{"_id":"61e30909eed1b75c275ab737","slug":"hapur-news-garh-news-gbd2327456170","type":"story","status":"publish","title_hn":"1985 में सिर्फ 80 हजार रुपये खर्च कर बाबू कनक सिंह बने थे विधायक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
1985 में सिर्फ 80 हजार रुपये खर्च कर बाबू कनक सिंह बने थे विधायक
विज्ञापन
गढ़ विधानसभा क्षेत्र के सिंभावली में चुनाव के दौरान भाषण देते पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह। फाइल फो?
- फोटो : GARH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
1985 में 80 हजार रुपये खर्च कर बाबू कनक सिंह बने थे विधायक
गढ़मुक्तेश्वर। विधानसभा क्षेत्र के गांव हरौड़ा निवासी बाबू कनक सिंह क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं। 1985 में हुए विधानसभा चुनाव में केवल 80 हजार रुपये खर्च कर विधायक बने थे। उस दौरान चौधरी चरण सिंह की दलित मजदूर किसान पार्टी ने टिकट दिया था, उस समय बाबू कनक सिंह ने 4130 वोटों से कांग्रेस के कुंवर वीरेंद्र सिंह ढाना को हराया था।
आज के समय की बात की जाए तो नगर पालिका सभासद के चुनाव में प्रत्याशी को लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। लेकिन करीब चार दशक पूर्व की बात करें तो विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी को लाखों नहीं हजारों की धनराशि खर्च करनी पड़ती थी। सिंभावली ब्लॉक के गांव हरौड़ा निवासी बाबू कनक सिंह ने दलित मजदूर किसान पार्टी से चुनाव लड़ा था। उन्होंने बताया कि उस समय पर चुनाव में प्रचार प्रसार के लिए कोई फालतू खर्चा नहीं हुआ करता था। चुनाव में केवल 80 हजार रुपये खर्च हुए थे। जनता के दिए सहयोग में से 45 हजार रुपये बच भी गए थे। इस दौरान विधायक बनने के बाद बाबू कनक सिंह ने सिंभावली में कन्या इंटर कॉलेज और किसान डिग्री कॉलेज समेत गढ़ क्षेत्र में कई गांवों के लिए लिंक मार्गों की सौगात दी थी। बिना किसी काफिले के एक ही अपनी निजी कार एंबेसडर से विधायक का कार्यकाल पूर्ण किया।
जन सहयोग से लड़ा जाता था चुनाव
पूर्व विधायक बाबू कनक सिंह ने बताया कि जब वह गांवों में वोट मांगने के लिए जाते थे, तो कई गांवों के लोग चुनाव लड़ाने के लिए आशीर्वाद के साथ आर्थिक सहयोग भी देते थे।
विज्ञापन
साइकिल और ट्रैक्टर पर करते थे प्रचार
बाबू कनक सिंह ने बताया कि जब वह विधायक का चुनाव लड़ रहे थे, तो उनके समर्थक साइकिल और ट्रैक्टर ट्रॉली से सवार होकर पूरे गढ़ विधानसभा क्षेत्र में घूम लिया करते थे, लेकिन आज स्थिति विपरीत है।
अब होने लगे फालतू खर्चे
पहले के मुकाबले यदि आज के समय की बात की जाए तो प्रत्याशी टिकट होते ही फालतू खर्चों के चक्कर में पड़ जाता है। जैसे शराब, सुबह से लेकर शाम तक खान पीना, वोट के लिए घर-घर उपहार समेत अन्य फिजूलखर्ची पर ध्यान देता है। लेकिन पहले चुनावों में सिर्फ प्रत्याशी की इमानदार छवि और सामाजिकता के आधार पर पार्टियां टिकट देती थीं, लेकिन अब धन और जाति-धर्म के आधार पर टिकट दिया जाता है।
-चौधरी चरण सिंह नजदीक रहे बाबू कनक सिंह
बाबू कनक सिंह ने बताया कि वह पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह के काफी नजदीक थे, जिसको लेकर उन्हें गढ़ विधानसभा से चुनाव लड़ने का मौका मिला था।
बाबू कनक सिंह का राजनीतिक सफर
- 1980 में सिंभावली कॉओपरेटिव सोसायटी के चेयरमैन बने
- दस वर्ष तक किसान डिग्री कॉलेज के चेयरमैन रहे
(संवाद)
विज्ञापन
गढ़मुक्तेश्वर। विधानसभा क्षेत्र के गांव हरौड़ा निवासी बाबू कनक सिंह क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं। 1985 में हुए विधानसभा चुनाव में केवल 80 हजार रुपये खर्च कर विधायक बने थे। उस दौरान चौधरी चरण सिंह की दलित मजदूर किसान पार्टी ने टिकट दिया था, उस समय बाबू कनक सिंह ने 4130 वोटों से कांग्रेस के कुंवर वीरेंद्र सिंह ढाना को हराया था।
आज के समय की बात की जाए तो नगर पालिका सभासद के चुनाव में प्रत्याशी को लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। लेकिन करीब चार दशक पूर्व की बात करें तो विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी को लाखों नहीं हजारों की धनराशि खर्च करनी पड़ती थी। सिंभावली ब्लॉक के गांव हरौड़ा निवासी बाबू कनक सिंह ने दलित मजदूर किसान पार्टी से चुनाव लड़ा था। उन्होंने बताया कि उस समय पर चुनाव में प्रचार प्रसार के लिए कोई फालतू खर्चा नहीं हुआ करता था। चुनाव में केवल 80 हजार रुपये खर्च हुए थे। जनता के दिए सहयोग में से 45 हजार रुपये बच भी गए थे। इस दौरान विधायक बनने के बाद बाबू कनक सिंह ने सिंभावली में कन्या इंटर कॉलेज और किसान डिग्री कॉलेज समेत गढ़ क्षेत्र में कई गांवों के लिए लिंक मार्गों की सौगात दी थी। बिना किसी काफिले के एक ही अपनी निजी कार एंबेसडर से विधायक का कार्यकाल पूर्ण किया।
विज्ञापन
जन सहयोग से लड़ा जाता था चुनाव
पूर्व विधायक बाबू कनक सिंह ने बताया कि जब वह गांवों में वोट मांगने के लिए जाते थे, तो कई गांवों के लोग चुनाव लड़ाने के लिए आशीर्वाद के साथ आर्थिक सहयोग भी देते थे।
विज्ञापन
साइकिल और ट्रैक्टर पर करते थे प्रचार
बाबू कनक सिंह ने बताया कि जब वह विधायक का चुनाव लड़ रहे थे, तो उनके समर्थक साइकिल और ट्रैक्टर ट्रॉली से सवार होकर पूरे गढ़ विधानसभा क्षेत्र में घूम लिया करते थे, लेकिन आज स्थिति विपरीत है।
अब होने लगे फालतू खर्चे
पहले के मुकाबले यदि आज के समय की बात की जाए तो प्रत्याशी टिकट होते ही फालतू खर्चों के चक्कर में पड़ जाता है। जैसे शराब, सुबह से लेकर शाम तक खान पीना, वोट के लिए घर-घर उपहार समेत अन्य फिजूलखर्ची पर ध्यान देता है। लेकिन पहले चुनावों में सिर्फ प्रत्याशी की इमानदार छवि और सामाजिकता के आधार पर पार्टियां टिकट देती थीं, लेकिन अब धन और जाति-धर्म के आधार पर टिकट दिया जाता है।
-चौधरी चरण सिंह नजदीक रहे बाबू कनक सिंह
बाबू कनक सिंह ने बताया कि वह पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह के काफी नजदीक थे, जिसको लेकर उन्हें गढ़ विधानसभा से चुनाव लड़ने का मौका मिला था।
बाबू कनक सिंह का राजनीतिक सफर
- 1980 में सिंभावली कॉओपरेटिव सोसायटी के चेयरमैन बने
- दस वर्ष तक किसान डिग्री कॉलेज के चेयरमैन रहे
(संवाद)

सिंभावली क्षेत्र में पूर्व पीएम के स्वागत के दौरान मौजूद पूर्व विधायक बाबू कनक सिंह। फाइल फोटो- फोटो : GARH

पूर्व विधायक बाबू कनक सिंह- फोटो : GARH