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बुखार से रोज जा रही जान, स्वास्थ्य विभाग अंजान

Sat, 17 Sep 2016 08:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़ Updated Sat, 17 Sep 2016 08:23 PM IST
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Fever from being everyday lives.
बुखार से रोज जा रही जान, - फोटो : अमर उजाला

आए दिन बुखार से जिले में लोगों की जान जा रही है लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस महामारी को रोकने की बजाए जानकारी से ही इंकार कर अपना पल्ला झाड़ ले रहा है। शनिवार को भी कलक्टर गंज में बुखार ने एक वृद्ध की जान ले ली लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को इसकी सूचना तक नही है।

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सबसे बड़ी बात यह है कि  सरकारी रिकॉर्ड में अब तक बुखार से जिले में किसी की जान नहीं गई है। कलक्टर गंज निवासी गुलशन गाबा कई दिनों से बुखार से पीड़ित चल रहे थे। प्लेटलेट्स तेजी से गिरने के कारण शनिवार को मेरठ में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
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हालांकि, जिले में बुखार से यह पहली मौत नहीं है। आए दिन औसतन पांच लोगों की बुखार जान ले रहा है। फिर भी स्वास्थ्य विभाग अंजान है। सबसे बड़ी बात यह है कि मृतक के परिजनों के स्वास्थ्य जांच के लिए भी चिकित्सक उसके घर जाना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं।
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इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग के अफसर बुखार की रोकथाम को लेकर कितने सजग हैं।

जिले में इन दिनों बुखार से हर रोज लोग मर रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में मौतों का आंकड़ा शून्य हैं। बीते वर्ष भी डेंगू से कई लोगों की जान चली गई थी लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने सिर्फ एक महिला की मौत के कारण होना माना था।

उधर, स्वास्थ्य विभाग की टीम इतनी हाईटेक हो चुकी है कि बिना जांच किए ही मरीज की मौत का कारण पता लगा लेती हैं। कुल मिलाकर स्वास्थ्य अफसरों को अपनी रिपोर्ट में मृतक की मौत का कारण बुखार नहीं दर्शाना होता। मृतक के घर जाए बगैर ही उसकी मौत का कारण तय कर दिए जा रहे हैं।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके सिंह का कहना है कि बुखार से मौत की उन्हें कोई सूचना नहीं मिली है। फिर भी वह टीम को मौके पर भेजकर परिजनों के स्वास्थ्य की जांच कराएंगे।

डेंगू, चिकनगुनिया को लेकर भले ही शासन स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर रखा हैं लेकिन अफसर अपने एसी कमरों में बैठकर लोगों को जागरूकता का पाठ पढ़ाने में दिन काट रहे हैं। ऐसे में डेंगू, चिकनगुनिया का प्रकोप कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है।

स्थानीय अफसरों की सुस्ती लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। डेंगू, चिकनगुनिया से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से न तो कोई प्रचार-प्रसार किया गया और न ही संदिग्ध स्थानों पर जांच कर डेंगू का लार्वा नष्ट करने की कार्रवाई शुरू की गई।

बता दें पड़ोसी जिले मेरठ, बुलंदशहर, गाजियाबाद में स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर कूलर, छतों पर पड़े खाली डब्बों में पनप रहे हजारों की संख्या में डेंगू के लार्वा को नष्ट किया है। लेकिन जिले के अफसर डेंगू, चिकन गुनिया को कागजों में दबाने पर मेहनत कर रहे है।


गांवों में बुखार कहर बरपा रहा है। का प्रकोप जोरों पर है, ऐसे में ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। काफी शिकायतों के बाद गांवों में कैंप तो लगाए जाते हैं, लेकिन बिना जांच किए ही ग्रामीणों को दवाएं वितरित कर दी जाती हैं। ऐसे में ग्रामीणों को काफी परेशान होना पड़ता है।

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