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कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की तलाश में आई तेजी
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कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की तलाश में आई तेजी
हापुड़। कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की खोज का सिलसिला तेज हो गया है। जिले में चार दिन पहले तक ऐसे मात्र दस बच्चों की ही खोज की गई थी। लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 44 पहुंच चुकी है। ऐसे बच्चों की खोज के लिए टीमें शहर और गांवों की खाक छान रही हैं। इसी सूची बनाकर अधिकारियों को भेजी जा रही है।
कोरोना की दूसरी लहर में कई लोगों की मौत हो गई। घर तबाह हो गए और बच्चे अनाथ हो गए। कोरोना से बेसहारा हुए बच्चों को आर्थिक मदद और दूसरी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा ऐसे बच्चों की तलाश के लिए जिला प्रशासन को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन शुरूआत में ऐसे बच्चों की तलाश की रफ्तार धीमी रही और बीस दिन में मात्र दस बच्चों को ही खोजा जा सका। लेकिन अमर उजाला के इस मुहिम से जुड़ने के बाद संबंधित टीमें सक्रिय हुई हैं और बच्चों की तलाश में तेजी आई है। शनिवार तक जिले में 44 बच्चों की तलाश की जा चुकी है। इनमें 37 बच्चे ऐसे हैं, जिनमें बच्चों के माता या पिता मर चुके हैं। जबकि सात बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता और पिता में से अब कोई भी जीवित नहीं है। हालांकि इनमें से इनके माता या पिता में से किसी एक की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी। एसडीएम/ जिला प्रोवेजन अधिकारी विशाल यादव ने बताया कि अभी तक 44 ऐसे बच्चों का चयन किया गया है। कोई बच्चा छूटे ना इसलिए गंभीरता से सर्वे किया जा रहा है।
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हापुड़। कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की खोज का सिलसिला तेज हो गया है। जिले में चार दिन पहले तक ऐसे मात्र दस बच्चों की ही खोज की गई थी। लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 44 पहुंच चुकी है। ऐसे बच्चों की खोज के लिए टीमें शहर और गांवों की खाक छान रही हैं। इसी सूची बनाकर अधिकारियों को भेजी जा रही है।
कोरोना की दूसरी लहर में कई लोगों की मौत हो गई। घर तबाह हो गए और बच्चे अनाथ हो गए। कोरोना से बेसहारा हुए बच्चों को आर्थिक मदद और दूसरी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा ऐसे बच्चों की तलाश के लिए जिला प्रशासन को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन शुरूआत में ऐसे बच्चों की तलाश की रफ्तार धीमी रही और बीस दिन में मात्र दस बच्चों को ही खोजा जा सका। लेकिन अमर उजाला के इस मुहिम से जुड़ने के बाद संबंधित टीमें सक्रिय हुई हैं और बच्चों की तलाश में तेजी आई है। शनिवार तक जिले में 44 बच्चों की तलाश की जा चुकी है। इनमें 37 बच्चे ऐसे हैं, जिनमें बच्चों के माता या पिता मर चुके हैं। जबकि सात बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता और पिता में से अब कोई भी जीवित नहीं है। हालांकि इनमें से इनके माता या पिता में से किसी एक की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी। एसडीएम/ जिला प्रोवेजन अधिकारी विशाल यादव ने बताया कि अभी तक 44 ऐसे बच्चों का चयन किया गया है। कोई बच्चा छूटे ना इसलिए गंभीरता से सर्वे किया जा रहा है।
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