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वादे पूरे होते तो मिट जाता पिछड़ेपन का दाग

Thu, 09 Feb 2017 07:14 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़ Updated Thu, 09 Feb 2017 07:14 PM IST
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Erased the stain of backwardness.
मिट जाता पिछड़ेपन का दाग - फोटो : अमर उजाला

चुनाव आते रहे, साथ में वादों का पिटारा लिए नेताजी जनता को छलते रहे। चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि और सरकारें बदलती रहीं, लेकिन जिले की सूरत में खास बदलाव नहीं हुआ। शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग धंधों को बढ़ावा देना, कानून व्यवस्था में सुधार को लेकर बड़े-बड़े वादे किए गए।कोई भी विधायक अपने दावों पर खरा नहीं उतरा।

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वादे पूरे होते तो जिले की सूरत शायद कुछ और होती। जिले में आज भी राजकीय उच्च शिक्षण संस्थानों का अभाव है। उच्च शिक्षा के लिए युवाओं को दूसरे जिलों की दौड़ लगानी पड़ती है। आलम यह है कि आजादी के 69 साल बाद भी जिले के दामन पर पिछड़ेपन का दाग लगा हुआ है। ऐसी ही विशेष रिपोर्ट पेश है।
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जिले में उद्योग धंधे परिवहन सुविधा के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। हापुड़ में बर्तन, पापड़, कपड़े का बड़ा कारोबार होता है। यहां का माल विदेशों तक भेजा जाता है। लेकिन परिवहन सुविधा नहीं मिलने के कारण उद्यमी माल एक्सपोर्ट करने में हिचकिचाते हैं।
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फिर उन्हें अपने रिस्क पर माल भेजना पड़ता है। चुनाव के दौरान नेताओं ने परिवहन सुविधा का दावा किया था जो आज तक भी सपना बनकर रह गया है।

जिले में अभी तक कोई राजकीय डिग्री कालेज नहीं है। छात्र महंगी फीस भरकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। इंजीनियरिंग के अच्छे शिक्षण संस्थानों में प्रवेश की चाह में छात्रों को दूसरे जिलों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

नेताजी वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में भी राजकीय डिग्री कालेज का सपना छात्रों को दिखाते थे। लेकिन यह सपना आज तक भी साकार नहीं हो सका है।

जिले में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। हत्या, बलात्कार, डकैती की घटनाएं इस कदर बढ़ीं हैं कि लोग असुरक्षा के चलते काफी भयभीत हैं। हर बार चुनाव में कानून व्यवस्था में सुधार का वायदा किया जाता है लेकिन हालात जस के तस हैं।

जिले में कोई स्थाई इंडस्ट्रीयल एरिया नहीं है। प्रत्येक चुनाव में नेताओं का उद्यमियों के बीच मुख्य एजेंडा होता है कि इस बार जिले में वह इंडस्ट्रीयल एरिया की व्यवस्था करायेंगे। लेकिन चुनाव संपन्न होते ही नेताजी अपने इन वादों को भूल जाते हैं।

शहर के मुख्य चौराहों पर लगने वाले जाम से शहर बदसूरत बना हुआ है। नेताजी अक्सर शहर को जाम मुक्त करने का वादा करते हैं। गढ़ रोड पर बन रहा फ्लाई ओवर दो वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में मंडी तक जाने में लोगों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है।

रेलवे फाटक के आस पास के व्यापारियों को कारोबार लगभग ठप हो चुका है। नेताजी का यह वादा भी धरातल पर नहीं उतर सका।

उपेड़ा निवासी धर्मेंद्र का कहना है कि नेता चुनाव जीतते रहे, सत्ता बदलती रहीं लेकिन जिले का विकास नहीं हुआ। परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुछ भी काम नहीं कराया गया। पढ़ाई के लिए बच्चों को बाहर भेजना पड़ता है। इलाज की भी बेहतर सुविधा नहीं है।

उद्यमी अमन गुप्ता का कहना है कि जिले में अभी तक इंडस्ट्रीयल एरिया नहीं बन सका है और न ही इंडस्ट्रीज को बिजली देने के लिए शहर में अलग बिजलीघर बन सका है। नेता हमेशा से इन मुद्दों को उद्यमियों के बीच लेकर उपस्थित होते हैं। लेकिन समस्या जस की तस है।

स्वर्ग आश्रम रोड त्यागी नगर निवासी नीरज त्यागी का कहना है कि सालों से स्वर्ग आश्रम रोड के लोग नरकीय जीवन जी रहे हैं। क्योंकि घरों के बाहर हमेशा गंदा पानी भरा रहता है। राजनेता आते हैं और चले जाते हैं। लेकिन इस जलभराव की समस्या से राहत नहीं मिल सकी है।

उद्यमी संजय कृपाल का कहना है कि गढ़ रोड पर बेहद धीमी रफ्तार से बन रहे फ्लाई ओवर निर्माण से स्थानीय कारोबार लगभग ठप हो चुका है। क्योंकि यहां के व्यापारियों का मुख्य कारोबार मंडी में है,


लेकिन रेलवे फाटक से बड़े वाहन न निकलने के कारण यह कारोबार ठप हो चुका है। नेताजी वोटों की रोटियां सेकने के लिए तो उद्यमियों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा करते हैं। लेकिन राहत कोई नहीं दिलाता।

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