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महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में फिसड्डी है गंगानगरी
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महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में फिसड्डी है गंगानगरी
गढ़मुक्तेश्वर। तहसील क्षेत्र के पास जर्जर हो चुके पुराने सरकारी अस्पताल में महिला अस्पताल बनाने की काफी समय से मांग की जा रही है। प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री व अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। हाल यह है कि गढ़ ब्रजघाट समेत तहसील क्षेत्र के सौ से भी अधिक गांवों की महिलाओं को निशुल्क चिकित्सा सेवा मुहैया नहीं हो पा रही हैं।
गढ़मुक्तेश्वर में सरकारी स्तर से इस दौर में भी महिला अस्पताल की कोई सुविधा नहीं है, जिसके चलते गढ़ ब्रजघाट समेत तहसील क्षेत्र के सौ से भी अधिक गांवों की महिलाओं को निजी अस्पतालों अथवा मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, दिल्ली जैसे अस्पतालों को जाना पड़ता है। जिससे आने जाने में समय और पैसे की अनावश्यक बर्बादी होने के साथ ही सफर का जोखिम भी उठाना पड़ता है। मानवाधिकार एवं भ्रष्टाचार निवारण संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज लोधी राजपूत समेत विभिन्न सामाजिक संगठन कई वर्षों से पुराने सरकारी अस्पताल की बिल्डिंग में महिला अस्पताल बनवाने की मांग करते आ रहे हैं, जो कई बार सीएम समेत स्वास्थ्य विभाग को पत्रचार कर चुके हैं। जिनका कहना है कि धार्मिक दृष्टि से दूर दूर तक विख्यात होने के बाद भी गढ़ क्षेत्र विकास और चिकित्सा सेवाओं के लिहाज से बेहद पिछड़ा हुआ है। इसलिए टिन की प्याऊ के पास तीन दशकों से बंद पड़े सरकारी अस्पताल की बुरी तरह जर्जर हो चुकी बिल्डिंग को विकसित कराकर उसमें अलग से महिला अस्पताल की सेवाएं मुहैया कराई जाएं, जिससे गरीब कमजोर वर्ग से जुड़ीं महिलाओं को भी स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सेवा उपलब्ध हो सकें।
स्वास्थ्य मंत्री ने दिया था अस्पताल बनवाने का आश्वासन
प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह 27 अक्तूबर 2017 को गढ़ के दौरे पर आए थे, जिन्होंने पुराने अस्पताल की जर्जर हो चुकी बिल्डिंग का निरीक्षण कर क्षेत्रीय जनता की डिमांड पर उसमें बहुत जल्द महिला अस्पताल बनवाए जाने का भरोसा दिया था, लेकिन इस संबंध में अभी तक कोई कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई है।
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कोट-
सीएचसी अधीक्षक डॉ. दिनेश भारती का कहना है कि महिला अस्पताल बनवाने के संबंध में जल्द ही सभी बिंदुओं से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद इसे शासन को भिजवाया जाएगा। शासन के आदेश पर ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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गढ़मुक्तेश्वर। तहसील क्षेत्र के पास जर्जर हो चुके पुराने सरकारी अस्पताल में महिला अस्पताल बनाने की काफी समय से मांग की जा रही है। प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री व अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। हाल यह है कि गढ़ ब्रजघाट समेत तहसील क्षेत्र के सौ से भी अधिक गांवों की महिलाओं को निशुल्क चिकित्सा सेवा मुहैया नहीं हो पा रही हैं।
गढ़मुक्तेश्वर में सरकारी स्तर से इस दौर में भी महिला अस्पताल की कोई सुविधा नहीं है, जिसके चलते गढ़ ब्रजघाट समेत तहसील क्षेत्र के सौ से भी अधिक गांवों की महिलाओं को निजी अस्पतालों अथवा मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, दिल्ली जैसे अस्पतालों को जाना पड़ता है। जिससे आने जाने में समय और पैसे की अनावश्यक बर्बादी होने के साथ ही सफर का जोखिम भी उठाना पड़ता है। मानवाधिकार एवं भ्रष्टाचार निवारण संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज लोधी राजपूत समेत विभिन्न सामाजिक संगठन कई वर्षों से पुराने सरकारी अस्पताल की बिल्डिंग में महिला अस्पताल बनवाने की मांग करते आ रहे हैं, जो कई बार सीएम समेत स्वास्थ्य विभाग को पत्रचार कर चुके हैं। जिनका कहना है कि धार्मिक दृष्टि से दूर दूर तक विख्यात होने के बाद भी गढ़ क्षेत्र विकास और चिकित्सा सेवाओं के लिहाज से बेहद पिछड़ा हुआ है। इसलिए टिन की प्याऊ के पास तीन दशकों से बंद पड़े सरकारी अस्पताल की बुरी तरह जर्जर हो चुकी बिल्डिंग को विकसित कराकर उसमें अलग से महिला अस्पताल की सेवाएं मुहैया कराई जाएं, जिससे गरीब कमजोर वर्ग से जुड़ीं महिलाओं को भी स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सेवा उपलब्ध हो सकें।
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स्वास्थ्य मंत्री ने दिया था अस्पताल बनवाने का आश्वासन
प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह 27 अक्तूबर 2017 को गढ़ के दौरे पर आए थे, जिन्होंने पुराने अस्पताल की जर्जर हो चुकी बिल्डिंग का निरीक्षण कर क्षेत्रीय जनता की डिमांड पर उसमें बहुत जल्द महिला अस्पताल बनवाए जाने का भरोसा दिया था, लेकिन इस संबंध में अभी तक कोई कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई है।
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कोट-
सीएचसी अधीक्षक डॉ. दिनेश भारती का कहना है कि महिला अस्पताल बनवाने के संबंध में जल्द ही सभी बिंदुओं से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद इसे शासन को भिजवाया जाएगा। शासन के आदेश पर ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।