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Hapur News: नहाना तो छोड़िए... आचमन योग्य भी नहीं है गंगा का पानी
Sun, 24 Dec 2023 10:16 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Sun, 24 Dec 2023 10:16 PM IST
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हापुड़। करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक गंगा का पानी भी लापरवाही और सिस्टम की नाकामी के कारण दूषित हो गया है। जानकर हैरानी होगी कि गंगा का पानी अब आचमन तो क्या डुबकी लगाने योग्य भी नहीं रह गया है। नवंबर माह में राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के तहत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लिए गए नमूनों में गढ़-ब्रजघाट क्षेत्र में गंगा का पानी पिछले पांच माह से सी श्रेणी में बना हुआ है। यह तब है जब जनवरी माह में माघ मेले के लिए सतर्कता बरती जा रही है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गंगा की अपस्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम दो स्थानों से नमूने लिए जाते हैं। नवंबर माह की जांच रिपोर्ट के साथ पिछले अक्तूबर, सितंबर, अगस्त, जुलाई में भी गंगा का पानी सी श्रेणी में रखा गया है। केवल मई माह में ही यह बी श्रेणी में था। जिसका अर्थ है कि गंगा का पानी नहाने योग्य है, लेकिन आचमन करने योग्य नहीं, जबकि सी श्रेणी में यह अत्यधिक दूषित हो जाता है। लॉकडाउन की बात करें तो इस दौरान अप्रैल माह में गंगा का पानी बी श्रेणी में था, लेकिन उसके बाद सिर्फ अक्टूबर माह में पानी बी श्रेणी में था। लॉकडाउन के दौरान उद्योग बंद थे। गंगा में स्नान समेत तमाम तरह की गतिविधियां बंद हो गईं थीं, लेकिन अब जैसे-जैसे अनलॉक शुरू हुआ तो गंगा जल की गुणवत्ता खराब होती चली गई। गंगा को साफ कराने के नाम पर चलाए जा रहे अभियान और दावे केवल कागजी दिखाई दे रहे हैं।
जल में जीवाणुओं की भरमार
जल में फीकल कोलीफार्म यानी मलजनित जीवाणुओं की भरमार है, जिसके चलते गंगा में जल नहाने योग्य नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में गंगा नदी का जल जनपद बदायूं के कछलाघाट और झांसी के ललितपुर को छोड़कर कहीं भी नहाने योग्य नहीं है। ऐसी स्थिति पिछले कुछ महीनों से लगातार बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार नवंबर माह में गढ़मुक्तेश्वर अप स्ट्रीम में गंगा जल में टोटल कोलीफार्म 540, फीकल कोलीफार्म 240, घुलनशील ऑक्सीजन 12.6 और बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड 2.0 रही। जबकि डाउन स्ट्रीम में टोटल कोलीफार्म 1600, फीकल कोलीफार्म 1200, घुलनशील आक्सीजन 12.1, बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड 2.1 मिलीग्राम प्रति लीटर रही। जीवाणुओं से जुड़े तमाम रोगों के लिए जिम्मेदार टोली कोलीफार्म की संख्या प्रति 350 मिली लीटर रही।
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कई साल से बंद है गढ़ में एसटीपी
ब्रजघाट और गढ़ में 40.68 करोड़ की लागत से दो एसटीपी बनने के बावजूद गंगा में 23 नालों का दूषित पानी गिर रहा है। तकनीकी खामी और लापरवाही की वजह से सालों से ये प्लांट लगभग बंद हैं। गढ़ के नयाबांस में नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत ब्रजघाट में दो एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) 40.68 करोड़ की लागत से 2011 में बनाए गए थे। दोनों प्रोजेक्ट संचालित करने की जिम्मेदारी जयपुर की संस्था आनंदी लाल लालपुरिया को दी गई थी। लेकिन अब इनका संचालन नहीं हो रहा है।
कोट -
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विकास मिश्रा का कहना है कि गंगा में दूषित पानी गिरने पर पूरी तरह रोक है। जिसका पालन कराया जा रहा है। लगातार इसकी निगरानी की जा रही है। समस्या का समाधान निकालने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
क्या है बीओडी -
बीओडी का मतलब बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड होता है। बीओडी ऑक्सीजन की वो मात्रा है जो पानी में रहने वाले जीवों को गैर-जरूरी आर्गेनिक पदार्थों को नष्ट करने के लिए चाहिए। बीओडी जितनी ज्यादा होगी पानी का आक्सीजन उतनी तेजी से खत्म होगा और बाकी जीवों पर उतना ही बुरा असर होगा।
नदी की जल गुणवत्ता की विभिन्न श्रेणी -
ए -प्राथमिक उपचार के साथ पीने के योग्य
बी- नहाने के योग्य। गुणवत्ता मध्यम से अच्छी
सी- गुणवत्ता असंतोषजनक
डी - गुणवत्ता अति असंतोषजनक
ई- गुणवत्ता बेहद खराब
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गंगा की अपस्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम दो स्थानों से नमूने लिए जाते हैं। नवंबर माह की जांच रिपोर्ट के साथ पिछले अक्तूबर, सितंबर, अगस्त, जुलाई में भी गंगा का पानी सी श्रेणी में रखा गया है। केवल मई माह में ही यह बी श्रेणी में था। जिसका अर्थ है कि गंगा का पानी नहाने योग्य है, लेकिन आचमन करने योग्य नहीं, जबकि सी श्रेणी में यह अत्यधिक दूषित हो जाता है। लॉकडाउन की बात करें तो इस दौरान अप्रैल माह में गंगा का पानी बी श्रेणी में था, लेकिन उसके बाद सिर्फ अक्टूबर माह में पानी बी श्रेणी में था। लॉकडाउन के दौरान उद्योग बंद थे। गंगा में स्नान समेत तमाम तरह की गतिविधियां बंद हो गईं थीं, लेकिन अब जैसे-जैसे अनलॉक शुरू हुआ तो गंगा जल की गुणवत्ता खराब होती चली गई। गंगा को साफ कराने के नाम पर चलाए जा रहे अभियान और दावे केवल कागजी दिखाई दे रहे हैं।
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जल में जीवाणुओं की भरमार
जल में फीकल कोलीफार्म यानी मलजनित जीवाणुओं की भरमार है, जिसके चलते गंगा में जल नहाने योग्य नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में गंगा नदी का जल जनपद बदायूं के कछलाघाट और झांसी के ललितपुर को छोड़कर कहीं भी नहाने योग्य नहीं है। ऐसी स्थिति पिछले कुछ महीनों से लगातार बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार नवंबर माह में गढ़मुक्तेश्वर अप स्ट्रीम में गंगा जल में टोटल कोलीफार्म 540, फीकल कोलीफार्म 240, घुलनशील ऑक्सीजन 12.6 और बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड 2.0 रही। जबकि डाउन स्ट्रीम में टोटल कोलीफार्म 1600, फीकल कोलीफार्म 1200, घुलनशील आक्सीजन 12.1, बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड 2.1 मिलीग्राम प्रति लीटर रही। जीवाणुओं से जुड़े तमाम रोगों के लिए जिम्मेदार टोली कोलीफार्म की संख्या प्रति 350 मिली लीटर रही।
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कई साल से बंद है गढ़ में एसटीपी
ब्रजघाट और गढ़ में 40.68 करोड़ की लागत से दो एसटीपी बनने के बावजूद गंगा में 23 नालों का दूषित पानी गिर रहा है। तकनीकी खामी और लापरवाही की वजह से सालों से ये प्लांट लगभग बंद हैं। गढ़ के नयाबांस में नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत ब्रजघाट में दो एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) 40.68 करोड़ की लागत से 2011 में बनाए गए थे। दोनों प्रोजेक्ट संचालित करने की जिम्मेदारी जयपुर की संस्था आनंदी लाल लालपुरिया को दी गई थी। लेकिन अब इनका संचालन नहीं हो रहा है।
कोट -
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विकास मिश्रा का कहना है कि गंगा में दूषित पानी गिरने पर पूरी तरह रोक है। जिसका पालन कराया जा रहा है। लगातार इसकी निगरानी की जा रही है। समस्या का समाधान निकालने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
क्या है बीओडी -
बीओडी का मतलब बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड होता है। बीओडी ऑक्सीजन की वो मात्रा है जो पानी में रहने वाले जीवों को गैर-जरूरी आर्गेनिक पदार्थों को नष्ट करने के लिए चाहिए। बीओडी जितनी ज्यादा होगी पानी का आक्सीजन उतनी तेजी से खत्म होगा और बाकी जीवों पर उतना ही बुरा असर होगा।
नदी की जल गुणवत्ता की विभिन्न श्रेणी -
ए -प्राथमिक उपचार के साथ पीने के योग्य
बी- नहाने के योग्य। गुणवत्ता मध्यम से अच्छी
सी- गुणवत्ता असंतोषजनक
डी - गुणवत्ता अति असंतोषजनक
ई- गुणवत्ता बेहद खराब