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हापुड़ के अधिवक्ता निजेन्द्र बने एडीजे
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हापुड़ के अधिवक्ता निजेन्द्र बने एडीजे
हापुड़। कचहरी में एक अधिवक्ता का मुंशी बनकर कैरियर की शुरूआत करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता निजेन्द्र कुमार प्रजापति उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण कर एडीजे बन गए हैं। परीक्षा परिणाम आने के बाद उन्हें लगातार बधाइयां मिल रही हैं।
हापुड़ तहसील के गांव अनवरपुर के मूल निवासी निजेन्द्र प्रजापति एक साधारण गरीब परिवार में पले पढ़े। उन्होंने हाई स्कूल और इंटर की परीक्षा पिलखुवा के सर्वोदय इंटर कालेज से उत्तीर्ण की थी।
उनका कहना है कि इंटर पास करने के बाद अवकाश के दिनों में वह हापुड़ के एक अधिवक्ता के पास बतौर मुंशी काम करने लगे। तभी उन्हें आगे बढ़ने की ललक लगी। उन्होंने बीए और एमए अंग्रेजी प्राइवेट पास की। जबकि 2002 से 2005 तक दिल्ली यूनिवर्सिटी से एलएलबी की। और इसके बाद से हापुड़ कचहरी के चैम्बर 116 सी में बैठकर प्रैक्टिस करते हुए प्राइवेट एलएलएम की।
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इतना ही नहीं फिलहाल वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पीएचडी भी कर रहे हैं। उनकी गिनती आजकल हापुड़ के नामचीन अधिवक्ताओं में है लेकिन उनका स्वभाव काफी सरल है।
अपनी नियुक्ति के बारे में उनका कहना है कि अब तक वह पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए मुकदमे लड़ते थे। अब उन्हें लोगों को न्याय देने का मौका मिलेगा जिस पर वह खरा उतरने का हर संभव प्रयास करेंगे।
उल्लेखनीय है कि उन्होंने शादी के बाद अपनी पत्नी कमलेश को भी एलएलबी कराई है और वह भी अब वकालत करने लगी हैं। जबकि उनके परिवार में एक बेटा है।
निजेन्द्र के एडीजे बनने पर हापुड़ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मपाल सिंह, सचिव संजीव त्यागी, मूलचंद शर्मा, उनके जूनियर राजीव चौधरी एडवोकेट, लच्छू सिंह प्रजापति, मनीष राय, रूपक शर्मा, अमित नागर, नागेन्द्र शर्मा आदिम ने हर्ष व्यक्त करते हुए बधाई दी और कहा कि उन्होंने हापुड़ जिले का नाम रोशन कर दिया है।
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हापुड़। कचहरी में एक अधिवक्ता का मुंशी बनकर कैरियर की शुरूआत करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता निजेन्द्र कुमार प्रजापति उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण कर एडीजे बन गए हैं। परीक्षा परिणाम आने के बाद उन्हें लगातार बधाइयां मिल रही हैं।
हापुड़ तहसील के गांव अनवरपुर के मूल निवासी निजेन्द्र प्रजापति एक साधारण गरीब परिवार में पले पढ़े। उन्होंने हाई स्कूल और इंटर की परीक्षा पिलखुवा के सर्वोदय इंटर कालेज से उत्तीर्ण की थी।
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उनका कहना है कि इंटर पास करने के बाद अवकाश के दिनों में वह हापुड़ के एक अधिवक्ता के पास बतौर मुंशी काम करने लगे। तभी उन्हें आगे बढ़ने की ललक लगी। उन्होंने बीए और एमए अंग्रेजी प्राइवेट पास की। जबकि 2002 से 2005 तक दिल्ली यूनिवर्सिटी से एलएलबी की। और इसके बाद से हापुड़ कचहरी के चैम्बर 116 सी में बैठकर प्रैक्टिस करते हुए प्राइवेट एलएलएम की।
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इतना ही नहीं फिलहाल वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पीएचडी भी कर रहे हैं। उनकी गिनती आजकल हापुड़ के नामचीन अधिवक्ताओं में है लेकिन उनका स्वभाव काफी सरल है।
अपनी नियुक्ति के बारे में उनका कहना है कि अब तक वह पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए मुकदमे लड़ते थे। अब उन्हें लोगों को न्याय देने का मौका मिलेगा जिस पर वह खरा उतरने का हर संभव प्रयास करेंगे।
उल्लेखनीय है कि उन्होंने शादी के बाद अपनी पत्नी कमलेश को भी एलएलबी कराई है और वह भी अब वकालत करने लगी हैं। जबकि उनके परिवार में एक बेटा है।
निजेन्द्र के एडीजे बनने पर हापुड़ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मपाल सिंह, सचिव संजीव त्यागी, मूलचंद शर्मा, उनके जूनियर राजीव चौधरी एडवोकेट, लच्छू सिंह प्रजापति, मनीष राय, रूपक शर्मा, अमित नागर, नागेन्द्र शर्मा आदिम ने हर्ष व्यक्त करते हुए बधाई दी और कहा कि उन्होंने हापुड़ जिले का नाम रोशन कर दिया है।