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गांव खाली करने के नोटिस पर हंगामा वन विभाग कार्यालय में की तालाबंदी
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वन विभाग कार्यालय में धरना देते भाकियू कार्यकर्ता संवाद
- फोटो : HAPUR
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गांव खाली करने के नोटिस पर हंगामा वन विभाग कार्यालय में की तालाबंदी
हापुड़। भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने वन विभाग के अधिकारियों पर गढ़मुक्तेश्वर के गांव गंगानगर को खाली कराने के लिए ग्रामीणों को नोटिस जारी करने का आरोप लगा सोमवार को आवास विकास स्थित कार्यालय पर जोरदार हंगामा किया। इसके बाद तालाबंदी कर अधिकारियों को बंधक बना नोटिस वापस लेने की मांग उठाई। शाम तक धरना जारी रहा, इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा।
भाकियू के जिलाध्यक्ष दिनेश खेड़ा ने बताया कि वर्ष 1971 में बंगाल से कई परिवार आकर गढ़ में बसे थे, अधिकांश हिंदू परिवार ही हैं। वर्ष 1985 में तत्कालीन सरकार ने इन परिवारों को बसाया, उस गांव को गंगानगर दिया गया। बंगाल से आए इन लोगों की नसबंदी करने के साथ ही पट्टे भी दिए गए। लेकिन पट्टे रिकॉर्ड में नहीं चढ़ सके, मतदान सूची में भी इन लोगों का नाम था। लेकिन वन विभाग द्वारा इस गांव की करीब 1500 बीघा जमीन पर अपना हक जताया जा रहा है। जमीन खाली कराने के लिए ग्रामीणों को गांव छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है। बीते 40 साल से यहीं रह रहे लोग, अब कहां जाकर बसेेंगे, जबकि इनमें अधिकांश मजदूर वर्ग से ही हैं और जैसे तैसे कर गुजर बसर कर रहे हैं।
सोमवार को नोटिस के विरोध में भाकियू कार्यकर्ता ग्रामीणों के साथ वन विभाग के कार्यालय पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया। अफसरों ने समझाने का प्रयास किया तो उन्हें धरने पर ही बंधक बना लिया। कार्यालय पर तालाबंदी कर दी, इससे पूरा कार्य बाधित हो गया। वन विभाग के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया गया। नोटिस वापस लिए जाने पर सहमति नहीं बनने पर भाकियू ने अनिश्चितकालीन धरने का एलान कर दिया।
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प्रदर्शन करने वालों में दिनेश त्यागी, जीते चौहान, अनुराधा, पूनम शर्मा, कपिल राय, इमरान, सीमा, युसूफ, सुभाष प्रधान, नत्थु सैनी, उत्तम सैनी, केशव, ममता शर्मा, नीलम त्यागी, बबली त्यागी, शब्बू चौधरी, महिपाल चौहान, हबीब चौधरी, अमानत अली, हाजी आरिफ, सुभाष चौहान, हाजी आरिफ, अमानत अली, शोभा, सावित्री, सुमित्रा, शहनाज रहे।
एक साल पहले दिया था नोटिस
जिला प्रभागीय वन अधिकारी राजेश निगम ने बताया कि इन दिनों अवैध लकड़ी कटान पर कार्रवाई की जा रही है, इससे माफिया के काले धंधे बंद हो रहे हैं। इससे तिलमिलाकर ही इस मुद्दों को आड़ बनाकर अनावश्यक दबाव बना रहे हैं। पूरा मामला डीएम के संज्ञान में है, तत्कालीन डीएफओ ने नोटिस जारी किया था। फाइनल निर्णय को लेकर में खुद ग्रामीणों के बीच भी गया। किसानों से किसी तरह की विभाग की लड़ाई नहीं है।
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हापुड़। भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने वन विभाग के अधिकारियों पर गढ़मुक्तेश्वर के गांव गंगानगर को खाली कराने के लिए ग्रामीणों को नोटिस जारी करने का आरोप लगा सोमवार को आवास विकास स्थित कार्यालय पर जोरदार हंगामा किया। इसके बाद तालाबंदी कर अधिकारियों को बंधक बना नोटिस वापस लेने की मांग उठाई। शाम तक धरना जारी रहा, इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा।
भाकियू के जिलाध्यक्ष दिनेश खेड़ा ने बताया कि वर्ष 1971 में बंगाल से कई परिवार आकर गढ़ में बसे थे, अधिकांश हिंदू परिवार ही हैं। वर्ष 1985 में तत्कालीन सरकार ने इन परिवारों को बसाया, उस गांव को गंगानगर दिया गया। बंगाल से आए इन लोगों की नसबंदी करने के साथ ही पट्टे भी दिए गए। लेकिन पट्टे रिकॉर्ड में नहीं चढ़ सके, मतदान सूची में भी इन लोगों का नाम था। लेकिन वन विभाग द्वारा इस गांव की करीब 1500 बीघा जमीन पर अपना हक जताया जा रहा है। जमीन खाली कराने के लिए ग्रामीणों को गांव छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है। बीते 40 साल से यहीं रह रहे लोग, अब कहां जाकर बसेेंगे, जबकि इनमें अधिकांश मजदूर वर्ग से ही हैं और जैसे तैसे कर गुजर बसर कर रहे हैं।
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सोमवार को नोटिस के विरोध में भाकियू कार्यकर्ता ग्रामीणों के साथ वन विभाग के कार्यालय पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया। अफसरों ने समझाने का प्रयास किया तो उन्हें धरने पर ही बंधक बना लिया। कार्यालय पर तालाबंदी कर दी, इससे पूरा कार्य बाधित हो गया। वन विभाग के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया गया। नोटिस वापस लिए जाने पर सहमति नहीं बनने पर भाकियू ने अनिश्चितकालीन धरने का एलान कर दिया।
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प्रदर्शन करने वालों में दिनेश त्यागी, जीते चौहान, अनुराधा, पूनम शर्मा, कपिल राय, इमरान, सीमा, युसूफ, सुभाष प्रधान, नत्थु सैनी, उत्तम सैनी, केशव, ममता शर्मा, नीलम त्यागी, बबली त्यागी, शब्बू चौधरी, महिपाल चौहान, हबीब चौधरी, अमानत अली, हाजी आरिफ, सुभाष चौहान, हाजी आरिफ, अमानत अली, शोभा, सावित्री, सुमित्रा, शहनाज रहे।
एक साल पहले दिया था नोटिस
जिला प्रभागीय वन अधिकारी राजेश निगम ने बताया कि इन दिनों अवैध लकड़ी कटान पर कार्रवाई की जा रही है, इससे माफिया के काले धंधे बंद हो रहे हैं। इससे तिलमिलाकर ही इस मुद्दों को आड़ बनाकर अनावश्यक दबाव बना रहे हैं। पूरा मामला डीएम के संज्ञान में है, तत्कालीन डीएफओ ने नोटिस जारी किया था। फाइनल निर्णय को लेकर में खुद ग्रामीणों के बीच भी गया। किसानों से किसी तरह की विभाग की लड़ाई नहीं है।