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दुष्कर्म के दोषी को 10 वर्ष का कारावास
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दुष्कर्म के दोषी को 10 वर्ष का कारावास
हापुड़। थाना बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव निवासी एक युवक द्वारा 14 वर्षीय नाबालिग को अगवा कर उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में दोषी करार दिया। एडीजे पॉक्सो एफटीसी बीना नारायण ने 10 वर्ष का सश्रम कारावास और विभिन्न धाराओं में दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अर्थदंड की 80 प्रतिशत राशि पीड़िता के माता-पिता को दिलाने और एक लाख रुपये की आर्थिक मदद पीड़िता को पुर्नवास के लिए दिलाने के आदेश दिए हैं।
विशेष लोक अभियोजक, विशेष अधिवक्ता (पॉक्सो) हरेंद्र त्यागी ने बताया कि एक व्यक्ति ने 25 अक्तूबर 2013 को थाने में तहरीर देते हुए कहा कि वह और उसकी पत्नी जंगल में गए हुए थे और बच्चे स्कूल गए थे। घर पर उसकी 14 वर्षीय पुत्री अकेली थी। इसी दौरान गांव निवासी कलुवा पुत्र बिसम्बर उसके घर पहुंचा और उसकी पुत्री को अगवा कर ले गया। जब वह जंगल से लौटे तो देखा कि उनकी पुत्री घर नहीं है, जिसके बाद कुछ लोगों ने बताया कि उसकी पुत्री कलुवा पुत्र बिसम्बर के साथ गई है। पुलिस ने उसकी रिपोर्ट दर्ज करते हुए पुत्री को बरामद किया और उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस मामले में सुनाई के बाद एडीजे पॉक्सो विशेष न्यायाधीश बीना नारायण ने आरोपी कलुवा को दोषी मानते हुए 210 वर्ष का सश्रम कारावास और दो लाख रुपये का अर्थदंड लगाया। इसके अलावा जेल में बिताई समयावधि को सजा में समायोजित करने के आदेश के साथ साथ 80 प्रतिशत की राशि पीड़िता के माता-पिता को दिलाने एवं एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता विधिक सेवा प्राधिकरण से दिलाने के आदेश दिए हैं। दोषी को पुलिस ने कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया है।
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हापुड़। थाना बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव निवासी एक युवक द्वारा 14 वर्षीय नाबालिग को अगवा कर उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में दोषी करार दिया। एडीजे पॉक्सो एफटीसी बीना नारायण ने 10 वर्ष का सश्रम कारावास और विभिन्न धाराओं में दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अर्थदंड की 80 प्रतिशत राशि पीड़िता के माता-पिता को दिलाने और एक लाख रुपये की आर्थिक मदद पीड़िता को पुर्नवास के लिए दिलाने के आदेश दिए हैं।
विशेष लोक अभियोजक, विशेष अधिवक्ता (पॉक्सो) हरेंद्र त्यागी ने बताया कि एक व्यक्ति ने 25 अक्तूबर 2013 को थाने में तहरीर देते हुए कहा कि वह और उसकी पत्नी जंगल में गए हुए थे और बच्चे स्कूल गए थे। घर पर उसकी 14 वर्षीय पुत्री अकेली थी। इसी दौरान गांव निवासी कलुवा पुत्र बिसम्बर उसके घर पहुंचा और उसकी पुत्री को अगवा कर ले गया। जब वह जंगल से लौटे तो देखा कि उनकी पुत्री घर नहीं है, जिसके बाद कुछ लोगों ने बताया कि उसकी पुत्री कलुवा पुत्र बिसम्बर के साथ गई है। पुलिस ने उसकी रिपोर्ट दर्ज करते हुए पुत्री को बरामद किया और उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस मामले में सुनाई के बाद एडीजे पॉक्सो विशेष न्यायाधीश बीना नारायण ने आरोपी कलुवा को दोषी मानते हुए 210 वर्ष का सश्रम कारावास और दो लाख रुपये का अर्थदंड लगाया। इसके अलावा जेल में बिताई समयावधि को सजा में समायोजित करने के आदेश के साथ साथ 80 प्रतिशत की राशि पीड़िता के माता-पिता को दिलाने एवं एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता विधिक सेवा प्राधिकरण से दिलाने के आदेश दिए हैं। दोषी को पुलिस ने कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया है।
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