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बाढ़ का कहर: 11 सेंटीमीटर बढ़ा गंगा का जलस्तर, 199.57 मीटर के निशान को छुआ; खादर के गांवों में हाल बेहाल
Sat, 09 Aug 2025 03:06 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़)
अमर उजाला नेटवर्क, गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़)
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 09 Aug 2025 03:06 PM IST
सार
हापुड़ के गढ़ में गंगा का जलस्तर 11 सेंटीमीटर बढ़ गया है। अब गंगा ने 199.57 मीटर के निशान को छू लिया है। खादर के गांवों में ग्रामीणों का हाल बेहाल हो गया है। भाइयों को राखी बांधने के लिए बहनें को जलभराव के बीच से होकर गुजरना पड़ा।
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Garh Ganga water level
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर में दो दिन से लगातार गंगा का उफान जारी है। रूद्रप्रयाग में बादल फटने और बिजनौर बैराज से लाखों क्यूसेक डिस्चार्ज ने गढ़-ब्रजघाट क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है। एक दर्जन से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं।
खेतों व जंगल में जलभराव से पशुओं के लिए चारे की किल्लत बढ़ गई। इसके अलावा गांवों में जन-जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। बाढ़ के कारण खादर क्षेत्र के गांवों में रक्षाबंधन का त्योहार भी फीका रहा। बहनों को अपने भाइयों के घर पहुंचने के लिए जलभराव से गुजरना मजबूरी बनी रही।
शनिवार की सुबह भी ब्रजघाट में गंगा का जलस्तर 199.57 मीटर(समुंद्र तल से) दर्ज किया गया। जोकि बाढ़ के निशान 199.33मीटर से 24 सेंटीमीटर अधिक है। बाढ़ से काकाठेर की मढै़या, कुदैनी की मढै़या, रेतो वाली मढ़ैया, गडावली, लठीरा, भगवंतपुर समेत करीब एक दर्जन से अधिक गांव बुरी तरह प्रभावित हैं।
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घरों में पानी घुसने से अनाज और खाने का सामान भीग चुका है। वहीं, चूल्हे न जल पाने के कारण गृहणियों को खाना बनाने में भारी दिक्कत हो रही है। जंगल समेत आबादी में जिधर नजर डालो, चारों तरफ केवल पानी ही पानी दिखाई दे रहा है।
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खेतों व जंगल में जलभराव से पशुओं के लिए चारे की किल्लत बढ़ गई। इसके अलावा गांवों में जन-जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। बाढ़ के कारण खादर क्षेत्र के गांवों में रक्षाबंधन का त्योहार भी फीका रहा। बहनों को अपने भाइयों के घर पहुंचने के लिए जलभराव से गुजरना मजबूरी बनी रही।
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शनिवार की सुबह भी ब्रजघाट में गंगा का जलस्तर 199.57 मीटर(समुंद्र तल से) दर्ज किया गया। जोकि बाढ़ के निशान 199.33मीटर से 24 सेंटीमीटर अधिक है। बाढ़ से काकाठेर की मढै़या, कुदैनी की मढै़या, रेतो वाली मढ़ैया, गडावली, लठीरा, भगवंतपुर समेत करीब एक दर्जन से अधिक गांव बुरी तरह प्रभावित हैं।
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घरों में पानी घुसने से अनाज और खाने का सामान भीग चुका है। वहीं, चूल्हे न जल पाने के कारण गृहणियों को खाना बनाने में भारी दिक्कत हो रही है। जंगल समेत आबादी में जिधर नजर डालो, चारों तरफ केवल पानी ही पानी दिखाई दे रहा है।
सरदार काबल सिंह ने बताया कि यू तो लगभग हर साल ही खादर क्षेत्र के लोग गांवों में जलभरावे की समस्या से जूझते हैं, लेकिन वर्ष 2013 में केदारनाथ त्रास्दी के दौरान बाढ़ की विभिषिका झेली थी। लेकिन शासन और प्रशासनिक स्तर से बाढ़ की आपदा को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
जलभराव के बीच से होकर गुजरी बहनें
रक्षाबंधन पर्व पर अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने के लिए बहनें गांव के बाहरी छोर तक तो सही ढंग से पुहंच गईं। लेकिन गांव के रास्तों पर जलभराव ने एक बार तो उनके कदम रोक लिए। परंतु, भाई-भतीजों से मिलने और राखी बांधने के उत्साह ने उन्हें आगे बढ़ाया। रास्तों पर करीब तीन फुट तक भरे पानी के बीचे गुजर कर बहने अपने भाइयों के घर पहुंच सकीं।
रक्षाबंधन पर्व पर अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने के लिए बहनें गांव के बाहरी छोर तक तो सही ढंग से पुहंच गईं। लेकिन गांव के रास्तों पर जलभराव ने एक बार तो उनके कदम रोक लिए। परंतु, भाई-भतीजों से मिलने और राखी बांधने के उत्साह ने उन्हें आगे बढ़ाया। रास्तों पर करीब तीन फुट तक भरे पानी के बीचे गुजर कर बहने अपने भाइयों के घर पहुंच सकीं।
बीमारी का खतरा बढ़ा
दूषित पानी आबादी और घरों में घुसने से चर्म रोग, उदर विकार और अन्य संक्रामक बीमारियां खादर क्षेत्र में फैलने की संभावना बन गई है। जिस कारण ग्रामीण और भी परेशान हैं। दूषित पानी से आवागमन करना उनकी मजबूरी है। ऐसे में बीमारियों की आशंका उन्हें सता रही है। प्रधान निरंजन सिंह का कहना है कि मनुष्यों के साथ ही दुधारू पशुओं के बीमार होने की भी संभावना बन गई है।
दूषित पानी आबादी और घरों में घुसने से चर्म रोग, उदर विकार और अन्य संक्रामक बीमारियां खादर क्षेत्र में फैलने की संभावना बन गई है। जिस कारण ग्रामीण और भी परेशान हैं। दूषित पानी से आवागमन करना उनकी मजबूरी है। ऐसे में बीमारियों की आशंका उन्हें सता रही है। प्रधान निरंजन सिंह का कहना है कि मनुष्यों के साथ ही दुधारू पशुओं के बीमार होने की भी संभावना बन गई है।
राजस्व टीम और बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारी लगातार गांवों में पहुंच रहे हैं। जो ग्रामीणों को जागरूक कर रहे हैं। राहत शिविरों में सभी तैयारी पूरी हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों में पहुंच रही है। लोगों को राहत देने के लिए हर संभव प्रयास जारी हैं। - श्रीराम सिंह, एसडीएम