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34 गांवों में फैली लंपी, 154 पशु संक्रमित
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34 गांवों में फैली लंपी, 154 पशु संक्रमित
हापुड़। जिले के 34 गांवों में लंपी बीमारी फैल गई है, शनिवार को 24 नए संक्रमित पशु मिले। बीमारी की रोकथाम के लिए बकरियों को चेचक होने पर दी जाने वाली गोट पोक्स वैक्सीन निदेशालय पहुंच गई है, हापुड़ को शनिवार देर रात या रविवार तक 80 हजार वैक्सीन उपलब्ध करायी जाएंगी। सोमवार से टीकाकरण शुरू होगा। शासन से नामित नोडल अधिकारी भी जिले का भ्रमण कर सकते हैं। कई पशुओं की हालत गंभीर है, विभाग की 12 टीमों ने गांवों में संक्रमित पशुओं का उपचार किया।
शुक्रवार को गांव तिगरी में प्रेम सिंह और धर्मवीर के दो पशुओं की मौत संदिग्ध परिस्थिति में हो गई। पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने पशुओं की मौत किसी अन्य बीमारी से होने का दावा किया है, हालांकि पशुओं का पोस्टमार्टम नहीं हो सका था। जबकि क्षेत्र में चर्चा लंपी बीमारी से मौत की ही है।
सिंभावली क्षेत्र के अधिकांश गांवों में अब लंपी बीमारी ने पैर पसार लिए हैं। संक्रमित पशु बुखार से तप रहे हैं, जिनमें सामान्य लक्षण हैं, वे पशु कुछ खा पी भी रहे हैं, लेकिन बहुत से पशुओं की हालत गंभीर बनी हुई है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि इसका टीका हिसार में लगभग तैयार हो चुका है।
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बकरियों में चेचक होने पर उन्हें दी जाने वाली गोट पॉक्स वैक्सीन से ही हापुड़ में पशुओं को टीका लगाने की तैयारी है। 80 हजार वैक्सीन जिले के लिए आवंटित कर दी गई हैं, जो निदेशालय पहुंच गई हैं। शनिवार रात या रविवार तक वैक्सीन जिले को उपलब्ध हो जाएगी। ऐसे में पशुपालकों को कुछ राहत मिलेगी।
शनिवार को नहीं लगी साप्ताहिक पैठ
जिले में शनिवार को लगने वाली साप्ताहिक पैठ नहीं लग सकी, ऐसे में करोड़ों के पशुओं की खरीद फरोख्त भी प्रभावित हो गई। वहीं दूसरे प्रदेशों से भी पशुओं की खरीद फरोख्त पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
संपर्क में आते ही बीमार पड़ रहे गोवंश
लंपी बीमारी से संक्रमित पशु के संपर्क में आते ही गोवंश बीमार पड़ रहे हैं। भैंस, अश्व प्रजाति पर इस बीमारी का असर फिलहाल नहीं दिख रहा है, लेकिन गोवंश बीमारी की चपेट में आकर बुखार से तप रहे हैं।
इन गांवों में फैली बीमारी
गांव माधापुर, तिगरी, डहरिया, औरंगाबाद, दत्तियाना, नान, ब्रजनाथपुर, श्यामपुर, शुकरामपुर, धनपुरा, सबली, ददायरा, मलकपुर, बुकलाना, इकलैड़ी, बझैड़ा खुर्द, सपनावत, डिबाई, शरीकपुर, सिलारपुर, मुक्तेश्वरा, मतनौरा, अट्टा।
पशु के संक्रमित होने का कारण
मवेशियों या जंगली भैंसों में यह रोग गांठदार त्वचा रोग वायरस (एलएसडीवी) के संक्रमण के कारण होता है। यह वायरस केप्रिपॉक्स वायरस जीनस के भीतर तीन निकट संबंधी प्रजातियों में से एक है, इसमें अन्य दो प्रजातियां शीपपॉक्स वायरस और गोटपॉक्स वायरस हैं।
लंपी रोग के लक्षण
इस बीमारी में शरीर पर गांठें बनने लगती हैं। खासकर सिर, गर्दन और जननांगों के आसपास।
इसके बाद धीरे-धीरे गांठे बड़ी होने लगती हैं और फिर ये घाव में बदल जाती हैं।
इस बीमारी में गाय को तेज बुखार आने लगता है।
गाय दूध देना कम कर देती है।
मादा पशुओं का गर्भपात हो जाता है।
यह पूरे शरीर में विशेष रूप से सिर, गर्दन, अंगों, थन (मादा मवेशी की स्तन ग्रंथि) और जननांगों के आसपास दो से पांच सेंटीमीटर व्यास की गांठ के रूप में प्रकट होता है।
इसके अन्य लक्षणों में सामान्य अस्वस्थता, आंख और नाक से पानी आना, बुखार तथा दूध के उत्पादन में अचानक कमी आदि शामिल है।
सोमवार से होगा टीकाकरण
लंबी बीमारी से बचाव के लिए वैक्सीन निदेशालय पहुंच गई है। सोमवार से जिले में टीकाकरण शुरू किया जाएगा। गोट पॉक्स वैक्सीन से टीकाकरण होगा, पशुपालक संक्रमित पशु की जानकारी दें और उसे दूसरे पशुओं से अलग कर दें। - डॉ. प्रमोद कुमार, सीवीओ
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हापुड़। जिले के 34 गांवों में लंपी बीमारी फैल गई है, शनिवार को 24 नए संक्रमित पशु मिले। बीमारी की रोकथाम के लिए बकरियों को चेचक होने पर दी जाने वाली गोट पोक्स वैक्सीन निदेशालय पहुंच गई है, हापुड़ को शनिवार देर रात या रविवार तक 80 हजार वैक्सीन उपलब्ध करायी जाएंगी। सोमवार से टीकाकरण शुरू होगा। शासन से नामित नोडल अधिकारी भी जिले का भ्रमण कर सकते हैं। कई पशुओं की हालत गंभीर है, विभाग की 12 टीमों ने गांवों में संक्रमित पशुओं का उपचार किया।
शुक्रवार को गांव तिगरी में प्रेम सिंह और धर्मवीर के दो पशुओं की मौत संदिग्ध परिस्थिति में हो गई। पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने पशुओं की मौत किसी अन्य बीमारी से होने का दावा किया है, हालांकि पशुओं का पोस्टमार्टम नहीं हो सका था। जबकि क्षेत्र में चर्चा लंपी बीमारी से मौत की ही है।
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सिंभावली क्षेत्र के अधिकांश गांवों में अब लंपी बीमारी ने पैर पसार लिए हैं। संक्रमित पशु बुखार से तप रहे हैं, जिनमें सामान्य लक्षण हैं, वे पशु कुछ खा पी भी रहे हैं, लेकिन बहुत से पशुओं की हालत गंभीर बनी हुई है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि इसका टीका हिसार में लगभग तैयार हो चुका है।
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बकरियों में चेचक होने पर उन्हें दी जाने वाली गोट पॉक्स वैक्सीन से ही हापुड़ में पशुओं को टीका लगाने की तैयारी है। 80 हजार वैक्सीन जिले के लिए आवंटित कर दी गई हैं, जो निदेशालय पहुंच गई हैं। शनिवार रात या रविवार तक वैक्सीन जिले को उपलब्ध हो जाएगी। ऐसे में पशुपालकों को कुछ राहत मिलेगी।
शनिवार को नहीं लगी साप्ताहिक पैठ
जिले में शनिवार को लगने वाली साप्ताहिक पैठ नहीं लग सकी, ऐसे में करोड़ों के पशुओं की खरीद फरोख्त भी प्रभावित हो गई। वहीं दूसरे प्रदेशों से भी पशुओं की खरीद फरोख्त पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
संपर्क में आते ही बीमार पड़ रहे गोवंश
लंपी बीमारी से संक्रमित पशु के संपर्क में आते ही गोवंश बीमार पड़ रहे हैं। भैंस, अश्व प्रजाति पर इस बीमारी का असर फिलहाल नहीं दिख रहा है, लेकिन गोवंश बीमारी की चपेट में आकर बुखार से तप रहे हैं।
इन गांवों में फैली बीमारी
गांव माधापुर, तिगरी, डहरिया, औरंगाबाद, दत्तियाना, नान, ब्रजनाथपुर, श्यामपुर, शुकरामपुर, धनपुरा, सबली, ददायरा, मलकपुर, बुकलाना, इकलैड़ी, बझैड़ा खुर्द, सपनावत, डिबाई, शरीकपुर, सिलारपुर, मुक्तेश्वरा, मतनौरा, अट्टा।
पशु के संक्रमित होने का कारण
मवेशियों या जंगली भैंसों में यह रोग गांठदार त्वचा रोग वायरस (एलएसडीवी) के संक्रमण के कारण होता है। यह वायरस केप्रिपॉक्स वायरस जीनस के भीतर तीन निकट संबंधी प्रजातियों में से एक है, इसमें अन्य दो प्रजातियां शीपपॉक्स वायरस और गोटपॉक्स वायरस हैं।
लंपी रोग के लक्षण
इस बीमारी में शरीर पर गांठें बनने लगती हैं। खासकर सिर, गर्दन और जननांगों के आसपास।
इसके बाद धीरे-धीरे गांठे बड़ी होने लगती हैं और फिर ये घाव में बदल जाती हैं।
इस बीमारी में गाय को तेज बुखार आने लगता है।
गाय दूध देना कम कर देती है।
मादा पशुओं का गर्भपात हो जाता है।
यह पूरे शरीर में विशेष रूप से सिर, गर्दन, अंगों, थन (मादा मवेशी की स्तन ग्रंथि) और जननांगों के आसपास दो से पांच सेंटीमीटर व्यास की गांठ के रूप में प्रकट होता है।
इसके अन्य लक्षणों में सामान्य अस्वस्थता, आंख और नाक से पानी आना, बुखार तथा दूध के उत्पादन में अचानक कमी आदि शामिल है।
सोमवार से होगा टीकाकरण
लंबी बीमारी से बचाव के लिए वैक्सीन निदेशालय पहुंच गई है। सोमवार से जिले में टीकाकरण शुरू किया जाएगा। गोट पॉक्स वैक्सीन से टीकाकरण होगा, पशुपालक संक्रमित पशु की जानकारी दें और उसे दूसरे पशुओं से अलग कर दें। - डॉ. प्रमोद कुमार, सीवीओ