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चुनाव से डग्गामार वाहनों की चांदी, दो गुना वसूल रहे किराया
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दिल्ली रोड पर बस न आने के कारण डग्गामार वाहन में बैठते यात्री संवाद
- फोटो : HAPUR
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चुनाव से डग्गामार वाहनों की चांदी, दो गुना वसूल रहे किराया
हापुड़। जिले में चुनाव संपन्न होने के बाद डिपो की 83 बसों को अन्य जिलों में चुनाव कराने के लिए भेज दिया गया है। जिसके कारण यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में डग्गामार बसों और वाहनों के संचालकों ने किराया भी बढ़ा दिया है। अब यात्रियों को दिल्ली गाजियाबाद रूट पर सफर करने के लिए पहले के मुकाबले दो गुना अधिक किराया देना पड़ रहा है। चुनाव ड्यूटी में बसों के लगने से इन मागों पर रोडवेज बसों की किल्लत बनी है।
स्थानीय रोडवेज डिपो में कुल 105 बसें हैं। इनमें से 83 बसों को चुनाव ड्यूटी में भेज दिया गया है। अब केवल डिपो के पास मात्र 22 बसें ही बची हुई हैं। इनमें से 2 से 4 बसें मरम्मत कार्य के लिए खड़ी रहती हैं। ऐसे में सड़कों पर केवल 18 से 20 बसों का ही प्रतिदिन संचालन हो पा रहा है। ऐसा होते देख डग्गामार वाहन संचालकों ने किराये को बढ़ा दिया है। वह मनमाने किराया यात्रियों से वसूल रहे हैं। ऐसे में यात्रियों को अधिक जेब ढीली करनी पड़ रही है।
पहले गाजियाबाद जाने के लिए यात्रियों को ऑटो में 30 रुपये देने पड़ते थे। लेकिन, अब उसी रूट पर जाने के लिए यात्रियों को 50 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। वहीं, विजयनगर तक जाने के लिए पहले यात्रियों को 50 रुपये तक देने पड़ रहे थे। अब वहां तक जाने के लिए लोगों को 70 से 80 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। वहीं, डग्गामार बसों का भी यही हाल हो रहा है। पहले गाजियाबाद तक का डग्गामार बसों में 40 रुपये था। लेकिन, अब उसे बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है। जबकि, आनंद विहार तक के लिए लोगों को 70 से 80 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
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अधिक किराया देकर भी नहीं मिल रहा आरामदायक सफर
इतना किराया देने के बाद भी यात्री आरामदायक सफर नहीं कर पा रहे हैं। बसों का संख्या कम और यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण बस खचाखच भरकर चल रही हैं। जिसके कारण यात्रियों को बैठने तक के लिए सीट उपलब्ध नहीं हो रही है। लोग खड़े होकर यात्रा करने को मजबूर हैं। वहीं, विजयनगर तक चलने वाले ऑटो में भी तीन लोगों की सीट पर छह लोग बैठाकर चल रहे हैं। बस न होने के चलते मजबूरन यात्रियों को सफर करना पड़ रहा है। इसके अलावा कुछ यात्रियों को अपने निजी वाहनों से भी सफर करना पड़ रहा है।
गाजियाबाद रूट पर सबसे ज्यादा दिक्कत
नगर के अधिकांश नौकरीपेशा करने वाले लोग दिल्ली गाजियाबाद रूट पर ही यात्रा करते हैं। इसी कारण इस रूट पर सबसे अधिक भीड़ रहती हैं। ऐसे में निगम के अधिकारियों ने इस रूट पर सबसे अधिक 55 से 60 बसों का संचालन कराते थे। लेकिन, अब इस रूट पर केवल 15 बसों का ही संचालन हो रहा है।
रोडवेज बसों की कमी खल रही
बसों का चुनाव में अधिग्रहण होने के कारण सबसे अधिक प्रभाव गाजियाबाद और दिल्ली रूट पर पड़ रहा है। इसके अलावा मोदीनगर रूट भी बेहद प्रभावित हो चुका है। नोएडा रूट पर भी हापुड़ डिपो की बसों का संख्या कम हो चुकी है। हालांकि पहले भी इस रूट पर स्थानीय डिपो की केवल पांच बसों का संचालन हो रहा था। अधिकांश नोएडा डिपो की बसों का संचालन हो रहा था।
बढ़ाए गए हैं फेरे
गाजियाबाद रूट पर 15 बसों का संचालन हो रहा है। गाजियाबाद रूट पर जाने वाले यात्रियों को अधिक परेशानी न हो इसके लिए बसों के फेरे बढ़ा दिया गए हैं। जिससे अधिक से अधिक लोग अपने गंतव्य तक जा सकें। - संदीप नायर, एआरएम
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छह बजे के बाद गायब हो जाते हैं डग्गामार वाहन
शाम छह बजे के बाद सड़कों से डग्गामार वाहन भी गायब हो जाते हैं। जिसके कारण शाम के समय लोगों को गंतव्य तक जाने में सबसे अधिक परेशानी हो रही है। यात्रियों को ठंड में खड़ा होकर घंटों वाहनों का इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में कुछ यात्रियों को लिफ्ट लेकर इसके अलावा टेंपो या ट्रक में सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है। महिलाओं को अधिक परेशानी हो रही है।
फोटो संख्या - 34
डेढ़ घंटे तक किया इंतजार
रोडवेज बस के लिए करीब डेढ़ घंटा इंतजार किया। लेकिन, अभी तक एक भी बस नहीं आई है। डग्गामार वाहन लगातार चल रहे हैं। उन्होंने किराया बढ़ा दिया है। - अतीक, यात्री
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फोटो संख्या - 35
पहले की जानी थी व्यवस्था
रोडवेज बसों का चुनाव के लिए अधिग्रहण करने से पहले संबंधित अधिकारियों को कोई व्यवस्था करनी चाहिए थी। बसों का अधिग्रहण करके यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है। - संजीव, यात्री
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फोटो संख्या - 36
यात्रियों के बारे में नहीं सोचा
चुनाव करके बसों का अधिग्रहण करने से पहले किसी ने यात्रियों की परेशानियों के बारे में नहीं सोचा। यात्रियों को अब अधिक जेब ढीली करने बाद भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। - राजेश, यात्री
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फोटो संख्या - 37
डग्गामार वाहन में यात्रा करना मजबूरी
घंटों इंतजार करने के बाद भी बस नहीं मिल रही है। डग्गामार वाहनों में यात्रा करना पसंद नहीं है और डर भी लगता है। लेकिन, मजबूर होकर डग्गामार में यात्रा करनी पड़ रही है। - अनीता, यात्री
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हापुड़। जिले में चुनाव संपन्न होने के बाद डिपो की 83 बसों को अन्य जिलों में चुनाव कराने के लिए भेज दिया गया है। जिसके कारण यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में डग्गामार बसों और वाहनों के संचालकों ने किराया भी बढ़ा दिया है। अब यात्रियों को दिल्ली गाजियाबाद रूट पर सफर करने के लिए पहले के मुकाबले दो गुना अधिक किराया देना पड़ रहा है। चुनाव ड्यूटी में बसों के लगने से इन मागों पर रोडवेज बसों की किल्लत बनी है।
स्थानीय रोडवेज डिपो में कुल 105 बसें हैं। इनमें से 83 बसों को चुनाव ड्यूटी में भेज दिया गया है। अब केवल डिपो के पास मात्र 22 बसें ही बची हुई हैं। इनमें से 2 से 4 बसें मरम्मत कार्य के लिए खड़ी रहती हैं। ऐसे में सड़कों पर केवल 18 से 20 बसों का ही प्रतिदिन संचालन हो पा रहा है। ऐसा होते देख डग्गामार वाहन संचालकों ने किराये को बढ़ा दिया है। वह मनमाने किराया यात्रियों से वसूल रहे हैं। ऐसे में यात्रियों को अधिक जेब ढीली करनी पड़ रही है।
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पहले गाजियाबाद जाने के लिए यात्रियों को ऑटो में 30 रुपये देने पड़ते थे। लेकिन, अब उसी रूट पर जाने के लिए यात्रियों को 50 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। वहीं, विजयनगर तक जाने के लिए पहले यात्रियों को 50 रुपये तक देने पड़ रहे थे। अब वहां तक जाने के लिए लोगों को 70 से 80 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। वहीं, डग्गामार बसों का भी यही हाल हो रहा है। पहले गाजियाबाद तक का डग्गामार बसों में 40 रुपये था। लेकिन, अब उसे बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है। जबकि, आनंद विहार तक के लिए लोगों को 70 से 80 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
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अधिक किराया देकर भी नहीं मिल रहा आरामदायक सफर
इतना किराया देने के बाद भी यात्री आरामदायक सफर नहीं कर पा रहे हैं। बसों का संख्या कम और यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण बस खचाखच भरकर चल रही हैं। जिसके कारण यात्रियों को बैठने तक के लिए सीट उपलब्ध नहीं हो रही है। लोग खड़े होकर यात्रा करने को मजबूर हैं। वहीं, विजयनगर तक चलने वाले ऑटो में भी तीन लोगों की सीट पर छह लोग बैठाकर चल रहे हैं। बस न होने के चलते मजबूरन यात्रियों को सफर करना पड़ रहा है। इसके अलावा कुछ यात्रियों को अपने निजी वाहनों से भी सफर करना पड़ रहा है।
गाजियाबाद रूट पर सबसे ज्यादा दिक्कत
नगर के अधिकांश नौकरीपेशा करने वाले लोग दिल्ली गाजियाबाद रूट पर ही यात्रा करते हैं। इसी कारण इस रूट पर सबसे अधिक भीड़ रहती हैं। ऐसे में निगम के अधिकारियों ने इस रूट पर सबसे अधिक 55 से 60 बसों का संचालन कराते थे। लेकिन, अब इस रूट पर केवल 15 बसों का ही संचालन हो रहा है।
रोडवेज बसों की कमी खल रही
बसों का चुनाव में अधिग्रहण होने के कारण सबसे अधिक प्रभाव गाजियाबाद और दिल्ली रूट पर पड़ रहा है। इसके अलावा मोदीनगर रूट भी बेहद प्रभावित हो चुका है। नोएडा रूट पर भी हापुड़ डिपो की बसों का संख्या कम हो चुकी है। हालांकि पहले भी इस रूट पर स्थानीय डिपो की केवल पांच बसों का संचालन हो रहा था। अधिकांश नोएडा डिपो की बसों का संचालन हो रहा था।
बढ़ाए गए हैं फेरे
गाजियाबाद रूट पर 15 बसों का संचालन हो रहा है। गाजियाबाद रूट पर जाने वाले यात्रियों को अधिक परेशानी न हो इसके लिए बसों के फेरे बढ़ा दिया गए हैं। जिससे अधिक से अधिक लोग अपने गंतव्य तक जा सकें। - संदीप नायर, एआरएम
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छह बजे के बाद गायब हो जाते हैं डग्गामार वाहन
शाम छह बजे के बाद सड़कों से डग्गामार वाहन भी गायब हो जाते हैं। जिसके कारण शाम के समय लोगों को गंतव्य तक जाने में सबसे अधिक परेशानी हो रही है। यात्रियों को ठंड में खड़ा होकर घंटों वाहनों का इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में कुछ यात्रियों को लिफ्ट लेकर इसके अलावा टेंपो या ट्रक में सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है। महिलाओं को अधिक परेशानी हो रही है।
फोटो संख्या - 34
डेढ़ घंटे तक किया इंतजार
रोडवेज बस के लिए करीब डेढ़ घंटा इंतजार किया। लेकिन, अभी तक एक भी बस नहीं आई है। डग्गामार वाहन लगातार चल रहे हैं। उन्होंने किराया बढ़ा दिया है। - अतीक, यात्री
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फोटो संख्या - 35
पहले की जानी थी व्यवस्था
रोडवेज बसों का चुनाव के लिए अधिग्रहण करने से पहले संबंधित अधिकारियों को कोई व्यवस्था करनी चाहिए थी। बसों का अधिग्रहण करके यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है। - संजीव, यात्री
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फोटो संख्या - 36
यात्रियों के बारे में नहीं सोचा
चुनाव करके बसों का अधिग्रहण करने से पहले किसी ने यात्रियों की परेशानियों के बारे में नहीं सोचा। यात्रियों को अब अधिक जेब ढीली करने बाद भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। - राजेश, यात्री
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फोटो संख्या - 37
डग्गामार वाहन में यात्रा करना मजबूरी
घंटों इंतजार करने के बाद भी बस नहीं मिल रही है। डग्गामार वाहनों में यात्रा करना पसंद नहीं है और डर भी लगता है। लेकिन, मजबूर होकर डग्गामार में यात्रा करनी पड़ रही है। - अनीता, यात्री

दिल्ली रोड पर बस न आने के कारण डग्गामार वाहन में बैठते यात्री संवाद- फोटो : HAPUR