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बिजनौर बैराज से पानी छोड़े जाने से किसानों में बेचैनी
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बिजनौर बैराज से पानी छोड़े जाने से किसानों में बेचैनी
गढ़मुक्तेश्वर। पहाड़ों की बारिश और बिजनौर बैराज से पानी छोड़े जाने पर गढ़ के खादर में किसानों की चिंता बढ़ गई है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होने से किनारे वाले जंगल में भूकटान होने से फसलों में बर्बादी होने का डर सता रहा।
पश्चिमी यूपी समेत एनसीआर क्षेत्र में भले ही अभी मानसून की कृपा अपेक्षित स्तर पर चालू नहीं हो पाई है, लेकिन पहाड़ों पर झमाझम बारिश होने से गढ़ गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। इससे खादर क्षेत्र से जुड़े करीब डेढ़ दर्जन गांवों में किसान चिंतित हैं। गंगा के पानी का बहाव तेज होने से किनारे वाले जंगल में भूकटान हो रहा है। उत्तराखंड के बाद मौसम विभाग ने दो तीन दिन के भीतर पश्चिमी यूपी और दिल्ली एनसीआर में भी मानसून की भारी बरसात होने का अनुमान जताया हुआ, जिससे खादर क्षेत्र के किसानों को डर सता रहा है कि गंगा के किनारे से जुड़े निचले जंगल में पानी भरने से फसलों में बड़ी तबाही मचेगी। फिलहाल बाढ़ आने जैसी कोई संभावना नहीं मानी जा रही है, लेकिन पहाड़ों की बारिश और मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मद्देनजर तहसील प्रशासन अहतियाती तौर पर अपनी तैयारी पूरी करने में जुटा हुआ है। तहसीलदार सुरेंद्र सिंह का कहना है कि पहाड़ों की बारिश से गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होना सामान्य बात है। फिलहाल गंगा में बाढ़ आने जैसी कोई भी संभावना नहीं है, लेकिन अगले दो चार दिन में मानसूनी बारिश का सिलसिला शुरू होने के मद्देनजर सभी अहतियाती इंतजाम पूरे कराए जा रहे हैं। बताया कि केंद्रीय जल आयोग मेरठ के कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार पहाड़ों की बारिश से गढ़ ब्रजघाट गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होने का सिलसिला जारी चल रहा है, जिसके चलते शुक्रवार को दस सेंटीमीटर की बढ़ोतरी होने से ब्रजघाट गंगा का जलस्तर बढ़कर समुद्रतल से 197.40 मीटर के निशान पर पहुंच चुका है।
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गढ़मुक्तेश्वर। पहाड़ों की बारिश और बिजनौर बैराज से पानी छोड़े जाने पर गढ़ के खादर में किसानों की चिंता बढ़ गई है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होने से किनारे वाले जंगल में भूकटान होने से फसलों में बर्बादी होने का डर सता रहा।
पश्चिमी यूपी समेत एनसीआर क्षेत्र में भले ही अभी मानसून की कृपा अपेक्षित स्तर पर चालू नहीं हो पाई है, लेकिन पहाड़ों पर झमाझम बारिश होने से गढ़ गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। इससे खादर क्षेत्र से जुड़े करीब डेढ़ दर्जन गांवों में किसान चिंतित हैं। गंगा के पानी का बहाव तेज होने से किनारे वाले जंगल में भूकटान हो रहा है। उत्तराखंड के बाद मौसम विभाग ने दो तीन दिन के भीतर पश्चिमी यूपी और दिल्ली एनसीआर में भी मानसून की भारी बरसात होने का अनुमान जताया हुआ, जिससे खादर क्षेत्र के किसानों को डर सता रहा है कि गंगा के किनारे से जुड़े निचले जंगल में पानी भरने से फसलों में बड़ी तबाही मचेगी। फिलहाल बाढ़ आने जैसी कोई संभावना नहीं मानी जा रही है, लेकिन पहाड़ों की बारिश और मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मद्देनजर तहसील प्रशासन अहतियाती तौर पर अपनी तैयारी पूरी करने में जुटा हुआ है। तहसीलदार सुरेंद्र सिंह का कहना है कि पहाड़ों की बारिश से गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होना सामान्य बात है। फिलहाल गंगा में बाढ़ आने जैसी कोई भी संभावना नहीं है, लेकिन अगले दो चार दिन में मानसूनी बारिश का सिलसिला शुरू होने के मद्देनजर सभी अहतियाती इंतजाम पूरे कराए जा रहे हैं। बताया कि केंद्रीय जल आयोग मेरठ के कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार पहाड़ों की बारिश से गढ़ ब्रजघाट गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होने का सिलसिला जारी चल रहा है, जिसके चलते शुक्रवार को दस सेंटीमीटर की बढ़ोतरी होने से ब्रजघाट गंगा का जलस्तर बढ़कर समुद्रतल से 197.40 मीटर के निशान पर पहुंच चुका है।
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