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पोस्ट कोविड सिंड्रोम : कोरोना से ठीक हुए 850 की फूल रही सांस
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पोस्ट कोविड सिंड्रोम : कोरोना से ठीक हुए 850 की फूल रही सांस
हापुड़। कोरोना की दूसरी लहर संक्रमित मरीजों को ऐसा घाव देकर गई है, जिसे वह जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। हापुड़ के करीब 850 लोग पोस्ट कोविड सिंड्रोम में फंस गए हैं। रोगियों को इन बीमारियों के साथ पूरी जिंदगी जीना पड़ सकता है। एहतियातन जिला अस्पताल में पोस्ट कोविड वार्ड बनाया गया है, जहां रोजाना मरीज पहुंच रहे हैं। पहचाने गए मरीजों की मॉनीटरिंग का निर्णय विभागीय अफसरों ने लिया है। इन लोगों की काउंसिलिंग भी कराई जा रही है।
जिले में कोरोना के मरीजों को उपचार देने के लिए अस्पतालों को तीन श्रेणियों में बांटा गया था। इसमें जो मरीज लेवल एक व लेवल दो श्रेणी में रहकर ही ठीक हो गए वह तो सामान्य जिंदगी की तरफ लौट रहे हैं। लेकिन जिनका संक्रमण लेवल अधिक हो गया था, उनमें बहुत से मरीज ठीक तो हो गए हैं लेकिन करीब 850 मरीज रोगों के नए जाल में फंस गए हैं। इसे वैज्ञानिकों ने पोस्ट कोविड सिंड्रोम का नाम दिया है। इसमें रोगी कोरोना से ठीक होने के बाद कई अन्य बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं, जिनमें कुछ मैटाबोलिक बीमारियों होती हैं जो ठीक नहीं होती उनका मैनेजमेंट करना पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पोस्ट कोविड सिंड्रोम में रोगी को डायबिटीज, गुर्दा रोग, लीवर रोग, न्यूरो की बीमारी, मानसिक रोग, हाईपरटेंशन, सांस की नली में एलर्जी, दमा का रोग हो रहा है। मानसिक रोग, उठते बैठते में दिमाग सुन्न हो जाता है और सीमर क्रेटेनिन बढ़ जाता है। बहुत से मरीज ऐसे हैं जिन्हें ब्लड शुगर नहीं था, लेकिन अब ब्लड शुगर की चपेट में आ गए हैं।
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यह है सिंड्रोम
सिंड्रोम बीमारियों के गुच्छे को कहते हैं। जब रोगी एक साथ हार्ट, गुर्दा, लीवर, न्यूरो की बीमारियों की चपेट में आता है तो उसे सिंड्रोम कहते हैं। अभी तक दुनिया में दो सिंड्रोम आए हैं, जिनमें एक एक्स और दूसरा वाई सिंड्रोम है। अब यह तीसरा है जिसे पोस्ट कोविड सिंड्रोम नाम दिया गया है।
रोगियों यह होती है परेशानी
सांस फूलना, चक्कर आना, पेशाब में दिक्कत, बार-बार डायरिया, बेहद कमजोरी महसूस करना, ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल न होना, रक्त की सीआरपी समेत विभिन्न जांचों में गड़बड़ी, पल्स रेट अधिक रहना, बीपी तेजी से ऊपर नीचे होना, भूख न लगना, याददाश्त में गड़बड़ी, अवसाद बना रहना।
स्वास्थ्य विभाग ने तलाशे 850 मरीज
स्वास्थ्य विभाग पोस्ट कोविड सिंड्रोम में फंसे करीब 850 लोगों का पता लगा चुका है। इन मरीजों के उपचार के साथ साथ मॉनीटरिंग भी की जा रही है। बहुत से मरीज प्राइवेट अस्पतालों में भी उपचार पा रहे हैं।
जिला अस्पताल में बनाया वार्ड, रोजाना पहुंच रहे मरीज
दस्तोई रोड स्थित जिला अस्पताल में पोस्ट कोविड वार्ड बनाया गया है। जहां ईएनटी विशेषज्ञों के साथ ही अन्य चिकित्सक इस तरह के मरीजों का उपचार कर रहे हैं। रोजाना अस्पताल में 20 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। सीएमओ ने ऐसे मरीजों की काउंसलिंग के भी निर्देश दिए हैं।
मोहल्ला श्रीनगर निवासी रोहताश ने बताया कि कोरोना होने के बाद ब्लड शुगर अनियंत्रित हो गया है। काफी प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यह नियंत्रण में नहीं आ पा रहा है। पहले उन्हें इस तरह की कोई बीमारी नहीं थी, अब डॉक्टर इस बीमारी से बचने के लिए नियमित दवाओं के सेवन की बात कह रहे हैं। उन्होंने परिवार को भी इस बीमारी के बारे में नहीं बताया है।
राजीव विहार निवासी 48 वर्षीय उर्मिला ने बताया कि कोरोना होने के बाद से बीपी की समस्या बढ़ गई है। सिर में दर्द रहता है, याददाश्त भी कमजोर हो गई है। कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद से यह समस्या शुरू हुई हैं। अब वह उपचार करा रही हैं, कोरोना के बाद से स्वस्थ होने पर भी काफी परेशान हैं। उन्हें काफी तकलीफ है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रेखा शर्मा ने बताया कि कोरोना से उबरे लोगों में बहुत से पोस्ट कोविड सिंड्रोम के शिकार हुए हैं। इनके लिए जिला अस्पताल में वार्ड बनाया गया है, जहां उपचार कराया जा रहा है। ऐसे मरीजों को काउंसलिंग की भी जरूरत हैं, प्रत्येक मरीज की मॉनीटरिंग कराई जा रही है।
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हापुड़। कोरोना की दूसरी लहर संक्रमित मरीजों को ऐसा घाव देकर गई है, जिसे वह जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। हापुड़ के करीब 850 लोग पोस्ट कोविड सिंड्रोम में फंस गए हैं। रोगियों को इन बीमारियों के साथ पूरी जिंदगी जीना पड़ सकता है। एहतियातन जिला अस्पताल में पोस्ट कोविड वार्ड बनाया गया है, जहां रोजाना मरीज पहुंच रहे हैं। पहचाने गए मरीजों की मॉनीटरिंग का निर्णय विभागीय अफसरों ने लिया है। इन लोगों की काउंसिलिंग भी कराई जा रही है।
जिले में कोरोना के मरीजों को उपचार देने के लिए अस्पतालों को तीन श्रेणियों में बांटा गया था। इसमें जो मरीज लेवल एक व लेवल दो श्रेणी में रहकर ही ठीक हो गए वह तो सामान्य जिंदगी की तरफ लौट रहे हैं। लेकिन जिनका संक्रमण लेवल अधिक हो गया था, उनमें बहुत से मरीज ठीक तो हो गए हैं लेकिन करीब 850 मरीज रोगों के नए जाल में फंस गए हैं। इसे वैज्ञानिकों ने पोस्ट कोविड सिंड्रोम का नाम दिया है। इसमें रोगी कोरोना से ठीक होने के बाद कई अन्य बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं, जिनमें कुछ मैटाबोलिक बीमारियों होती हैं जो ठीक नहीं होती उनका मैनेजमेंट करना पड़ता है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि पोस्ट कोविड सिंड्रोम में रोगी को डायबिटीज, गुर्दा रोग, लीवर रोग, न्यूरो की बीमारी, मानसिक रोग, हाईपरटेंशन, सांस की नली में एलर्जी, दमा का रोग हो रहा है। मानसिक रोग, उठते बैठते में दिमाग सुन्न हो जाता है और सीमर क्रेटेनिन बढ़ जाता है। बहुत से मरीज ऐसे हैं जिन्हें ब्लड शुगर नहीं था, लेकिन अब ब्लड शुगर की चपेट में आ गए हैं।
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यह है सिंड्रोम
सिंड्रोम बीमारियों के गुच्छे को कहते हैं। जब रोगी एक साथ हार्ट, गुर्दा, लीवर, न्यूरो की बीमारियों की चपेट में आता है तो उसे सिंड्रोम कहते हैं। अभी तक दुनिया में दो सिंड्रोम आए हैं, जिनमें एक एक्स और दूसरा वाई सिंड्रोम है। अब यह तीसरा है जिसे पोस्ट कोविड सिंड्रोम नाम दिया गया है।
रोगियों यह होती है परेशानी
सांस फूलना, चक्कर आना, पेशाब में दिक्कत, बार-बार डायरिया, बेहद कमजोरी महसूस करना, ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल न होना, रक्त की सीआरपी समेत विभिन्न जांचों में गड़बड़ी, पल्स रेट अधिक रहना, बीपी तेजी से ऊपर नीचे होना, भूख न लगना, याददाश्त में गड़बड़ी, अवसाद बना रहना।
स्वास्थ्य विभाग ने तलाशे 850 मरीज
स्वास्थ्य विभाग पोस्ट कोविड सिंड्रोम में फंसे करीब 850 लोगों का पता लगा चुका है। इन मरीजों के उपचार के साथ साथ मॉनीटरिंग भी की जा रही है। बहुत से मरीज प्राइवेट अस्पतालों में भी उपचार पा रहे हैं।
जिला अस्पताल में बनाया वार्ड, रोजाना पहुंच रहे मरीज
दस्तोई रोड स्थित जिला अस्पताल में पोस्ट कोविड वार्ड बनाया गया है। जहां ईएनटी विशेषज्ञों के साथ ही अन्य चिकित्सक इस तरह के मरीजों का उपचार कर रहे हैं। रोजाना अस्पताल में 20 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। सीएमओ ने ऐसे मरीजों की काउंसलिंग के भी निर्देश दिए हैं।
मोहल्ला श्रीनगर निवासी रोहताश ने बताया कि कोरोना होने के बाद ब्लड शुगर अनियंत्रित हो गया है। काफी प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यह नियंत्रण में नहीं आ पा रहा है। पहले उन्हें इस तरह की कोई बीमारी नहीं थी, अब डॉक्टर इस बीमारी से बचने के लिए नियमित दवाओं के सेवन की बात कह रहे हैं। उन्होंने परिवार को भी इस बीमारी के बारे में नहीं बताया है।
राजीव विहार निवासी 48 वर्षीय उर्मिला ने बताया कि कोरोना होने के बाद से बीपी की समस्या बढ़ गई है। सिर में दर्द रहता है, याददाश्त भी कमजोर हो गई है। कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद से यह समस्या शुरू हुई हैं। अब वह उपचार करा रही हैं, कोरोना के बाद से स्वस्थ होने पर भी काफी परेशान हैं। उन्हें काफी तकलीफ है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रेखा शर्मा ने बताया कि कोरोना से उबरे लोगों में बहुत से पोस्ट कोविड सिंड्रोम के शिकार हुए हैं। इनके लिए जिला अस्पताल में वार्ड बनाया गया है, जहां उपचार कराया जा रहा है। ऐसे मरीजों को काउंसलिंग की भी जरूरत हैं, प्रत्येक मरीज की मॉनीटरिंग कराई जा रही है।