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अचार-मुरब्बों में खोजी आत्मनिर्भरता
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जब कुछ करने की ठान ली जाए तो रास्ते खुद ब खुद मिलने लगते हैं। कई कठिनाइयों में भी दिशा मिल जाती है। ऐसा ही कुछ कर गुजरने और खुद को साबित करने के लिए एक समूह बनाया है गांव तिगरी की महिलाओं ने।
यूं तो अचार-मुरब्बा बनाना कोई नई बात नहीं है लेकिन जब हजारों लोगों के रोजगार छिनने वाले इस काल में जाने कितने ही लोग अपने भाग्य को दोषी मानकर घर में निराश होकर बैठे हैं। ऐसे में अपनी आजीविका और आत्मनिर्भरता के लिए खुद का रोजगार पैदा करने वाली गांव की कम पढ़ी लिखी महिलाएं अन्य लोगों के लिए नजीर ही हैं। तिगरी गांव की महिलाओं ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत एक समूह बनाया है, जिसमें वह तरह-तरह के अचार और मुरब्बे बनाती हैं। इससे उन्हें रोजगार मिलता है। खास बात ये है कि अपने बनाए उत्पादों के प्रचार के लिए वे दूसरों पर निर्भर नहीं है। बल्कि समूह की कुछ महिलाएं खुद ही मार्केटिंग की बारीकियां सीख रहीं हैं, ताकि वह अपने द्वारा बनाए उत्पादों को सही दामों पर आसानी से बेच सकें और प्रचार कर सकें। युवा भी इस समूह से सीख ले रहे हैं।
इस समूह से जुड़ी महिलाओं ने बताया कि अपने घरों पर ही दर्जनों प्रकार के आचार, जिसमें आम, नींबू, मूली, गाजर, गोभी, अदरक, लहसुन आदि तैयार कर रही हैं। साथ ही आंवला का मुरब्बा भी बना रही हैं। इनकी बिक्री के लिए इस समूह से ही कुछ महिलाएं मार्केटिंग का काम देख रही हैं, जो बाजारों में जाकर होटल, दुकान आदि से ऑर्डर लेने का प्रयास करती हैं। यह महिलाएं ऐसे लोगों के लिए नजीर बनी हुई हैं, जो बेरोजगारी को लेकर दूसरों को दोष देने में लगे रहते हैं। अचार, मुरब्बा के साथ ही अब यह समूह अन्य क्षेत्रों में भी काम करेगा, ताकि अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिल सके।
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यूं तो अचार-मुरब्बा बनाना कोई नई बात नहीं है लेकिन जब हजारों लोगों के रोजगार छिनने वाले इस काल में जाने कितने ही लोग अपने भाग्य को दोषी मानकर घर में निराश होकर बैठे हैं। ऐसे में अपनी आजीविका और आत्मनिर्भरता के लिए खुद का रोजगार पैदा करने वाली गांव की कम पढ़ी लिखी महिलाएं अन्य लोगों के लिए नजीर ही हैं। तिगरी गांव की महिलाओं ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत एक समूह बनाया है, जिसमें वह तरह-तरह के अचार और मुरब्बे बनाती हैं। इससे उन्हें रोजगार मिलता है। खास बात ये है कि अपने बनाए उत्पादों के प्रचार के लिए वे दूसरों पर निर्भर नहीं है। बल्कि समूह की कुछ महिलाएं खुद ही मार्केटिंग की बारीकियां सीख रहीं हैं, ताकि वह अपने द्वारा बनाए उत्पादों को सही दामों पर आसानी से बेच सकें और प्रचार कर सकें। युवा भी इस समूह से सीख ले रहे हैं।
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इस समूह से जुड़ी महिलाओं ने बताया कि अपने घरों पर ही दर्जनों प्रकार के आचार, जिसमें आम, नींबू, मूली, गाजर, गोभी, अदरक, लहसुन आदि तैयार कर रही हैं। साथ ही आंवला का मुरब्बा भी बना रही हैं। इनकी बिक्री के लिए इस समूह से ही कुछ महिलाएं मार्केटिंग का काम देख रही हैं, जो बाजारों में जाकर होटल, दुकान आदि से ऑर्डर लेने का प्रयास करती हैं। यह महिलाएं ऐसे लोगों के लिए नजीर बनी हुई हैं, जो बेरोजगारी को लेकर दूसरों को दोष देने में लगे रहते हैं। अचार, मुरब्बा के साथ ही अब यह समूह अन्य क्षेत्रों में भी काम करेगा, ताकि अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिल सके।
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