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सिंभावली शुगर मिल पर किसानों का 380 करोड़ बकाया
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सिंभावली में नेशनल हाईवे पर स्थित शुगर मिल।
- फोटो : GARH
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सिंभावली शुगर मिल पर किसानों का 380 करोड़ बकाया
गढ़मुक्तेश्वर। सिंभावली चीनी मिल ने पिछले पेराई सत्र का भुगतान नहीं किया, वहीं अब नए सत्र में भी मिल 275 करोड़ रुपये का गन्ना खरीद चुका है। सिंभावली मिल पर वर्तमान में 380 करोड़ रुपये गन्ने का भुगतान बकाया है। भुगतान न मिलने से किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उन्हें घरों का खर्च चलाने के लिए कोल्हुओं पर सस्ते दामों में गन्ना बेचना पड़ रहा है।
सिंभावली चीनी मिल का नवीन पेराई सत्र 8 नवंबर को चालू हुआ है। 21 दिसंबर तक मिल प्रबंधन द्वारा किसानों से 275 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा जा चुका है। नए पेराई सत्र के भुगतान की बात तो दूर, अभी तक मिल प्रबंधन ने पिछले पेराई सत्र का भी पूरा भुगतान नहीं किया है। सिंभावली मिल ने 15 मार्च 2021 तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान ही किसानों को किया है। इस कारण 2020-21 के पेराई सत्र का ही अभी तक 105 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है। वहीं नए सत्र का 275 करोड़ और बकाया है।
किसानों को लेना पड़ रहा उधार
सिंभावली शुगर मिल प्रबंधन पर न्यायालय और शासन के आदेशों का भी कोई असर नहीं हो रहा। ब्याज मिलना तो दूर उनके गन्ने का ही पूरा भुगतान नहीं मिल पा रहा। मिल किसानों का कर्जदार है। वहीं किसानों को अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए ब्याज पर कर्जा लेना पड़ रहा है। - कुशलपाल आर्य, राष्ट्रीय सचिव भाकियू
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भुगतान करे मिल, नहीं तो होगा घेराव
स्थानीय प्रशासन द्वारा मिल प्रबंधन के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। यदि मिल प्रबंधन द्वारा जल्द से जल्द गत वर्ष का भुगतान कर नए पेराई सत्र का भुगतान शुरू नहीं किया गया, तो किसानों को साथ लेकर मिल का घेराव किया जाएगा। - ईश्वर त्यागी, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान संगठन
जल्द कराएंगे भुगतान
सिंभावली गन्ना समिति प्रभारी सचिव राकेश पटेल का कहना है कि मिल पर किसानों का गन्ना भुगतान करने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। चीनी बिक्री का 85 प्रतिशत किसानों के खातों में भेजा जाता है। वहीं शासन द्वारा शुगर मिल को दी जाने वाली करीब 50 करोड़ सब्सिडी मिलते ही उससे भी बकाया भुगतान दिया जाएगा।
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गढ़मुक्तेश्वर। सिंभावली चीनी मिल ने पिछले पेराई सत्र का भुगतान नहीं किया, वहीं अब नए सत्र में भी मिल 275 करोड़ रुपये का गन्ना खरीद चुका है। सिंभावली मिल पर वर्तमान में 380 करोड़ रुपये गन्ने का भुगतान बकाया है। भुगतान न मिलने से किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उन्हें घरों का खर्च चलाने के लिए कोल्हुओं पर सस्ते दामों में गन्ना बेचना पड़ रहा है।
सिंभावली चीनी मिल का नवीन पेराई सत्र 8 नवंबर को चालू हुआ है। 21 दिसंबर तक मिल प्रबंधन द्वारा किसानों से 275 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा जा चुका है। नए पेराई सत्र के भुगतान की बात तो दूर, अभी तक मिल प्रबंधन ने पिछले पेराई सत्र का भी पूरा भुगतान नहीं किया है। सिंभावली मिल ने 15 मार्च 2021 तक खरीदे गए गन्ने का भुगतान ही किसानों को किया है। इस कारण 2020-21 के पेराई सत्र का ही अभी तक 105 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है। वहीं नए सत्र का 275 करोड़ और बकाया है।
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किसानों को लेना पड़ रहा उधार
सिंभावली शुगर मिल प्रबंधन पर न्यायालय और शासन के आदेशों का भी कोई असर नहीं हो रहा। ब्याज मिलना तो दूर उनके गन्ने का ही पूरा भुगतान नहीं मिल पा रहा। मिल किसानों का कर्जदार है। वहीं किसानों को अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए ब्याज पर कर्जा लेना पड़ रहा है। - कुशलपाल आर्य, राष्ट्रीय सचिव भाकियू
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भुगतान करे मिल, नहीं तो होगा घेराव
स्थानीय प्रशासन द्वारा मिल प्रबंधन के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। यदि मिल प्रबंधन द्वारा जल्द से जल्द गत वर्ष का भुगतान कर नए पेराई सत्र का भुगतान शुरू नहीं किया गया, तो किसानों को साथ लेकर मिल का घेराव किया जाएगा। - ईश्वर त्यागी, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान संगठन
जल्द कराएंगे भुगतान
सिंभावली गन्ना समिति प्रभारी सचिव राकेश पटेल का कहना है कि मिल पर किसानों का गन्ना भुगतान करने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। चीनी बिक्री का 85 प्रतिशत किसानों के खातों में भेजा जाता है। वहीं शासन द्वारा शुगर मिल को दी जाने वाली करीब 50 करोड़ सब्सिडी मिलते ही उससे भी बकाया भुगतान दिया जाएगा।