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कर्ज में डूबी गढ़ नगर पालिका, विकास कार्य भी अटके
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गढ़ नगर पालिका कार्यालय।
- फोटो : GARH
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कर्ज में डूबी गढ़ नगर पालिका, विकास कार्य भी अटके
गढ़मुक्तेश्वर। आमदनी अठन्नी खर्चा रुपया जैसे हालत गढ़ नगर पालिका में देखने को मिल रहे हैं, क्योंकि नगर पालिका पर आय का कोई खास माध्यम नहीं है और महंगाई बढ़ने के कारण हर माह खर्चे बढ़ते जा रहे हैं। क्षेत्र के विकास कार्य भी बजट न होने के चलते प्रभावित हो रहे हैं।
शहर के विकास का जिम्मा नगर पालिका पर होता है। लेकिन बजट के अभाव में विकास कार्य रुके हुए हैं। बता दें कि राज्य वित्त आयोग द्वारा जो बजट मिलता है वह अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन देने में खत्म हो जाता है। नगर पालिका में नियमित, शासन संविदा, आउटसोर्स मिलाकर कुल 268 अधिकारी/कर्मचारी तैनात हैं। हर माह राज्य वित्त से मिलने वाली धनराशि से इन्हें वेतन व मानदेय दिया जाता है।
इसके अलावा नगर पालिका की गृह और जलकर की बात की जाए तो अधिकारियों की लापरवाही के चलते इसका लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पा रहा है।
यह भुगतान भी अटके
नियमित कर्मचारियों का एरियर, अर्जित अवकाश, चिकित्सा प्रतिपूर्ति मिलाकर नगर पालिका पर करीब 20 लाख रुपये का कर्ज है।
हर माह हो रहा लाखों का खर्चा
- डीजल पर करीब 4 लाख, पेंशन धारक 20 लाख, अधिकारी कर्मचारी वेतन 60 लाख समेत अन्य खर्चे भी शामिल हैं।
बजट न होने के कारण रुके विकास कार्य
शहर में कई ऐसे बड़े कार्य हैं, जो प्रस्तावों में उलझे हुए हैं। लेकिन बजट न होने के कारण विकास कार्य शुरू नहीं हुए हैं। पिछले तीन चार साल में जो विकास कार्य ठेकेदारों द्वारा किए गए हैं, उनका भी ढाई से तीन करोड़ रुपये भुगतान अटका हुआ है। नगर के कई गली मोहल्ले ऐसे हैं, जिनके रास्ते क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन बजट न होने के कारण इनका निर्माण नहीं हो पाया है।
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कोट-
गृह और जलकर विभाग के कर्मचारियों को वसूली के सख्त निर्देश दिए हैं, वहीं ठेकेदारों का भी भुगतान किया जा रहा है। शासन को पत्र भेजकर नए प्रस्तावों का बजट पास कराकर जल्द कार्य शुरू कराया जाएगा।
- सोना सिंह, चेयरमैन नगर पालिका
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गढ़मुक्तेश्वर। आमदनी अठन्नी खर्चा रुपया जैसे हालत गढ़ नगर पालिका में देखने को मिल रहे हैं, क्योंकि नगर पालिका पर आय का कोई खास माध्यम नहीं है और महंगाई बढ़ने के कारण हर माह खर्चे बढ़ते जा रहे हैं। क्षेत्र के विकास कार्य भी बजट न होने के चलते प्रभावित हो रहे हैं।
शहर के विकास का जिम्मा नगर पालिका पर होता है। लेकिन बजट के अभाव में विकास कार्य रुके हुए हैं। बता दें कि राज्य वित्त आयोग द्वारा जो बजट मिलता है वह अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन देने में खत्म हो जाता है। नगर पालिका में नियमित, शासन संविदा, आउटसोर्स मिलाकर कुल 268 अधिकारी/कर्मचारी तैनात हैं। हर माह राज्य वित्त से मिलने वाली धनराशि से इन्हें वेतन व मानदेय दिया जाता है।
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इसके अलावा नगर पालिका की गृह और जलकर की बात की जाए तो अधिकारियों की लापरवाही के चलते इसका लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पा रहा है।
यह भुगतान भी अटके
नियमित कर्मचारियों का एरियर, अर्जित अवकाश, चिकित्सा प्रतिपूर्ति मिलाकर नगर पालिका पर करीब 20 लाख रुपये का कर्ज है।
हर माह हो रहा लाखों का खर्चा
- डीजल पर करीब 4 लाख, पेंशन धारक 20 लाख, अधिकारी कर्मचारी वेतन 60 लाख समेत अन्य खर्चे भी शामिल हैं।
बजट न होने के कारण रुके विकास कार्य
शहर में कई ऐसे बड़े कार्य हैं, जो प्रस्तावों में उलझे हुए हैं। लेकिन बजट न होने के कारण विकास कार्य शुरू नहीं हुए हैं। पिछले तीन चार साल में जो विकास कार्य ठेकेदारों द्वारा किए गए हैं, उनका भी ढाई से तीन करोड़ रुपये भुगतान अटका हुआ है। नगर के कई गली मोहल्ले ऐसे हैं, जिनके रास्ते क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन बजट न होने के कारण इनका निर्माण नहीं हो पाया है।
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कोट-
गृह और जलकर विभाग के कर्मचारियों को वसूली के सख्त निर्देश दिए हैं, वहीं ठेकेदारों का भी भुगतान किया जा रहा है। शासन को पत्र भेजकर नए प्रस्तावों का बजट पास कराकर जल्द कार्य शुरू कराया जाएगा।
- सोना सिंह, चेयरमैन नगर पालिका