्से, कोहनी के भीतरी भाग में, पांवों के तलवे में, स्तन, विशेष रूप से निपल्स के आसपास के क्षेत्र में, पुरुष जननांग, नितंबों, घुटने पर असर
-
शिशुओं और छोटे बच्चों में संक्रमण की स्थिति
खोपड़ी, चेहरा, गर्दन, हाथों की हथेलियां, पांवों के तल।
एर्टीकेरिया भी कर रही परेशान
चर्म रोगियों को एर्टीकेरिया भी परेशान कर रही है। इसका असर काम करने के दौरान पड़ता है, शरीर में पित्त जैसी स्थिति बन जाती है। इस दशा में काम करना काफी मुश्किल होता है। इस बीमारी के प्रमुख लक्षण।
* त्वचा में खिंचावपन महसूस होना, खुजली होना।
* पूरे शरीर में अचानक झुंझलाहट होना।
* काम करते समय शरीर में चकत्ते, पित्ती उछल जाना।
* गर्म कपड़े पहनने के दौरान भयंकर एलर्जी होना।
फ्रोस्ट बाइट्स के लक्षण-
* सर्दियों में हाथ, पैर सुन्न पड़ जाते हैं।
* हाथ, पैर की अंगुलियों में घाव बन जाते हैं।
* आसानी से घाव ठीक नहीं हो पाते।
बरतें सावधानी-
* कपड़ों को प्रेस कर पहनें।
* फास्ट फूड, तला खाने से बचें।
* पानी का अधिक से अधिक सेवन करें।
* बीमारी को बढ़ाएं नहीं, समय से उपचार कराएं।
दस दिन में चर्म रोगियों की संख्या
तिथि चर्म रोगी
19 मार्च 1820
18 मार्च 1780
17 मार्च 1620
16 मार्च 1530
15 मार्च 1322
14 मार्च 1020
13 मार्च 840
ओपीडी में तीन हजार से अधिक मरीज-
ओपीडी में पहुंचने वालों मरीजों में 1900 के करीब चर्म रोगी हैं, 520 मरीज नेत्र और हड्डी संबंधी रोग से परेशान हैं। बुखार के मरीजों की संख्या 210 तक है, जबकि अन्य मरीज दूसरी बीमारियों से ग्रस्त हैं।
अस्पतालों में इन चिकित्सकों की कमी
स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में हड्डी रोग विशेषज्ञ, ईएनटी विशेषज्ञों की भारी कमी है, जिसके चलते फिजिशियन ही इन मरीजों को उपचार दे रहे हैं।
गढ़ रोड सीएचसी में पहुंचे 820 मरीज
गढ़ रोड सीएचसी में सोमवार को 820 मरीज पहुंचे। इसमें 360 चर्म रोग, 80 मरीज नेत्र रोग, 60 मरीज हड्डी संबंधी समस्या, 90 मरीज बुखार से पीड़ित थे, जबकि बाकी मरीज अन्य बीमारियों से पीड़ित थे।
मरीजों को मिल रहा बेहतर उपचारॉ
अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बेहतर उपचार दिलाया जा रहा है। मरीजों को किसी तरह की परेसानी नहीं होने दी जाएगी। पर्याप्त मात्रा में दवा भी उपलब्ध हैं, चर्म रोगियों की संख्या बढ़ी है।-डॉ रेखा शर्मा, सीएमओ।
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हापुड़। तापमान में आए बदलाव से मरीजों की संख्या बढ़ गई है, जिलेभर के अस्पतालों में रोजाना तीन हजार से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। जिनमें चर्म रोगियों की संख्या 45 फीसदी से अधिक है। आंख, हड्डी रोगियों की संख्या 22 फीसदी तक है, जबकि वायरल बुखार के भी मरीज बढ़े हैं। मरीजों को पर्चा बनवाने में आधा घंटा तक का समय लग रहा है।
चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अमरजीत सिंह बताते हैं तापमान में उतार चढ़ाव से यह बीमारी गंभीर होती है। गर्मियों में इसका असर बहुत देखने को मिलता है। इस बीमारी की चपेट में आने से शरीर पर चकत्ते बन जाते हैं। जिनके अंदर से निकलने वाला पस मरीज को परेशान कर देता है। इसके अलावा फ्रोस्ट बाइट्स बीमारी भी लोगों को परेशान कर रही है, इसकी चपेट में आने से हाथ पैर सुन्न पड़ जाते हैं और शरीर में घाव बन जाते हैं। इन बीमारियों का सही समय पर उपचार जरूरी है।
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स्कैबीज के लक्षण-
* खुजली-यह लक्षण अधिकतर रात में बदतर, गंभीर और तीव्र हो सकता है। खुजली खाज के सबसे आम लक्षणों में से एक है।
* चकत्ते-जब माइट त्वचा में घुस जाते हैं, तो ये त्वचा में रेखाएं बना देते है, जो त्वचा की ऊपरी परतों में सबसे अधिक पाए जाते हैं, और पित्ती, किसी के काटने, गांठें, फुंसी या पपड़ीदार त्वचा के रूप में दिखाई देते हैं। इसके अलावा इसमें छाले भी हो सकते हैं।
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* घाव-माइट्स के त्वचा में घुस जाने के बाद, व्यक्ति की त्वचा में संक्रमित क्षेत्रों में घाव हो जाते हैं। आमतौर पर स्टैफिलोकोकस ऑरियस के साथ किसी अन्य संक्रमण के कारण भी घाव हो सकते हैं।
* मोटी परतें-क्रस्टेड स्कैबीज, जिन्हें नॉर्वेजियन स्कैबीज के रूप में भी जाना जाता है, गंभीर खाज का एक रूप होता है, जिसमें त्वचा की परत के भीतर सैकड़ों से हजारों माइट्स और मैट्स के अंडे होते हैं, यह एक गंभीर लक्षण होता है।
व्यस्कों और बड़े बच्चोंमें संक्रमण की स्थिति
उंगलियों के बीच में, नाखूनों के आसपास, बगल, कमर, कलाई के अंदरूनी हिस्से, कोहनी के भीतरी भाग में, पांवों के तलवे में, स्तन, विशेष रूप से निपल्स के आसपास के क्षेत्र में, पुरुष जननांग, नितंबों, घुटने पर असर
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शिशुओं और छोटे बच्चों में संक्रमण की स्थिति
खोपड़ी, चेहरा, गर्दन, हाथों की हथेलियां, पांवों के तल।
एर्टीकेरिया भी कर रही परेशान
चर्म रोगियों को एर्टीकेरिया भी परेशान कर रही है। इसका असर काम करने के दौरान पड़ता है, शरीर में पित्त जैसी स्थिति बन जाती है। इस दशा में काम करना काफी मुश्किल होता है। इस बीमारी के प्रमुख लक्षण।
* त्वचा में खिंचावपन महसूस होना, खुजली होना।
* पूरे शरीर में अचानक झुंझलाहट होना।
* काम करते समय शरीर में चकत्ते, पित्ती उछल जाना।
* गर्म कपड़े पहनने के दौरान भयंकर एलर्जी होना।
फ्रोस्ट बाइट्स के लक्षण-
* सर्दियों में हाथ, पैर सुन्न पड़ जाते हैं।
* हाथ, पैर की अंगुलियों में घाव बन जाते हैं।
* आसानी से घाव ठीक नहीं हो पाते।
बरतें सावधानी-
* कपड़ों को प्रेस कर पहनें।
* फास्ट फूड, तला खाने से बचें।
* पानी का अधिक से अधिक सेवन करें।
* बीमारी को बढ़ाएं नहीं, समय से उपचार कराएं।
दस दिन में चर्म रोगियों की संख्या
तिथि चर्म रोगी
19 मार्च 1820
18 मार्च 1780
17 मार्च 1620
16 मार्च 1530
15 मार्च 1322
14 मार्च 1020
13 मार्च 840
ओपीडी में तीन हजार से अधिक मरीज-
ओपीडी में पहुंचने वालों मरीजों में 1900 के करीब चर्म रोगी हैं, 520 मरीज नेत्र और हड्डी संबंधी रोग से परेशान हैं। बुखार के मरीजों की संख्या 210 तक है, जबकि अन्य मरीज दूसरी बीमारियों से ग्रस्त हैं।
अस्पतालों में इन चिकित्सकों की कमी
स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में हड्डी रोग विशेषज्ञ, ईएनटी विशेषज्ञों की भारी कमी है, जिसके चलते फिजिशियन ही इन मरीजों को उपचार दे रहे हैं।
गढ़ रोड सीएचसी में पहुंचे 820 मरीज
गढ़ रोड सीएचसी में सोमवार को 820 मरीज पहुंचे। इसमें 360 चर्म रोग, 80 मरीज नेत्र रोग, 60 मरीज हड्डी संबंधी समस्या, 90 मरीज बुखार से पीड़ित थे, जबकि बाकी मरीज अन्य बीमारियों से पीड़ित थे।
मरीजों को मिल रहा बेहतर उपचारॉ
अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बेहतर उपचार दिलाया जा रहा है। मरीजों को किसी तरह की परेसानी नहीं होने दी जाएगी। पर्याप्त मात्रा में दवा भी उपलब्ध हैं, चर्म रोगियों की संख्या बढ़ी है।-डॉ रेखा शर्मा, सीएमओ।