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Hapur News: मौत के लिए उकसाने में पत्नी व प्रेमी को पांच-पांच साल की सजा
Sat, 06 Sep 2025 09:41 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Sat, 06 Sep 2025 09:41 PM IST
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हापुड़। पति को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में शनिवार को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम ने मृतक की पत्नी व उसके प्रेमी को दोषी करार दिया है। दोनों दोषियों को पांच-पांच साल के कठोर कारावास के साथ दस-दस हजार रुपये का अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
वर्ष 2016 में गांव बक्सर निवासी इशाक ने थाना सिंभावली में तहरीर देते हुए मुकदमा दर्ज कराया था कि उसके बड़े भाई अलाउद्दीन का निकाह करीब दो वर्ष पूर्व जिला मेरठ के थाना सरधना क्षेत्र के मोहल्ला आजाद नगर निवासी राशिदा से हुआ था। निकाह से पूर्व ही राशिदा का जिला मेरठ के परीक्षितगढ़ निवासी दिलशाद उर्फ दिल्लू से प्रेम प्रसंग चल रहा था। निकाह के बाद दिलशाद ने भाई के घर आना-जाना शुरू कर दिया। उन्होंने इसका विरोध किया तो राशिदा अपने पति अलाउद्दीन के साथ मोहल्ला बक्सर में ही किराए के एक मकान में रहने लगी। लेकिन दिलशाद ने वहां भी जाना शुरू कर दिया। भाई के विरोध करने पर दिलशाद ने राशिदा से मिलना बंद नहीं किया।
पीड़ित ने बताया कि एक मार्च 2016 को उनका भाई अलाउद्दीन उसके घर आया। उसने बताया कि राशिदा का दिलशाद के साथ मेलजोल बंद नहीं है। वह रोकता है तो दोनों ने उसे जलील करते हुए कहते हैं कि वह दोनों तो ऐसे ही करेंगे। अगर, वह शर्मदार है तो रेल से कटकर आत्महत्या कर ले। इस पर पीड़ित ने भाई को काफी समझाया और घरेलू खर्च के लिए एक हजार रुपये दे दिए। इसके बाद भाई वापस बक्सर चला गया। 17 मार्च 2016 को वह अपने भाई अलाउद्दीन से मिलने उसके घर पहुंचा। इस पर राशिदा ने बताया कि अलाउद्दीन दो दिन से घर नहीं आया है। इसके बाद उसने भाई की तलाश शुरू कर दी।
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18 मार्च 2016 को राशिदा ने बताया 14 मार्च 2016 को अलाउद्दीन ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी है। पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाकर 17 मार्च 2016 को अलाउद्दीन के शव को दफना दिया है। पीड़ित ने भाई के पड़ोसियों से जानकारी की तो उन्होंने बताया कि दस मार्च 2016 को अलाउद्दीन काफी दुखी था। शाम को वह मोहल्ले में उन्हें मिला था। दुखी होने का कारण पूछा तो अलाउद्दीन ने बताया कि उसने अपनी पत्नी राशिदा को उसके प्रेमी दिलशाद के साथ चारपाई पर आपत्तिजनक स्थिति में देखा है। 19 मार्च 2016 को पीड़ित को पता चला कि दिलशाद उसकी भाभी राशिदा से मिलने आया हुआ है। पीड़ित व उसके दो साथी राशिदा के मकान पर पहुंचे तो कमरे का दरवाजा लगा हुआ था। अंदर राशिदा और दिलशाद दोनों बातें कर रहे थे कि हमारे रास्ते का कांटा हमने मिलकर हटा दिया है। अब हम पर कोई शक भी नहीं करेगा। कुछ दिन बाद हम दोनों शादी कर लेंगे।
पीड़ित ने दरवाजा खुलवाया तो दोनों उसे देखकर चौंक गए। पीड़ित ने पूछा तो दोनों ने बताया कि वह निकाह करना चाहते हैं। अलाउद्दीन अगर, जिंदा रहता तो वह निकाह नहीं कर पाते। इसलिए दोनों ने मिलकर अलाउद्दीन को आत्महत्या के लिए उकसाया था। मामले में पुलिस ने राशिदा व दिलशाद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। मुकदमे की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम विपिन कुमार द्वितीय के न्यायालय में चल रही थी। शनिवार को न्यायालय ने राशिदा व उसके प्रेमी दिलशाद उर्फ दिल्लू को अलाउद्दीन को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी माना और सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर दोषियों को तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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वर्ष 2016 में गांव बक्सर निवासी इशाक ने थाना सिंभावली में तहरीर देते हुए मुकदमा दर्ज कराया था कि उसके बड़े भाई अलाउद्दीन का निकाह करीब दो वर्ष पूर्व जिला मेरठ के थाना सरधना क्षेत्र के मोहल्ला आजाद नगर निवासी राशिदा से हुआ था। निकाह से पूर्व ही राशिदा का जिला मेरठ के परीक्षितगढ़ निवासी दिलशाद उर्फ दिल्लू से प्रेम प्रसंग चल रहा था। निकाह के बाद दिलशाद ने भाई के घर आना-जाना शुरू कर दिया। उन्होंने इसका विरोध किया तो राशिदा अपने पति अलाउद्दीन के साथ मोहल्ला बक्सर में ही किराए के एक मकान में रहने लगी। लेकिन दिलशाद ने वहां भी जाना शुरू कर दिया। भाई के विरोध करने पर दिलशाद ने राशिदा से मिलना बंद नहीं किया।
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पीड़ित ने बताया कि एक मार्च 2016 को उनका भाई अलाउद्दीन उसके घर आया। उसने बताया कि राशिदा का दिलशाद के साथ मेलजोल बंद नहीं है। वह रोकता है तो दोनों ने उसे जलील करते हुए कहते हैं कि वह दोनों तो ऐसे ही करेंगे। अगर, वह शर्मदार है तो रेल से कटकर आत्महत्या कर ले। इस पर पीड़ित ने भाई को काफी समझाया और घरेलू खर्च के लिए एक हजार रुपये दे दिए। इसके बाद भाई वापस बक्सर चला गया। 17 मार्च 2016 को वह अपने भाई अलाउद्दीन से मिलने उसके घर पहुंचा। इस पर राशिदा ने बताया कि अलाउद्दीन दो दिन से घर नहीं आया है। इसके बाद उसने भाई की तलाश शुरू कर दी।
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18 मार्च 2016 को राशिदा ने बताया 14 मार्च 2016 को अलाउद्दीन ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी है। पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाकर 17 मार्च 2016 को अलाउद्दीन के शव को दफना दिया है। पीड़ित ने भाई के पड़ोसियों से जानकारी की तो उन्होंने बताया कि दस मार्च 2016 को अलाउद्दीन काफी दुखी था। शाम को वह मोहल्ले में उन्हें मिला था। दुखी होने का कारण पूछा तो अलाउद्दीन ने बताया कि उसने अपनी पत्नी राशिदा को उसके प्रेमी दिलशाद के साथ चारपाई पर आपत्तिजनक स्थिति में देखा है। 19 मार्च 2016 को पीड़ित को पता चला कि दिलशाद उसकी भाभी राशिदा से मिलने आया हुआ है। पीड़ित व उसके दो साथी राशिदा के मकान पर पहुंचे तो कमरे का दरवाजा लगा हुआ था। अंदर राशिदा और दिलशाद दोनों बातें कर रहे थे कि हमारे रास्ते का कांटा हमने मिलकर हटा दिया है। अब हम पर कोई शक भी नहीं करेगा। कुछ दिन बाद हम दोनों शादी कर लेंगे।
पीड़ित ने दरवाजा खुलवाया तो दोनों उसे देखकर चौंक गए। पीड़ित ने पूछा तो दोनों ने बताया कि वह निकाह करना चाहते हैं। अलाउद्दीन अगर, जिंदा रहता तो वह निकाह नहीं कर पाते। इसलिए दोनों ने मिलकर अलाउद्दीन को आत्महत्या के लिए उकसाया था। मामले में पुलिस ने राशिदा व दिलशाद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। मुकदमे की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम विपिन कुमार द्वितीय के न्यायालय में चल रही थी। शनिवार को न्यायालय ने राशिदा व उसके प्रेमी दिलशाद उर्फ दिल्लू को अलाउद्दीन को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी माना और सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर दोषियों को तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।