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आश्रय स्थल के बाहर नाले में गिरी गाय दिनभर तड़पती रही
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आश्रय स्थल के बाहर नाले में गिरी गाय दिनभर तड़पती रही
गढ़मुक्तेश्वर। आश्रय स्थल होने के बाद भी बेसहारा पशुओं की दुर्दशा दूर न होने से बाहर नाले में गिरी गाय दिनभर तड़पती रही। गोवंश की कोई सुध न लिए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ी।
किसानों की फसलों में बर्बादी, सड़कों पर दुर्घटना और आबादी में राहगीरों पर हमले करने वाले बेसहारा पशुओं की बढ़ती तादाद को लेकर आम जनता में खासा रोष व्याप्त हो गया था, जिसे देखते हुए प्रदेश शासन ने बेसहारा पशुओं के लिए सरकारी स्तर से आश्रय स्थल बनाकर उनमें बेसहारा पशुओं को रखने की योजना चलाई थी। जिसके तहत ग्रामीण अंचल में ग्राम पंचायत और शहर कस्बों में नगर निकायों को आश्रय स्थलों की जिम्मेदारी सौंपी हुई है। ब्रजघाट गंगानगरी में बने आश्रय स्थल में गोवंश की तादाद वर्तमान में 86 है और अभी वहां दर्जनों पशुओं को रखने की जगह बाकी बची हुई है, लेकिन इसके बाद भी गंगानगरी की आबादी से लेकर मुख्य रास्तों पर दिनभर बेसहारा पशुओं के झुंड घूमते रहते हैं। जो राहगीरों पर हमले करने के साथ ही मौका मिलते ही दुकानों से लेकर ठेली पर फल सब्जी बेचने वालों को चपत लगाते रहते हैं। जिनमें एक गाय शनिवार की सुबह आश्रय स्थल के बाहर नाले में गिर पड़ी, जो दिन भर नाले में ही तड़पती रही मगर आश्रय स्थल की देखरेख करने वाले कर्मचारी और आसपास में रहने वालों समेत राहगीरों ने भी उसे नाले से बाहर निकालने की कोई जहमत उठाना मुनासिब नहीं समझा। राजू, देवेंद्र, लखपत, अनिल, महेश का कहना है कि आश्रय स्थल की व्यवस्था होने के बाद भी गंगानगरी में बेसहारा पशुओं पर नकेल नहीं कस पा रही है।
एसडीएम राममूर्ति त्रिपाठी का कहना है कि इस संबंध में जांच पड़ताल कराकर लापरवाही बरतने वाले आश्रय स्थल के कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कराई जाएगी, जबकि गंगानगरी से जुड़े सभी बेसहारा पशुओं को आश्रय स्थल में पहुंचवाया जाएगा।
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गढ़मुक्तेश्वर। आश्रय स्थल होने के बाद भी बेसहारा पशुओं की दुर्दशा दूर न होने से बाहर नाले में गिरी गाय दिनभर तड़पती रही। गोवंश की कोई सुध न लिए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ी।
किसानों की फसलों में बर्बादी, सड़कों पर दुर्घटना और आबादी में राहगीरों पर हमले करने वाले बेसहारा पशुओं की बढ़ती तादाद को लेकर आम जनता में खासा रोष व्याप्त हो गया था, जिसे देखते हुए प्रदेश शासन ने बेसहारा पशुओं के लिए सरकारी स्तर से आश्रय स्थल बनाकर उनमें बेसहारा पशुओं को रखने की योजना चलाई थी। जिसके तहत ग्रामीण अंचल में ग्राम पंचायत और शहर कस्बों में नगर निकायों को आश्रय स्थलों की जिम्मेदारी सौंपी हुई है। ब्रजघाट गंगानगरी में बने आश्रय स्थल में गोवंश की तादाद वर्तमान में 86 है और अभी वहां दर्जनों पशुओं को रखने की जगह बाकी बची हुई है, लेकिन इसके बाद भी गंगानगरी की आबादी से लेकर मुख्य रास्तों पर दिनभर बेसहारा पशुओं के झुंड घूमते रहते हैं। जो राहगीरों पर हमले करने के साथ ही मौका मिलते ही दुकानों से लेकर ठेली पर फल सब्जी बेचने वालों को चपत लगाते रहते हैं। जिनमें एक गाय शनिवार की सुबह आश्रय स्थल के बाहर नाले में गिर पड़ी, जो दिन भर नाले में ही तड़पती रही मगर आश्रय स्थल की देखरेख करने वाले कर्मचारी और आसपास में रहने वालों समेत राहगीरों ने भी उसे नाले से बाहर निकालने की कोई जहमत उठाना मुनासिब नहीं समझा। राजू, देवेंद्र, लखपत, अनिल, महेश का कहना है कि आश्रय स्थल की व्यवस्था होने के बाद भी गंगानगरी में बेसहारा पशुओं पर नकेल नहीं कस पा रही है।
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एसडीएम राममूर्ति त्रिपाठी का कहना है कि इस संबंध में जांच पड़ताल कराकर लापरवाही बरतने वाले आश्रय स्थल के कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कराई जाएगी, जबकि गंगानगरी से जुड़े सभी बेसहारा पशुओं को आश्रय स्थल में पहुंचवाया जाएगा।
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