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गंगानगरी में मैया के जयकारों की गूंज, श्रद्धालुओं का उमड़ा हुजूम
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गढ़ गंगा मेले में घाट पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब।
- फोटो : GARH
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गंगानगरी में मैया के जयकारों की गूंज, श्रद्धालुओं का उमड़ा हुजूम
गढ़मुक्तेश्वर। देवोत्थान एकादशी के पावन अवसर पर खादर मेले और ब्रजघाट में श्रद्धालुओं में उत्साह, उमंग और आस्था दिखाई दी। दस लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और भगवान शालिग्राम तथा तुलसी के विवाह की धार्मिक परंपरा का निर्वहन कर पुण्यलाभ कमाया।
गंगा खादर क्षेत्र में चल रहे पौराणिक व एतिहासिक कार्तिक पूर्णिमा स्नान मेले में छठ, गोपाष्टमी और आंवला नवमी के बाद शुक्रवार को एक ओर महत्वपूर्ण पर्व देवोत्थान एकादशी पर्व मनाया गया। देवोत्थान एकादशी पर 8 लाख से भी अधिक भक्तों ने खादर मेले में आस्था की डुबकी लगाई। वहीं गंगानगरी ब्रजघाट में भी करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया। इसके बाद पुरोहितों से भगवान विष्णु और तुलसी के विवाह की कथा सुनकर उन्हें दक्षिणा दी। इस दौरान गन्ना, शकरकंद, सिंघाड़ा, मूंगफली, मूली समेत विभिन्न प्रकार की सामग्री से पूजा अर्चना भी की गई। खादर मेले में महिलाओं ने पूजा अर्चना कर भगवान शालिग्राम और तुलसी के विवाह की रस्म भी की।
पंडित उमेश सेनरा ने बताया कि श्रावणी मास की शुक्ल पक्ष देवशयनी एकादशी को भगवान विष्णु क्षीर सागर में चले जाते हैं, जिससे इस दौरान मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को सूर्य नारायण भगवान विष्णु क्षीर सागर से जाग जाते हैं, जिन्होंने इस दिन सर्वप्रथम तुलसी से विवाह रचाया था। जो भक्त इस दिन भगवान विष्णु और तुलसी के विवाह की रस्म निभाते हैं, वे पापों से मुक्त होकर सुख-शांति और मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं।
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गढ़मुक्तेश्वर। देवोत्थान एकादशी के पावन अवसर पर खादर मेले और ब्रजघाट में श्रद्धालुओं में उत्साह, उमंग और आस्था दिखाई दी। दस लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और भगवान शालिग्राम तथा तुलसी के विवाह की धार्मिक परंपरा का निर्वहन कर पुण्यलाभ कमाया।
गंगा खादर क्षेत्र में चल रहे पौराणिक व एतिहासिक कार्तिक पूर्णिमा स्नान मेले में छठ, गोपाष्टमी और आंवला नवमी के बाद शुक्रवार को एक ओर महत्वपूर्ण पर्व देवोत्थान एकादशी पर्व मनाया गया। देवोत्थान एकादशी पर 8 लाख से भी अधिक भक्तों ने खादर मेले में आस्था की डुबकी लगाई। वहीं गंगानगरी ब्रजघाट में भी करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया। इसके बाद पुरोहितों से भगवान विष्णु और तुलसी के विवाह की कथा सुनकर उन्हें दक्षिणा दी। इस दौरान गन्ना, शकरकंद, सिंघाड़ा, मूंगफली, मूली समेत विभिन्न प्रकार की सामग्री से पूजा अर्चना भी की गई। खादर मेले में महिलाओं ने पूजा अर्चना कर भगवान शालिग्राम और तुलसी के विवाह की रस्म भी की।
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पंडित उमेश सेनरा ने बताया कि श्रावणी मास की शुक्ल पक्ष देवशयनी एकादशी को भगवान विष्णु क्षीर सागर में चले जाते हैं, जिससे इस दौरान मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को सूर्य नारायण भगवान विष्णु क्षीर सागर से जाग जाते हैं, जिन्होंने इस दिन सर्वप्रथम तुलसी से विवाह रचाया था। जो भक्त इस दिन भगवान विष्णु और तुलसी के विवाह की रस्म निभाते हैं, वे पापों से मुक्त होकर सुख-शांति और मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं।

गढ़ कार्तिक मेले में गंगा स्नान करते श्रद्धालु।- फोटो : GARH

गंगा स्नान के दौरान जयघोष लगाते श्रद्धालु।- फोटो : GARH

गढ़ गंगा मेले में बसी तंबु नगरी।- फोटो : GARH

गढ़ मेले में लगाई गई शिक्षा विभाग द्वारा प्रदर्शनी।- फोटो : GARH
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