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नगर शिक्षा अधिकारी कार्यालय के कर्मचारी ने आरटीई में प्रवेश दिलाने के नाम पर ऐंठे हजारों
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आरटीई में प्रवेश के नाम पर शिक्षा विभाग के बाबू ने की अवैध वसूली
हापुड़। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत नगर शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी द्वारा दो अभिभावकों से 18 हजार रुपये वसूलने का मामला प्रकाश में आया है। तीन महीने बाद भी प्रवेश न मिलने पर अभिभावकों ने सख्ती की तो कर्मचारी ने चेक बनाकर उन्हें सौंप दिए। लेकिन बैंक में दोनों ही चेक बाउंस हो गए। पीड़ितों ने पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराकर कार्रवाई की मांग उठाई है।
गांव मंसूरपुर निवासी सोनू व हापुड़ निवासी सचिन कुमार ने बताया कि उन्होंने अपने व परिचितों के बच्चों का आरटीई के तहत कांवेंट स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदन कराया था। लेकिन पात्रता सूची में छात्रों के नाम नहीं आ सके। इसकी जानकारी करने जब वह नगर शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में पहुंचे तो वहां तैनात एक कर्मचारी ने उन्हें झांसे में ले लिया।
सचिन से 13 हजार व सोनू से 6 हजार रुपये लेकर उनके बच्चों के प्रवेश दिलाने की बात कही। दोनों ने कुल 19 हजार रुपये उक्त कर्मचारी को दे दिए। लेकिन तीन महीने बाद भी छात्रों का प्रवेश नहीं हो सका। इसके विरोध में जब वह कर्मचारी के पास पहुंचे और पैसे मांगे तो उनके साथ अभद्रता की गई। इतना ही नहीं कर्मचारी ने चेक बनाकर उन्हें दे दिया।
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आरोप है कि जब चेक बैंक में लगाए गए तो वह बाउंस हो गए। इस मामले की शिकायत पीड़ितों ने जन सुनवाई पोर्टल पर की है। जिससे बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र गुप्ता का कहना है कि मामला गंभीर है, जिसकी जांच करायी जा रही है। दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
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हापुड़। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत नगर शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी द्वारा दो अभिभावकों से 18 हजार रुपये वसूलने का मामला प्रकाश में आया है। तीन महीने बाद भी प्रवेश न मिलने पर अभिभावकों ने सख्ती की तो कर्मचारी ने चेक बनाकर उन्हें सौंप दिए। लेकिन बैंक में दोनों ही चेक बाउंस हो गए। पीड़ितों ने पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराकर कार्रवाई की मांग उठाई है।
गांव मंसूरपुर निवासी सोनू व हापुड़ निवासी सचिन कुमार ने बताया कि उन्होंने अपने व परिचितों के बच्चों का आरटीई के तहत कांवेंट स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदन कराया था। लेकिन पात्रता सूची में छात्रों के नाम नहीं आ सके। इसकी जानकारी करने जब वह नगर शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में पहुंचे तो वहां तैनात एक कर्मचारी ने उन्हें झांसे में ले लिया।
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सचिन से 13 हजार व सोनू से 6 हजार रुपये लेकर उनके बच्चों के प्रवेश दिलाने की बात कही। दोनों ने कुल 19 हजार रुपये उक्त कर्मचारी को दे दिए। लेकिन तीन महीने बाद भी छात्रों का प्रवेश नहीं हो सका। इसके विरोध में जब वह कर्मचारी के पास पहुंचे और पैसे मांगे तो उनके साथ अभद्रता की गई। इतना ही नहीं कर्मचारी ने चेक बनाकर उन्हें दे दिया।
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आरोप है कि जब चेक बैंक में लगाए गए तो वह बाउंस हो गए। इस मामले की शिकायत पीड़ितों ने जन सुनवाई पोर्टल पर की है। जिससे बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र गुप्ता का कहना है कि मामला गंभीर है, जिसकी जांच करायी जा रही है। दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।