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हापुड़ की गुड़ गल्ला मंडी एक सप्ताह तक रहेगी बंद
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मंडी में रखा नया गुड़
- फोटो : HAPUR
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मंडी-विकास शुल्क के विरोध में आज से हड़ताल पर रहेंगे आढ़ती
हापुड़। देश में दूसरे नंबर की सबड़े बड़ी हापुड़ की गुड़ गल्ला मंडी सोमवार से सात दिन तक बंद रहेगी। मंडी और विकास शुल्क के विरोध में समूचे उत्तर प्रदेश के साथ ही यहां के आढ़तियों ने भी हड़ताल रखने का एलान कर दिया है। श्राद्ध के बाद जिले में 60 से अधिक क्रेशर चालू हो चुके हैं, ऐसे में उनका चक्का भी जाम हो जाएगा।
हापुड़ की मंडी में आने वाला गुड़ देशभर के लोगों को अधिक भाता है। यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष स्थानीय गुड़ मंडी में करोड़ों का कारोबार होता है। बीते वर्ष पर गौर करें तो प्रति दिन यहां की मंडी में लाखों रुपये का कारोबार हुआ था।
इस वर्ष जिले में गन्ने की अच्छी पैदावार है, इसलिए गुड़ कारोबारी मंडी में पिछले साल से अधिक गुड़ के कारोबार का अंदेशा जता रहे हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में मंडी शुल्क के नाम पर 2.5 फीसदी व विकास शुल्क के नाम पर .50 फीसदी टैक्स लिया जाता है। जबकि अन्य राज्यों में विकास शुल्क को घटाकर .35 फीसदी तक कर दिया गया है। हापुड़ में गुड़ गल्ला व्यापार मंडी के अध्यक्ष संजीव कुमार के नेतृत्व में आढ़तियों ने मंडी में हड़ताल करने का एलान कर दिया है। आढ़तियों का कहना है कि जब तक मंडी व विकास शुल्क में कमी नहीं होगी तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
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बता दें कि हापुड़ में श्राद्ध के बाद क्रेशरों को चालू कर दिया गया है, मंडी में गुड़ की आपूर्ति भी हो रही है। ऐसे में सात दिवसीय हड़ताल से जहां क्रेशरों का चक्का घूमना बंद हो जाएगा, वहीं सरकार को भी राजस्व की हानि होगी और नकद पैसों की चाह में क्रेशरों पर गन्ना डालने वाले किसानों को भी नुकसान होगा।
गुड़ गल्ला मंडी में प्रतिदिन 40 लाख का हो रहा कारोबार
हापुड़। हापुड़ की गुड़ गल्ला मंडी में फिलहाल गुड़ की आवक शुरू हुई है। इन दिनों प्रतिदिन करीब 30-40 लाख रुपये का कारोबार हो रहा है। पीक समय पर यह कारोबार प्रतिदिन करीब एक करोड़ से अधिक का होता है। ऐसे में सात दिन मंडी बंद रहने से राजस्व का भी काफी नुकसान होगा।
-इन राज्यों में है हापुड़ के गुड़ की डिमांड-
देशभर में हापुड़ गुड़ मंडी ऐसे ही शुमार नहीं है, यहां का गुड़ देशभर में अपनी छाप छोड़ता है। यूपी समेत गुजरात, बिहार, बंगाल, आसाम, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र में हापुड़ के गुड़ का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है।
गन्ना भुगतान न होने से कोल्हूओं की तरफ रुझान-
वैसे तो कोल्हूओं पर किसान का गन्ना शुगर मिल से कम दाम पर खरीदा जाता है। लेकिन शुगर मिल से समय पर उन्हें गन्ने का भुगतान नहीं मिल पाता। जबकि कोल्हूओं पर नकद भुगतान मिल जाता है। ऐसे में किसानों का रुझान कोल्हूओं की ओर बढ़ रहा है।
-कई जिलों का गुड़ पहुंच रहा हापुड़ मंडी-
हापुड़ गुड़ मंडी में हापुड़, मेरठ, बुलंदशहर, अमरोहा जिले का बड़े पैमाने पर गुड़ आता है, इन चारों जिलों में ही सर्वाधिक कोल्हू और क्रेशर स्थापित हैं, जो बेरोजगारों को भी रोजगार का सृजन करा रहे हैं।
-क्या कहते हैं गुड़ कारोबारी-
हापुड़ गुड़ गल्ला व्यापार मंडी के अध्यक्ष संजीव कुमार आढ़ वालों ने बताया समूचे उत्तर प्रदेश की गुड़ मंडियों में हड़ताल का एलान किया गया है। हापुड़ में भी 21 से 26 सितंबर तक मंडी को बंद रखा जाएगा। सरकार को उनके हितों का ध्यान रखना चाहिए।--फोटो संख्या-15
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हापुड़। देश में दूसरे नंबर की सबड़े बड़ी हापुड़ की गुड़ गल्ला मंडी सोमवार से सात दिन तक बंद रहेगी। मंडी और विकास शुल्क के विरोध में समूचे उत्तर प्रदेश के साथ ही यहां के आढ़तियों ने भी हड़ताल रखने का एलान कर दिया है। श्राद्ध के बाद जिले में 60 से अधिक क्रेशर चालू हो चुके हैं, ऐसे में उनका चक्का भी जाम हो जाएगा।
हापुड़ की मंडी में आने वाला गुड़ देशभर के लोगों को अधिक भाता है। यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष स्थानीय गुड़ मंडी में करोड़ों का कारोबार होता है। बीते वर्ष पर गौर करें तो प्रति दिन यहां की मंडी में लाखों रुपये का कारोबार हुआ था।
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इस वर्ष जिले में गन्ने की अच्छी पैदावार है, इसलिए गुड़ कारोबारी मंडी में पिछले साल से अधिक गुड़ के कारोबार का अंदेशा जता रहे हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में मंडी शुल्क के नाम पर 2.5 फीसदी व विकास शुल्क के नाम पर .50 फीसदी टैक्स लिया जाता है। जबकि अन्य राज्यों में विकास शुल्क को घटाकर .35 फीसदी तक कर दिया गया है। हापुड़ में गुड़ गल्ला व्यापार मंडी के अध्यक्ष संजीव कुमार के नेतृत्व में आढ़तियों ने मंडी में हड़ताल करने का एलान कर दिया है। आढ़तियों का कहना है कि जब तक मंडी व विकास शुल्क में कमी नहीं होगी तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
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बता दें कि हापुड़ में श्राद्ध के बाद क्रेशरों को चालू कर दिया गया है, मंडी में गुड़ की आपूर्ति भी हो रही है। ऐसे में सात दिवसीय हड़ताल से जहां क्रेशरों का चक्का घूमना बंद हो जाएगा, वहीं सरकार को भी राजस्व की हानि होगी और नकद पैसों की चाह में क्रेशरों पर गन्ना डालने वाले किसानों को भी नुकसान होगा।
गुड़ गल्ला मंडी में प्रतिदिन 40 लाख का हो रहा कारोबार
हापुड़। हापुड़ की गुड़ गल्ला मंडी में फिलहाल गुड़ की आवक शुरू हुई है। इन दिनों प्रतिदिन करीब 30-40 लाख रुपये का कारोबार हो रहा है। पीक समय पर यह कारोबार प्रतिदिन करीब एक करोड़ से अधिक का होता है। ऐसे में सात दिन मंडी बंद रहने से राजस्व का भी काफी नुकसान होगा।
-इन राज्यों में है हापुड़ के गुड़ की डिमांड-
देशभर में हापुड़ गुड़ मंडी ऐसे ही शुमार नहीं है, यहां का गुड़ देशभर में अपनी छाप छोड़ता है। यूपी समेत गुजरात, बिहार, बंगाल, आसाम, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र में हापुड़ के गुड़ का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है।
गन्ना भुगतान न होने से कोल्हूओं की तरफ रुझान-
वैसे तो कोल्हूओं पर किसान का गन्ना शुगर मिल से कम दाम पर खरीदा जाता है। लेकिन शुगर मिल से समय पर उन्हें गन्ने का भुगतान नहीं मिल पाता। जबकि कोल्हूओं पर नकद भुगतान मिल जाता है। ऐसे में किसानों का रुझान कोल्हूओं की ओर बढ़ रहा है।
-कई जिलों का गुड़ पहुंच रहा हापुड़ मंडी-
हापुड़ गुड़ मंडी में हापुड़, मेरठ, बुलंदशहर, अमरोहा जिले का बड़े पैमाने पर गुड़ आता है, इन चारों जिलों में ही सर्वाधिक कोल्हू और क्रेशर स्थापित हैं, जो बेरोजगारों को भी रोजगार का सृजन करा रहे हैं।
-क्या कहते हैं गुड़ कारोबारी-
हापुड़ गुड़ गल्ला व्यापार मंडी के अध्यक्ष संजीव कुमार आढ़ वालों ने बताया समूचे उत्तर प्रदेश की गुड़ मंडियों में हड़ताल का एलान किया गया है। हापुड़ में भी 21 से 26 सितंबर तक मंडी को बंद रखा जाएगा। सरकार को उनके हितों का ध्यान रखना चाहिए।--फोटो संख्या-15