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Hapur News: हापुड़ और धौलाना तहसील में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहा है पूर्व पेशकार

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 29 Dec 2024 10:46 PM IST
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Former Peshkar has also been posted on many important posts in Hapur and Dhaulana tehsil
हापुड़ । जिलाधिकारी के पूर्व पेशकार (रीडर) व वर्तमान में गढ़ तहसील में प्रधान सहायक ब्रजभूषण हापुड़ और धौलाना तहसील में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे हैं। मुकदमा दर्ज होने के बाद पूर्व पेशकार की गिरफ्तार के लिए पुलिस टीम जुट गई है। शुक्रवार और शनिवार को दो रिपोर्ट प्रशासन के अधिकारियों ने दर्ज कराई हैं, जिसमें कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों के अलावा अन्य 18 वादों की फाइलें न सौंपने का आरोप है।
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पूर्व पेशकार ब्रजभूषण वर्ष 2013 से बागपत जिले से हापुड़ में आए थे। यह राजस्व लिपिक, वासिल वाकी नवीस, धौलाना में तैनात रहे तत्कालीन एसडीएम के पेशकार भी रह चुके हैं। जबकि, दो बार अनियमितता मिलने पर इनके ऊपर विभागीय कार्रवाई भी हो चुकी है। जिसके बाद अब सभी जगहों से रिपोर्ट आदि भी मांगने की तैयारी है। कहीं अन्य स्थान पर तैनाती के बीच भी यह सब खेल तो नहीं हुआ था।
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मामले में सवाल यह भी है कि पूर्व पेशकार को अधूरी फाइलों के बीच जुलाई माह में चार्ज छोड़ने क्यों दिया गया। जबकि, चार्ज लेने से पहले संबंधित को सभी फाइलें अपने पास कब्जे में लेनी चाहिए थी। इसके बाद ही चार्ज छोड़ने दिया जाना था। यह फाइलें अब मिलेंगी भी या नहीं, इसको लेकर भी सवाल है। मुकदमे में प्रशासन के अधिकारियों का साफ कहना है कि 18 फाइलें व अन्य दस्तावेज सौंपे नहीं गए हैं। यदि अधिकारियों ने इसका संज्ञान पहले ही गंभीरता से लिया होता तो आज यह नौबत नहीं आती।
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बता दें कि जिलाधिकारी के पूर्व पेशकार ब्रजभूषण पर बैंक संबंधी एक वाद की पत्रावली व आदेश पर डीएम प्रेरणा शर्मा के फर्जी हस्ताक्षर करने के आरोप हैं। मामले का खुलासा होने के बाद पूर्व पेशकार पर डीएम के कूटरचित एवं फर्जी हस्ताक्षर का पहला मुकदमा शुक्रवार की रात और फाइलों के गायब होने का दूसरा मुकदमा शनिवार की शाम को दर्ज हुआ है।

मामले में एएसपी विनीत भटनागर का कहना है कि विभिन्न बिंदुओं को लेकर जांच जारी है। इसके साथ ही गिरफ्तारी भी होगी।

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यह था पूरा मामला --

अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व संदीप कुमार ने बताया कि 20 दिसंबर को डीएम के रीडर (पेशकार) की आख्या प्राप्त हुई थी, इसमें बताया गया था कि न्यायालय में एक वाद यूनियन बैंक इंडिया बनाम शुभम कंसल और अन्य का सरफेसी एक्ट यानि बैंक के ऋण संबंधी मामले में दर्ज है। इस मामले में आदेश की नकल प्राप्त करने के लिए एक पक्ष की ओर से 16 दिसंबर 2024 को आर्डर की कॉपी मांगी गई थी, इसमें सात मार्च 2024 को पहले ही आदेश होना मिला। यह आदेश बार कोडेड एवं आरसीसीएमएस पोर्टल पर नहीं मिला। जबकि, नियमानुसार प्रत्येक आदेश बार कोडेड एवं आरसीसीएमएस पोर्टल पर दर्ज होना अनिवार्य होता है। मामले में शक होने पर जांच के बाद मुकदमा दर्ज कराया गया।


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कानून व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं गायब फाइलें

मुकदमे के अनुसार, जिन 18 फाइलों की महत्वपूर्ण पत्रावलियां नहीं मिली हैं। उसमें गुंडा नियंत्रण अधिनियम की ही 10 से अधिक फाइलें शामिल हैं। गुंडा नियंत्रण अधिनियम की फाइलें न मिलने का अर्थ है कि कानून व्यवस्था को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा जनपद के बनने के वर्ष 2011 से वर्ष 2023 के कुछ अभिलेख जैसे डाक पंजिका, पत्रावलियों को दाखिल दफ्तर किए जाने की पंजिका, न्यायालय की गार्ड फाइल, केस डायरी आदि की फाइलें भी चार्ज छोड़ने के बाद पूर्व पेशकार ब्रजभूषण द्वारा नहीं सौंपी गई हैं।


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