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ग्लैंडर्स फारसी की जांच के लिए भेजे घोड़ों के सैंपल
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ग्लैंडर्स फारसी की जांच के लिए भेजे घोड़ों के सैंपल
हापुड़। गांव झड़ीना में दो घोड़ों में ग्लैंडर्स फारसी रोग की पुष्टि को लेकर अभी अधिकारियों में संशय है। क्योंकि इनमें ग्लैंडर्स जैसा कोई लक्षण नहीं दिखाई दे रहा है, वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। हालांकि सोमवार को सैंपल फिर से मंडलीय लैब भेजे गए हैं। जिनसे 10-12 दिन में आने वाली जांच ही घोड़ों की जिंदगी और मौत तय करेगी। फिलहाल दोनों को अन्य पशुओं से अलग आइसोलेट कर दिया गया है।
पशुपालन विभाग द्वारा नियमित सैंपलिंग के दौरान ईंट भट्टे पर काम करने वाले झड़ीना गांव से दो घोड़ों के सैंपल जांच को हिसार लैब भेजे गए थे। जिनकी रिपोर्ट में ग्लैंडर्स फारसी रोग की पुष्टि होने पर अफरातफरी मच गई। क्योंकि यह बीमारी लाइलाज होती है, घोड़ों को मारना ही इस बीमारी का समाधान है।
हालांकि पशुपालन विभाग के अफसरों का दावा है कि ग्लैंडर्स बीमारी होने पर घोड़ों में तेज बुखार, शरीर में गांठ, नाक से पीला द्रव जाना मुख्य लक्षण होता है, लेकिन इन घोड़ों में कोई भी ऐसा लक्षण नहीं है। ऐसे में संभावना यह भी हो सकती है कि लैब में सैंपल मिक्स हो गए हों, या किसी अन्य जिले के सैंपल की रिपोर्ट यहां भेज दी गई हो।
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बहरहाल, एहतियातन दोनों घोड़ों को आइसोलेट कर, इनके सैंपल सोमवार को जांच के लिए मंडलीय लैब भेज दिए हैं, जहां से सैंपलों को हिसार भेजा जाएगा। पशुपालन विभाग के अधिकारियों की मानें तो 10-12 दिन में इन सैंपल की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो जाएगी। यही रिपोर्ट घोड़ों की जिंदगी, मौत को तय करेगी। वहीं, घोड़ों का मालिक इस बीमारी को लेकर काफी मायूस है क्योंकि घोड़ों से ही उसके घर का खर्च चल रहा है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.प्रमोद कुमार ने बताया कि दोनों घोड़े पूरी तरह स्वस्थ हैं। दोबारा सैंपल जांच को भेज दिए गए हैं। फिर भी बीमारी को लेकर पूरी सतर्कता बरती जा रही है।
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हापुड़। गांव झड़ीना में दो घोड़ों में ग्लैंडर्स फारसी रोग की पुष्टि को लेकर अभी अधिकारियों में संशय है। क्योंकि इनमें ग्लैंडर्स जैसा कोई लक्षण नहीं दिखाई दे रहा है, वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। हालांकि सोमवार को सैंपल फिर से मंडलीय लैब भेजे गए हैं। जिनसे 10-12 दिन में आने वाली जांच ही घोड़ों की जिंदगी और मौत तय करेगी। फिलहाल दोनों को अन्य पशुओं से अलग आइसोलेट कर दिया गया है।
पशुपालन विभाग द्वारा नियमित सैंपलिंग के दौरान ईंट भट्टे पर काम करने वाले झड़ीना गांव से दो घोड़ों के सैंपल जांच को हिसार लैब भेजे गए थे। जिनकी रिपोर्ट में ग्लैंडर्स फारसी रोग की पुष्टि होने पर अफरातफरी मच गई। क्योंकि यह बीमारी लाइलाज होती है, घोड़ों को मारना ही इस बीमारी का समाधान है।
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हालांकि पशुपालन विभाग के अफसरों का दावा है कि ग्लैंडर्स बीमारी होने पर घोड़ों में तेज बुखार, शरीर में गांठ, नाक से पीला द्रव जाना मुख्य लक्षण होता है, लेकिन इन घोड़ों में कोई भी ऐसा लक्षण नहीं है। ऐसे में संभावना यह भी हो सकती है कि लैब में सैंपल मिक्स हो गए हों, या किसी अन्य जिले के सैंपल की रिपोर्ट यहां भेज दी गई हो।
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बहरहाल, एहतियातन दोनों घोड़ों को आइसोलेट कर, इनके सैंपल सोमवार को जांच के लिए मंडलीय लैब भेज दिए हैं, जहां से सैंपलों को हिसार भेजा जाएगा। पशुपालन विभाग के अधिकारियों की मानें तो 10-12 दिन में इन सैंपल की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो जाएगी। यही रिपोर्ट घोड़ों की जिंदगी, मौत को तय करेगी। वहीं, घोड़ों का मालिक इस बीमारी को लेकर काफी मायूस है क्योंकि घोड़ों से ही उसके घर का खर्च चल रहा है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.प्रमोद कुमार ने बताया कि दोनों घोड़े पूरी तरह स्वस्थ हैं। दोबारा सैंपल जांच को भेज दिए गए हैं। फिर भी बीमारी को लेकर पूरी सतर्कता बरती जा रही है।