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जिले के 45 आंगनबाड़ी केंद्र पर ताले, नहीं हो रही पढ़ाई
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गांव लुहारी में बदहाल पड़ा आंगनबाड़ी केंद्र। संवाद
- फोटो : HAPUR
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जिले के 45 आंगनबाड़ी केंद्र पर ताले, नहीं हो रही पढ़ाई
हापुड़। कोरोना काल के समय से बंद हुए आंगनबाड़ी केंद्रों में अभी तक पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है। जिले में करीब 45 केंद्र ऐसे हैं जिनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पद रिक्त हैं और बच्चे भी नहीं जा रहे हैं। सप्ताह में दो दिन केंद्रों पर बच्चों को पढ़ाने की गाइड लाइन का भी पालन नहीं हो पा रहा है।
जिले में 887 आंगनबाड़ी केंद्रों में 12040 बच्चे पंजीकृत हैं। इन केंद्रों में 112 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पद रिक्त चल रहे हैं। जिसके कारण कुछ केंद्रों पर ताला लटका हुआ है। इसके साथ ही कुछ ऐसे हैं, जिनमें पंजीकृत बच्चों की संख्या काफी कम है और इनके बच्चों को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित विद्यालयों में शिफ्ट कर दिया गया है। लेकिन केंद्र के बच्चे इन स्कूलों में भी नहीं जा रहे हैं।
गांव रामपुर नियामतपुर में केंद्र बंद -
गढ़ के गांव रामपुर नियामतपुर में आंगनबाड़ी केंद्र महीनों से बंद पड़ा है। केंद्र खुलता है तो बच्चे नहीं आते। विभागों में सामंजस्य ही नहीं है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मेहनत करती हैं, लेकिन उनकी मेहनत का फल नहीं मिल रहा। - टीकम सिंह, प्रधान।
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बच्चों के बैठने के लिए नहीं व्यवस्था
लुहारी गांव का आंगनबाड़ी केंद्र भी पिछले काफी समय से बदहाल है। यहां वैसे तो बच्चों के बैठने की व्यवस्था नहीं है। जल्द केंद्र का दोबारा सही ढंग से निर्माण हो और नई नीति के साथ कार्य हो।-राजकुमार-प्रधान।
ऑन लाइन चल रही ट्रेनिंग
नई शिक्षा नीति के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जा रही है। बेहतर शिक्षा के लिए समन्वय स्थापित किया जा रहा है। जो भवन जर्जर हो चुके हैं, उनके बच्चों को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित स्कूलों में शिफ्ट कराया जा रहा है। कुल केंद्रों में 379 केंद्र विभागीय हैं, बीस का प्रस्ताव जा चुका है, जबकि चार का निर्माण चल रहा है।
- ज्ञान प्रकाश तिवारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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हापुड़। कोरोना काल के समय से बंद हुए आंगनबाड़ी केंद्रों में अभी तक पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है। जिले में करीब 45 केंद्र ऐसे हैं जिनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पद रिक्त हैं और बच्चे भी नहीं जा रहे हैं। सप्ताह में दो दिन केंद्रों पर बच्चों को पढ़ाने की गाइड लाइन का भी पालन नहीं हो पा रहा है।
जिले में 887 आंगनबाड़ी केंद्रों में 12040 बच्चे पंजीकृत हैं। इन केंद्रों में 112 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पद रिक्त चल रहे हैं। जिसके कारण कुछ केंद्रों पर ताला लटका हुआ है। इसके साथ ही कुछ ऐसे हैं, जिनमें पंजीकृत बच्चों की संख्या काफी कम है और इनके बच्चों को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित विद्यालयों में शिफ्ट कर दिया गया है। लेकिन केंद्र के बच्चे इन स्कूलों में भी नहीं जा रहे हैं।
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गांव रामपुर नियामतपुर में केंद्र बंद -
गढ़ के गांव रामपुर नियामतपुर में आंगनबाड़ी केंद्र महीनों से बंद पड़ा है। केंद्र खुलता है तो बच्चे नहीं आते। विभागों में सामंजस्य ही नहीं है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मेहनत करती हैं, लेकिन उनकी मेहनत का फल नहीं मिल रहा। - टीकम सिंह, प्रधान।
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बच्चों के बैठने के लिए नहीं व्यवस्था
लुहारी गांव का आंगनबाड़ी केंद्र भी पिछले काफी समय से बदहाल है। यहां वैसे तो बच्चों के बैठने की व्यवस्था नहीं है। जल्द केंद्र का दोबारा सही ढंग से निर्माण हो और नई नीति के साथ कार्य हो।-राजकुमार-प्रधान।
ऑन लाइन चल रही ट्रेनिंग
नई शिक्षा नीति के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जा रही है। बेहतर शिक्षा के लिए समन्वय स्थापित किया जा रहा है। जो भवन जर्जर हो चुके हैं, उनके बच्चों को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित स्कूलों में शिफ्ट कराया जा रहा है। कुल केंद्रों में 379 केंद्र विभागीय हैं, बीस का प्रस्ताव जा चुका है, जबकि चार का निर्माण चल रहा है।
- ज्ञान प्रकाश तिवारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी