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गढ़ में चटाई बनाने वाली संतोष की आत्मनिर्भरता को पीएम मोदी ने सराहा
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गढ़ नगर में चटाई वाले मोहल्ले में चटाई बनाती संतोष देवी।
- फोटो : GARH
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गढ़ में चटाई बनाने वाली संतोष की आत्मनिर्भरता को पीएम मोदी ने सराहा
गढ़मुक्तेश्वर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में आत्मनिर्भर भारत के उदाहरण में गढ़ गंगानगरी के चटाई कारोबार का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने चटाई निर्माता संतोष देवी का नाम लिया तो उनके परिजनों और चटाई बनाने वाले लोगों में खुशी छा गई। प्रधानमंत्री द्वारा अपने कार्यक्रम में चटाई के व्यवसाय का जिक्र करने के बाद इससे जुड़े लोगों में कारोबार के तेजी से बढ़ने की आस जगी है।
गंगानगरी गढ़मुक्तेश्वर में सैकड़ों वर्षों से चटाई बनाने का काम किया जाता है। ये इलाका चटाई और मूढ़ा उद्योग के लिए दूर दूर तक प्रसिद्घ है। हस्तशिल्प केंद्र के रूप में भी इसकी पहचान है। गढ़ नगर के सैकड़ों परिवार चटाई बनाने के व्यवसाय से जुड़े हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में गढ़ नगर के मोहल्ला चटाई वाला निवासी ऋषिपाल सिंह की पत्नी संतोष देवी का जिक्र आत्मनिर्भर भारत बनने के आह्वान में उदाहरण के रूप में किया। पीएम ने कहा कि कोरोना जैसी महामारी के बीच भी संतोष ने चटाई बनाने के कार्य नहीं छोड़ा, जिसमें चटाई की डिमांड समय-समय में मिलती रही और लॉकडाउन जैसे समय में भी बिक्री होती रही। आत्मनिर्भर भारत बनाने के प्रयासों का ये एक बेहतरीन उदाहरण है। पीएम के संबोधन में संतोष देवी का जिक्र आते ही उनके घर और चटाई निर्माण के व्यवसाय से जुड़े लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। पीएम मोदी द्वारा गंगानगरी ब्रजघाट में होने वाले हस्तशिल्प निर्माताओं के काम को आत्मनिर्भर भारत के स्लोगन से जोड़ा गया है। संतोष देवी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मन की बात में नगर के छोटे से कस्बे में चटाई से जुड़े कार्यों के बारे में जानकारी लेते हुए पूरे देश को आत्मनिर्भर भारत बनने का अच्छा उदाहरण दिया है, जिसे सुनकर वह काफी खुश हैं।
पीएम मोदी का ध्यान पड़ने से खुश हैं संतोष
संतोष देवी ने कहा कि चटाई बनने के बाद में दो सौ से तीन रुपये में ठेकेदार खरीदकर ले जाते हैं। जिसके बाद आगे कंपनी और अन्य संस्थाओं में वहीं माल ठेकेदारों या बिचौलियों द्वारा सात से आठ सौ रुपये में बेच दिया जाता है। लोकल स्तर पर अधिक दाम नहीं मिलता जबकि ऊपर जाकर वही माल महंगे दामों में बेचा जाता है। संतोष देवी ने कहा कि सरकार को कुछ इस तरह की योजनाएं लानी चाहिए जिसमें चटाई निर्माता को एक निश्चित मू्ल्य मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार हस्तशिल्प को बढ़ावा दे रही है,अब पीएम मोदी का ध्यान आने से उम्मीद बंधी है कि शायद ऐसी व्यवस्था होगी कि अपना माल सीधे ग्राहकों को बेच सकें।
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कच्चा माल भी बाहर से मंगाना पड़ रहा
संतोष देवी ने बताया कि गंगा के खादर क्षेत्र में पहले आबादी काफी कम थी, अधिकांश स्थानों पर बंजर भूमि थी। तराई क्षेत्र में चटाई बनाने से संबंधित कच्चा माल (पटेरा) पहले आसानी से उपलब्ध हो जाता था। क्षेत्र में ही पैदा होने के चलते कच्चे माल के दाम भी काफी कम थे। लेकिन अब अधिकांश क्षेत्र में खेती होने लगी है, जिसके चलते पटेरा उगना बंद हो गया है। अब कच्चा माल बाहर से मंगाना पड़ता है, जिससे लागत भी अधिक हो जाती है।
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चटाई और मूढे़ के कारगीरों में जगी आस
गढ़मुक्तेश्वर। प्रधानमंत्री द्वारा गढ़ गंगानगरी के चटाई उद्योग के बारे में जिक्र होने से लोगों में कारोबार बढ़ने की आस जाग गई है, जिससे संबंधित कार्य से जुड़े कार्यों करने वालों में खुशी का माहौल बना हुआ है। गढ़ नगर में सैकड़ों वर्षों से मूढ़ा और चटाई बनाने का काम कुटीर उद्योग के रूप में अपनी जड़े जमा चुका है। जिससे सैकड़ों परिवार इस मूढ़ा और चटाई बनाने के काम से जुड़े हुए हैं। ये उनकी आजीविका का साधन है। गढ़ में बने मूढ़ों और चटाई का निर्यात विदेशों तक होता है।
एक जिला एक उत्पाद में जगह बना सकता है गढ़ का चटाई व मूढ़ा उद्योग
गढ़मुक्तेश्वर के चटाई व मूढे़ के कारोबार का जिक्र प्रधानमंत्री द्वारा मन की बात कार्यक्रम में करने से इस उद्योग को नए पंख लगने की उम्मीद जगी है। आशा जताई जा रही है कि भविष्य में गढ़ का चटाई व मूढ़ा उद्योग एक जिला-एक उत्पाद में भी शामिल हो सकता है।
हापुड़ का गढ़मुक्तेश्वर चटाई और मूढ़ा उद्योग के लिए विश्व प्रसिद्ध है। ये उद्योग हाथ के हुनर से जुड़ा है। कई दशक पुराना ये उद्योग भले ही अभी तक उपेक्षा का शिकार रहा हो लेकिन प्रधानमंत्री के जिक्र के बाद अब इसके एक जनपद एक उत्पाद में शामिल होने की संभावना बढ़ गई है। चटाई व मूढ़ा बनाने वाली संतोष देवी ने यहां के मजदूरों की समस्याओं को देश के मुखिया तक पहुंचा दी है। जिसके बाद चटाई उद्योग को नई परवाज मिलने की उम्मीद भी जगी है।
प्रदेश सरकार एक जिला-एक उत्पाद की कवायद कर रही है। हर जनपद की खास किस्म व उत्पाद को प्रमुखता दिलाने का काम किया जा रहा है। संतोष देवी द्वारा चटाई उद्योग से जुड़ी समस्याओं को उठाने के बाद आने वाले समय में गढ़मुक्तेश्वर के चटाई व मूढ़ा उद्योग को एक जिला एक उत्पाद में शामिल होने की उम्मीद जग गई है। गढ़ में इस उद्योग से हजारों मजदूर और कारीगर जुड़े हैं। ऐसा होने पर इस उत्पाद और इससे जुड़े लोगों को अवश्य लाभ मिलेगा।
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गढ़मुक्तेश्वर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में आत्मनिर्भर भारत के उदाहरण में गढ़ गंगानगरी के चटाई कारोबार का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने चटाई निर्माता संतोष देवी का नाम लिया तो उनके परिजनों और चटाई बनाने वाले लोगों में खुशी छा गई। प्रधानमंत्री द्वारा अपने कार्यक्रम में चटाई के व्यवसाय का जिक्र करने के बाद इससे जुड़े लोगों में कारोबार के तेजी से बढ़ने की आस जगी है।
गंगानगरी गढ़मुक्तेश्वर में सैकड़ों वर्षों से चटाई बनाने का काम किया जाता है। ये इलाका चटाई और मूढ़ा उद्योग के लिए दूर दूर तक प्रसिद्घ है। हस्तशिल्प केंद्र के रूप में भी इसकी पहचान है। गढ़ नगर के सैकड़ों परिवार चटाई बनाने के व्यवसाय से जुड़े हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में गढ़ नगर के मोहल्ला चटाई वाला निवासी ऋषिपाल सिंह की पत्नी संतोष देवी का जिक्र आत्मनिर्भर भारत बनने के आह्वान में उदाहरण के रूप में किया। पीएम ने कहा कि कोरोना जैसी महामारी के बीच भी संतोष ने चटाई बनाने के कार्य नहीं छोड़ा, जिसमें चटाई की डिमांड समय-समय में मिलती रही और लॉकडाउन जैसे समय में भी बिक्री होती रही। आत्मनिर्भर भारत बनाने के प्रयासों का ये एक बेहतरीन उदाहरण है। पीएम के संबोधन में संतोष देवी का जिक्र आते ही उनके घर और चटाई निर्माण के व्यवसाय से जुड़े लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। पीएम मोदी द्वारा गंगानगरी ब्रजघाट में होने वाले हस्तशिल्प निर्माताओं के काम को आत्मनिर्भर भारत के स्लोगन से जोड़ा गया है। संतोष देवी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मन की बात में नगर के छोटे से कस्बे में चटाई से जुड़े कार्यों के बारे में जानकारी लेते हुए पूरे देश को आत्मनिर्भर भारत बनने का अच्छा उदाहरण दिया है, जिसे सुनकर वह काफी खुश हैं।
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पीएम मोदी का ध्यान पड़ने से खुश हैं संतोष
संतोष देवी ने कहा कि चटाई बनने के बाद में दो सौ से तीन रुपये में ठेकेदार खरीदकर ले जाते हैं। जिसके बाद आगे कंपनी और अन्य संस्थाओं में वहीं माल ठेकेदारों या बिचौलियों द्वारा सात से आठ सौ रुपये में बेच दिया जाता है। लोकल स्तर पर अधिक दाम नहीं मिलता जबकि ऊपर जाकर वही माल महंगे दामों में बेचा जाता है। संतोष देवी ने कहा कि सरकार को कुछ इस तरह की योजनाएं लानी चाहिए जिसमें चटाई निर्माता को एक निश्चित मू्ल्य मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार हस्तशिल्प को बढ़ावा दे रही है,अब पीएम मोदी का ध्यान आने से उम्मीद बंधी है कि शायद ऐसी व्यवस्था होगी कि अपना माल सीधे ग्राहकों को बेच सकें।
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कच्चा माल भी बाहर से मंगाना पड़ रहा
संतोष देवी ने बताया कि गंगा के खादर क्षेत्र में पहले आबादी काफी कम थी, अधिकांश स्थानों पर बंजर भूमि थी। तराई क्षेत्र में चटाई बनाने से संबंधित कच्चा माल (पटेरा) पहले आसानी से उपलब्ध हो जाता था। क्षेत्र में ही पैदा होने के चलते कच्चे माल के दाम भी काफी कम थे। लेकिन अब अधिकांश क्षेत्र में खेती होने लगी है, जिसके चलते पटेरा उगना बंद हो गया है। अब कच्चा माल बाहर से मंगाना पड़ता है, जिससे लागत भी अधिक हो जाती है।
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चटाई और मूढे़ के कारगीरों में जगी आस
गढ़मुक्तेश्वर। प्रधानमंत्री द्वारा गढ़ गंगानगरी के चटाई उद्योग के बारे में जिक्र होने से लोगों में कारोबार बढ़ने की आस जाग गई है, जिससे संबंधित कार्य से जुड़े कार्यों करने वालों में खुशी का माहौल बना हुआ है। गढ़ नगर में सैकड़ों वर्षों से मूढ़ा और चटाई बनाने का काम कुटीर उद्योग के रूप में अपनी जड़े जमा चुका है। जिससे सैकड़ों परिवार इस मूढ़ा और चटाई बनाने के काम से जुड़े हुए हैं। ये उनकी आजीविका का साधन है। गढ़ में बने मूढ़ों और चटाई का निर्यात विदेशों तक होता है।
एक जिला एक उत्पाद में जगह बना सकता है गढ़ का चटाई व मूढ़ा उद्योग
गढ़मुक्तेश्वर के चटाई व मूढे़ के कारोबार का जिक्र प्रधानमंत्री द्वारा मन की बात कार्यक्रम में करने से इस उद्योग को नए पंख लगने की उम्मीद जगी है। आशा जताई जा रही है कि भविष्य में गढ़ का चटाई व मूढ़ा उद्योग एक जिला-एक उत्पाद में भी शामिल हो सकता है।
हापुड़ का गढ़मुक्तेश्वर चटाई और मूढ़ा उद्योग के लिए विश्व प्रसिद्ध है। ये उद्योग हाथ के हुनर से जुड़ा है। कई दशक पुराना ये उद्योग भले ही अभी तक उपेक्षा का शिकार रहा हो लेकिन प्रधानमंत्री के जिक्र के बाद अब इसके एक जनपद एक उत्पाद में शामिल होने की संभावना बढ़ गई है। चटाई व मूढ़ा बनाने वाली संतोष देवी ने यहां के मजदूरों की समस्याओं को देश के मुखिया तक पहुंचा दी है। जिसके बाद चटाई उद्योग को नई परवाज मिलने की उम्मीद भी जगी है।
प्रदेश सरकार एक जिला-एक उत्पाद की कवायद कर रही है। हर जनपद की खास किस्म व उत्पाद को प्रमुखता दिलाने का काम किया जा रहा है। संतोष देवी द्वारा चटाई उद्योग से जुड़ी समस्याओं को उठाने के बाद आने वाले समय में गढ़मुक्तेश्वर के चटाई व मूढ़ा उद्योग को एक जिला एक उत्पाद में शामिल होने की उम्मीद जग गई है। गढ़ में इस उद्योग से हजारों मजदूर और कारीगर जुड़े हैं। ऐसा होने पर इस उत्पाद और इससे जुड़े लोगों को अवश्य लाभ मिलेगा।