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सालारपुर-शरीफाबाद में एक माह में 12 मौत, फिर भी जांच न दवाई
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सालारपुर-शरीफाबाद में एक माह में 12 मौत, फिर भी जांच न दवाई
गढ़मुक्तेश्वर। तहसील क्षेत्र के गांव सालारपुर-शरीफाबाद में एक माह में बुखार व अन्य बीमारियों के चलते 12 लोगों की मौत हो चुकी है। जिसमें महिलाएं, वृद्ध और युवा भी शामिल हैं। वर्तमान में भी एक युवक कोरोना संक्रमित है, जिसका आईसोलेशन सेंटर में उपचार चल रहा है।
करीब ढाई हजार की आबादी वाले गांव सालारपुर-शरीफाबाद में इस समय बुखार व अन्य संक्रामक बीमारियों का भी प्रकोप फैला हुआ है। इसके बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा ना तो कोविड जांच कैंप लगाया है और ना ही ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच कर दवाईयों का वितरण कराया गया। ग्रामीणों के अनुसार बाहर से आए एक युवक की कोविड जांच पॉजिटिव मिलने के चलते उसे हापुड़ के आइसोलेशन सेंटर में भर्ती कराया हुआ है।
गांव से सात किलोमीटर दूर है सीएचसी
गांव में कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है, जिसके चलते बीमारों को उपचार के लिए या तो निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है, या फिर गांव से सात किलोमीटर दूर गढ़ सीएचसी आना पड़ता है। लेकिन सीएचसी में इस समय ओपीडी बंद हैं, तो केवल निजी चिकित्सक ही मरीजों का सहारा हैं। खांसी-जुकाम और बुखार होने पर भी ग्रामीण दहशत में आ रहे हैं।
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नहीं लग सकी कोरोना वैक्सीन
45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों व बुजुर्गों को कोविड वैक्सीनेशन के लिए भी गढ़ सीएचसी में आना ही मजबूरी बनी हुई है, जिसके चलते केवल कुछ लोगों का ही टीकाकरण संभव हो सका है।
अपनी याद में ऐसा मंजर नहीं देखा
मेरी उम्र 90 वर्ष के आसपास है, अपनी याद में कभी ऐसा मंजर नहीं देखा। हैजे की महामारी के दौरान लोग एक दूसरे की मदद के लिए तैयार रहते थे। लेकिन इस महामारी ने लोगों को एक दूसरे से दूर कर दिया। -हरिओम शर्मा, ग्रामीण
सभी समझें जिम्मेदारी, तभी रोकथाम संभव
लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। सरकार ने दुकानें केवल जरूरत का सामान खरीदने के लिए खोली हैं, इसलिए बाजारों में भीड़ न लगाएं और केवल बहुत आवश्यकता पड़ने पर ही घर से बाहर निकले। -सुभाष, ग्रामीण
स्वास्थ्य विभाग कराए वैक्सीनेशन
बुजुर्गों का इस समय सात-आठ किलोमीटर का सफर तय करके सीएचसी जाना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग को गांवों में ही जांच और वैक्सीनेशन कराना चाहिए। गांव में सफाई और सैनिटाइजेशन कराया जा रहा है। -अमित चौहान, ग्राम प्रधान
गांवों में कैंप लगाकर हो रही जांच
गांवों में कैंप लगाकर जांच व वैक्सीनेशन आरंभ कर दिया गया है। क्षेत्र के गांव दौताई में कैंप लगाया गया है। सीएचसी में आने वाले सभी गांवों में कैंप लगाकर कोविड जांच और वैक्सीनेशन कराया जाएगा।-डॉ. दिनेश भारती, सीएचसी अधीक्षक, गढ़
अधिक मृत्युदर वाले गांवों में जांच पहले
विधानसभा क्षेत्र में कई गांव ऐसे हैं, जहां मृत्युदर अधिक है। सबसे पहले उन गांवों में कैंप लगाने का लगाकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच कराई जा रही हैं। यदि किसी भी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी कोई भी परेशानी है, तो सरकारी अस्पताल में जांच कराएं। -डॉ. कमल सिंह मलिक, विधायक
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एक माह में गांव में हुई मौत का विवरण
नाम पिता/पति का नाम उम्र(करीब)
संतोष महेश 60 वर्ष
समंत्रा ब्रजपाल 80 वर्ष
ओमकार गोदी 65 वर्ष
कृष्णा देवी फकीरचंद 80 वर्ष
वीरवती रामचंद्र 80 वर्ष
सुरेश छिद्दा सिंह 63 वर्ष
उमेश देवी गंगाधर 60 वर्ष
अवनीश सागर सिह 40 वर्ष
नैपाल हरपाल सिंह 40 वर्ष
गन्नू हरबंश 70 वर्ष
जिले सिंह रिसाल सिंह 55 वर्ष
माया देवी प्रकाश 65 वर्ष
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गढ़मुक्तेश्वर। तहसील क्षेत्र के गांव सालारपुर-शरीफाबाद में एक माह में बुखार व अन्य बीमारियों के चलते 12 लोगों की मौत हो चुकी है। जिसमें महिलाएं, वृद्ध और युवा भी शामिल हैं। वर्तमान में भी एक युवक कोरोना संक्रमित है, जिसका आईसोलेशन सेंटर में उपचार चल रहा है।
करीब ढाई हजार की आबादी वाले गांव सालारपुर-शरीफाबाद में इस समय बुखार व अन्य संक्रामक बीमारियों का भी प्रकोप फैला हुआ है। इसके बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा ना तो कोविड जांच कैंप लगाया है और ना ही ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच कर दवाईयों का वितरण कराया गया। ग्रामीणों के अनुसार बाहर से आए एक युवक की कोविड जांच पॉजिटिव मिलने के चलते उसे हापुड़ के आइसोलेशन सेंटर में भर्ती कराया हुआ है।
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गांव से सात किलोमीटर दूर है सीएचसी
गांव में कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है, जिसके चलते बीमारों को उपचार के लिए या तो निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है, या फिर गांव से सात किलोमीटर दूर गढ़ सीएचसी आना पड़ता है। लेकिन सीएचसी में इस समय ओपीडी बंद हैं, तो केवल निजी चिकित्सक ही मरीजों का सहारा हैं। खांसी-जुकाम और बुखार होने पर भी ग्रामीण दहशत में आ रहे हैं।
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नहीं लग सकी कोरोना वैक्सीन
45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों व बुजुर्गों को कोविड वैक्सीनेशन के लिए भी गढ़ सीएचसी में आना ही मजबूरी बनी हुई है, जिसके चलते केवल कुछ लोगों का ही टीकाकरण संभव हो सका है।
अपनी याद में ऐसा मंजर नहीं देखा
मेरी उम्र 90 वर्ष के आसपास है, अपनी याद में कभी ऐसा मंजर नहीं देखा। हैजे की महामारी के दौरान लोग एक दूसरे की मदद के लिए तैयार रहते थे। लेकिन इस महामारी ने लोगों को एक दूसरे से दूर कर दिया। -हरिओम शर्मा, ग्रामीण
सभी समझें जिम्मेदारी, तभी रोकथाम संभव
लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। सरकार ने दुकानें केवल जरूरत का सामान खरीदने के लिए खोली हैं, इसलिए बाजारों में भीड़ न लगाएं और केवल बहुत आवश्यकता पड़ने पर ही घर से बाहर निकले। -सुभाष, ग्रामीण
स्वास्थ्य विभाग कराए वैक्सीनेशन
बुजुर्गों का इस समय सात-आठ किलोमीटर का सफर तय करके सीएचसी जाना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग को गांवों में ही जांच और वैक्सीनेशन कराना चाहिए। गांव में सफाई और सैनिटाइजेशन कराया जा रहा है। -अमित चौहान, ग्राम प्रधान
गांवों में कैंप लगाकर हो रही जांच
गांवों में कैंप लगाकर जांच व वैक्सीनेशन आरंभ कर दिया गया है। क्षेत्र के गांव दौताई में कैंप लगाया गया है। सीएचसी में आने वाले सभी गांवों में कैंप लगाकर कोविड जांच और वैक्सीनेशन कराया जाएगा।-डॉ. दिनेश भारती, सीएचसी अधीक्षक, गढ़
अधिक मृत्युदर वाले गांवों में जांच पहले
विधानसभा क्षेत्र में कई गांव ऐसे हैं, जहां मृत्युदर अधिक है। सबसे पहले उन गांवों में कैंप लगाने का लगाकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच कराई जा रही हैं। यदि किसी भी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी कोई भी परेशानी है, तो सरकारी अस्पताल में जांच कराएं। -डॉ. कमल सिंह मलिक, विधायक
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एक माह में गांव में हुई मौत का विवरण
नाम पिता/पति का नाम उम्र(करीब)
संतोष महेश 60 वर्ष
समंत्रा ब्रजपाल 80 वर्ष
ओमकार गोदी 65 वर्ष
कृष्णा देवी फकीरचंद 80 वर्ष
वीरवती रामचंद्र 80 वर्ष
सुरेश छिद्दा सिंह 63 वर्ष
उमेश देवी गंगाधर 60 वर्ष
अवनीश सागर सिह 40 वर्ष
नैपाल हरपाल सिंह 40 वर्ष
गन्नू हरबंश 70 वर्ष
जिले सिंह रिसाल सिंह 55 वर्ष
माया देवी प्रकाश 65 वर्ष