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बाहर से आ रहे लोगों को नहीं घुसने दे रहे गांवों में-।
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बाहर से आ रहे लोगों को गांव में नहीं घुसने दे रहे
गढ़मुक्तेश्वर। कोरोना की दहशत नगरों, कस्बों समेत गांवों में पूरी तरह हावी है। इसके चलते लोग अपनों से भी परायों जैसा बर्ताव कर रहे हैं। बाहरी क्षेत्रों से घर लौट रहे लोगों को ग्रामीण गांव की सीमा में नहीं घुसने नहीं दे रहे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच के बाद ही ग्रामीण सगे संबंधियों तक को घरों में आने दे रहे हैं।
विदेशों समेत देश में कोरोना की दहशत इस कदर व्याप्त है कि लोग एक दूसरे से हाथ मिलाने, छूने और बात करने से भी कतरा रहे हैं। वहीं संक्रमण और मौत का डर लोगों से अपने परिजनों के साथ भी सौतेला व्यवहार करा रहा है। बता दें कि कोरोना के चलते कामकाज बंद होने के कारण गढ़ नगर समेत ग्रामीण क्षेत्र के ऐसे लोग जो बाहरी क्षेत्रों में कामकाज कर अपने परिवारों का पालन-पोषण कर रहे थे, अब अपने गांवों को रास्ते में परेशानियां झेलते हुए वापस लौट रहे हैं। महानगरों से गांव लौट रहे लोगों को अपने घर पहुंचकर परेशानियों के कम होने की सोच लेकर चले हैं, लेकिन अपने-अपने गांव पहुंचने के बाद ऐसे लोगों की परेशानी कम होने के बजाय बढ़ती नजर आ रही हैं। बाहरी क्षेत्रों से लौट रहे लोगों को अपनों से ही परायों जैसा बर्ताब झेलना पड़ रहा है। तहसील क्षेत्र के कई गांवों में बृहस्पतिवार की देर शाम और शुक्रवार को पहुंचे लोगों को परिजनों और ग्रामीणों ने गांव की सीमा के अंदर नहीं घुसने दिया। वहीं स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को फोन कर बाहरी क्षेत्र से आए लोगों की सूचना दी। जिसके बाद मौके पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उक्त लोगों की मॉनिटरिंग करने के बाद उनके परिजनों और ग्रामीणों को उनके स्वास्थ्य के बारे में अवगत कराया, जिसके बाद ही उन्हें गांव और घरों के अंदर आने दिया गया। बावजूद इसके बाहरी क्षेत्रों से आए लोगों से 14 दिनों तक अपने ही लोग दूरी बनाए हुए हैं।
कोट
सीएचसी अधीक्षक डॉ. दिनेश भारती ने बताया कि पिछले दो दिनों में गांव नयाबांस, सेहल, ढोलपुर, सरदपुर, भैना समेत कई गांवों के प्रधानों समेत लोगों की सूचनाएं प्राप्त हुए हैं। सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम को भेजकर बाहरी क्षेत्रों से आए लोगों की जांच कराई गई है। जिसके बाद ही ग्रामीणों ने उन्हें गांवों में घुसने दिया।
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गढ़मुक्तेश्वर। कोरोना की दहशत नगरों, कस्बों समेत गांवों में पूरी तरह हावी है। इसके चलते लोग अपनों से भी परायों जैसा बर्ताव कर रहे हैं। बाहरी क्षेत्रों से घर लौट रहे लोगों को ग्रामीण गांव की सीमा में नहीं घुसने नहीं दे रहे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच के बाद ही ग्रामीण सगे संबंधियों तक को घरों में आने दे रहे हैं।
विदेशों समेत देश में कोरोना की दहशत इस कदर व्याप्त है कि लोग एक दूसरे से हाथ मिलाने, छूने और बात करने से भी कतरा रहे हैं। वहीं संक्रमण और मौत का डर लोगों से अपने परिजनों के साथ भी सौतेला व्यवहार करा रहा है। बता दें कि कोरोना के चलते कामकाज बंद होने के कारण गढ़ नगर समेत ग्रामीण क्षेत्र के ऐसे लोग जो बाहरी क्षेत्रों में कामकाज कर अपने परिवारों का पालन-पोषण कर रहे थे, अब अपने गांवों को रास्ते में परेशानियां झेलते हुए वापस लौट रहे हैं। महानगरों से गांव लौट रहे लोगों को अपने घर पहुंचकर परेशानियों के कम होने की सोच लेकर चले हैं, लेकिन अपने-अपने गांव पहुंचने के बाद ऐसे लोगों की परेशानी कम होने के बजाय बढ़ती नजर आ रही हैं। बाहरी क्षेत्रों से लौट रहे लोगों को अपनों से ही परायों जैसा बर्ताब झेलना पड़ रहा है। तहसील क्षेत्र के कई गांवों में बृहस्पतिवार की देर शाम और शुक्रवार को पहुंचे लोगों को परिजनों और ग्रामीणों ने गांव की सीमा के अंदर नहीं घुसने दिया। वहीं स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को फोन कर बाहरी क्षेत्र से आए लोगों की सूचना दी। जिसके बाद मौके पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उक्त लोगों की मॉनिटरिंग करने के बाद उनके परिजनों और ग्रामीणों को उनके स्वास्थ्य के बारे में अवगत कराया, जिसके बाद ही उन्हें गांव और घरों के अंदर आने दिया गया। बावजूद इसके बाहरी क्षेत्रों से आए लोगों से 14 दिनों तक अपने ही लोग दूरी बनाए हुए हैं।
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सीएचसी अधीक्षक डॉ. दिनेश भारती ने बताया कि पिछले दो दिनों में गांव नयाबांस, सेहल, ढोलपुर, सरदपुर, भैना समेत कई गांवों के प्रधानों समेत लोगों की सूचनाएं प्राप्त हुए हैं। सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम को भेजकर बाहरी क्षेत्रों से आए लोगों की जांच कराई गई है। जिसके बाद ही ग्रामीणों ने उन्हें गांवों में घुसने दिया।
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