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जलस्तर में गिरावट के बीच संक्रामक बीमारियों का बढ़ा खतरा
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ब्रजघाट में गंगा जल स्तर घटा।
- फोटो : GARH
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जलस्तर में गिरावट के बीच संक्रामक बीमारियों का बढ़ा खतरा
गढ़मुक्तेश्वर। गंगा के जलस्तर में गिरावट के बीच संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। खादर क्षेत्र में आबादी के पास और जंगलों में अभी भी पानी भरा हुआ है। इसके चलते क्षेत्र में मच्छर-मक्खियों का प्रकोप बढ़ गया है। बीते 24 घंटे में गंगा के जलस्तर में दस सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई।
पिछले चार दिनों से जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी होने के चलते गढ़-ब्रजघाट क्षेत्र में गंगा उफान की तरफ बढ़ रही थी। जंगल के साथ ही आबादी में भी गंगा का पानी पहुंचने के चलते बाढ़ की आशंका बनी हुई थी। जिसे लेकर ग्रामीणों ने पलायन की तैयारी शुरू कर दी थी। लेकिन शनिवार की देर शाम से लेकर रविवार की शाम तक गंगा जलस्तर में 10 सेंटीमीटर की गिरावट हुई। जिससे गंगा का उफान कुछ हद तक थमता दिखाई दिया। जलस्तर में गिरावट से खादर क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीणों और प्रशासन ने बाढ़ का खतरा टलने से राहत की सांस ली है। लेकिन अभी जंगलों और आबादी के निकट भरा पानी कम न होने के कारण ग्रामीणों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जंगलों से पानी कम न होने के कारण चारे की किल्लत कम नहीं हो रही। वहीं आवागमन में भी परेशानी हो रही है।
आबादी में रुके पानी ने बढ़ाई समस्या
- ग्रामीणों का कहना है कि आबादी और जंगलों में रूका हुआ पानी परेशानी और बढ़ा रहा है। रूके पानी से बदबू उठने लगी है, वहीं मच्छर और मक्खियों का प्रकोप भी बढ़ रहा है। जिसके चलते गांवों में ग्रामीणों समेत पशुओं में भी संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मौसम में वायरल, डेंगू जैसी बीमारी फैलने का डर सता रहा है। वहीं सीएचसी अधीक्षक डॉ. दिनेश भारती का कहना है कि खादर क्षेत्र के गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंचकर ग्रामीणों की जांच कर रही है।
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बिजनौर बैराज से छोड़ा गया पानी
- केंद्रीय जल आयोग के सूत्रों के अनुसार रविवार को 10 सेंटीमीटर की गिरावट होने से गंगा जलस्तर 198.51 मीटर(समुद्र तल से) पर पहुंच गया है। बिजनौर बैराज से रविवार को भी 58 हजार 612 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिससे जलस्तर पर विशेष अंतर नहीं पड़ेगा।
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गढ़मुक्तेश्वर। गंगा के जलस्तर में गिरावट के बीच संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। खादर क्षेत्र में आबादी के पास और जंगलों में अभी भी पानी भरा हुआ है। इसके चलते क्षेत्र में मच्छर-मक्खियों का प्रकोप बढ़ गया है। बीते 24 घंटे में गंगा के जलस्तर में दस सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई।
पिछले चार दिनों से जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी होने के चलते गढ़-ब्रजघाट क्षेत्र में गंगा उफान की तरफ बढ़ रही थी। जंगल के साथ ही आबादी में भी गंगा का पानी पहुंचने के चलते बाढ़ की आशंका बनी हुई थी। जिसे लेकर ग्रामीणों ने पलायन की तैयारी शुरू कर दी थी। लेकिन शनिवार की देर शाम से लेकर रविवार की शाम तक गंगा जलस्तर में 10 सेंटीमीटर की गिरावट हुई। जिससे गंगा का उफान कुछ हद तक थमता दिखाई दिया। जलस्तर में गिरावट से खादर क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीणों और प्रशासन ने बाढ़ का खतरा टलने से राहत की सांस ली है। लेकिन अभी जंगलों और आबादी के निकट भरा पानी कम न होने के कारण ग्रामीणों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जंगलों से पानी कम न होने के कारण चारे की किल्लत कम नहीं हो रही। वहीं आवागमन में भी परेशानी हो रही है।
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आबादी में रुके पानी ने बढ़ाई समस्या
- ग्रामीणों का कहना है कि आबादी और जंगलों में रूका हुआ पानी परेशानी और बढ़ा रहा है। रूके पानी से बदबू उठने लगी है, वहीं मच्छर और मक्खियों का प्रकोप भी बढ़ रहा है। जिसके चलते गांवों में ग्रामीणों समेत पशुओं में भी संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मौसम में वायरल, डेंगू जैसी बीमारी फैलने का डर सता रहा है। वहीं सीएचसी अधीक्षक डॉ. दिनेश भारती का कहना है कि खादर क्षेत्र के गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंचकर ग्रामीणों की जांच कर रही है।
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बिजनौर बैराज से छोड़ा गया पानी
- केंद्रीय जल आयोग के सूत्रों के अनुसार रविवार को 10 सेंटीमीटर की गिरावट होने से गंगा जलस्तर 198.51 मीटर(समुद्र तल से) पर पहुंच गया है। बिजनौर बैराज से रविवार को भी 58 हजार 612 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिससे जलस्तर पर विशेष अंतर नहीं पड़ेगा।