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गढ़ की जनता ने दलबदलू प्रत्याशियों को नकारा
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गढ़ की जनता ने दलबदलू प्रत्याशियों को नकारा
गढ़मुक्तेश्वर। विधानसभा चुनाव में दल बदलने वाले प्रत्याशियों पर जनता ने एतबार नहीं किया। इस बार सपा छोड़कर बसपा में आए मदन चौहान को हार मिली। तो वर्ष 2012 में रविंद्र चौधरी रालोद-कांग्रेस गठबंधन से चुनाव लड़े थे। लेकिन जनता ने इन्हें नकार दिया।
गठबंधन प्रत्याशी रविंद्र चौधरी का 2012 में सपा से टिकट हो गया था, लेकिन पार्टी ने कुछ दिन बाद उनका टिकट काटकर मदन चौहान को गढ़ विधानसभा से प्रत्याशी बनाया था। टिकट कटने पर रविंद्र चौधरी ने मौका देखते हुए तुरंत ही रालोद -ांग्रेस गठबंधन से टिकट ले लिया। गढ़ विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी मदन चौहान के सामने चुनाव लड़ा। लेकिन, रविंद्र चौधरी करीब 32 हजार वोट प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रह गए। चुनाव में हार के बाद रविंद्र चौधरी आम आदमी पार्टी में पहुंच गए। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में रविंद्र चौधरी गढ़ विधानसभा में समाजवादी-रालोद से पर्चा भरकर जनता के बीच पहुंचे, लेकिन जनता ने उनका साथ नहीं दिया। चुनाव में वह दूसरे स्थान पर रहे। वहीं मदन चौहान की बात की जाए तो वह 2002 से 2012 तक सपा से गढ़ विधायक रहे, वर्ष 2017 में भी सपा के टिकट पर चुनाव लड़े। लेकिन 2022 में उनका टिकट काट दिया। टिकट कटने पर मदन चौहान ने जल्दबाजी दिखाते हुए अगले ही दिन बसपा का दामन थाम लिया। जिससे दोनों प्रत्याशियों के प्रति माहौल बदल गया और वोटरों ने दलबदलू मानते हुए नकार दिया, जिससे दोनों को हार का सामना करना पड़ा।
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गढ़मुक्तेश्वर। विधानसभा चुनाव में दल बदलने वाले प्रत्याशियों पर जनता ने एतबार नहीं किया। इस बार सपा छोड़कर बसपा में आए मदन चौहान को हार मिली। तो वर्ष 2012 में रविंद्र चौधरी रालोद-कांग्रेस गठबंधन से चुनाव लड़े थे। लेकिन जनता ने इन्हें नकार दिया।
गठबंधन प्रत्याशी रविंद्र चौधरी का 2012 में सपा से टिकट हो गया था, लेकिन पार्टी ने कुछ दिन बाद उनका टिकट काटकर मदन चौहान को गढ़ विधानसभा से प्रत्याशी बनाया था। टिकट कटने पर रविंद्र चौधरी ने मौका देखते हुए तुरंत ही रालोद -ांग्रेस गठबंधन से टिकट ले लिया। गढ़ विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी मदन चौहान के सामने चुनाव लड़ा। लेकिन, रविंद्र चौधरी करीब 32 हजार वोट प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रह गए। चुनाव में हार के बाद रविंद्र चौधरी आम आदमी पार्टी में पहुंच गए। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में रविंद्र चौधरी गढ़ विधानसभा में समाजवादी-रालोद से पर्चा भरकर जनता के बीच पहुंचे, लेकिन जनता ने उनका साथ नहीं दिया। चुनाव में वह दूसरे स्थान पर रहे। वहीं मदन चौहान की बात की जाए तो वह 2002 से 2012 तक सपा से गढ़ विधायक रहे, वर्ष 2017 में भी सपा के टिकट पर चुनाव लड़े। लेकिन 2022 में उनका टिकट काट दिया। टिकट कटने पर मदन चौहान ने जल्दबाजी दिखाते हुए अगले ही दिन बसपा का दामन थाम लिया। जिससे दोनों प्रत्याशियों के प्रति माहौल बदल गया और वोटरों ने दलबदलू मानते हुए नकार दिया, जिससे दोनों को हार का सामना करना पड़ा।
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